हिन्दू धर्म में पवित्र धागे और उनका ज्योतिषीय महत्व

हिन्दू धर्म में पवित्र सूत्रों का बड़ा महत्व होता है। लोग इन पवित्र धागों को अपने शरीर के विभिन्न अंगों में धारण करते हैं। ये कच्चे धागे कलावा, रक्षा सूत्र, जनेऊ आदि के रूप में आप देख सकते हैं। लोगों का विश्वास है कि पवित्र सूत्र उन्हें बुरी नज़र और बुरी शक्तियों से बचाता हैं। इसलिए लोग रंग-बिरंगे धागों को अपनी कलाई, गले, बाजू, कमर के अलावा अन्य अंगों में धारण करते हैं। यहाँ अलग-अलग रंग के सूत्रों का अपना विशेष महत्व होता है। हिन्दू धर्म में तो इन धागों को धारण करना एक परंपरा के तौर पर देखा जाता है।

जैसा कि हमने बताया है कि प्रत्येक सूत्र विशेष महत्व को दर्शाता है। जैसे कुछ सूत्र ऐसे होते हैं जिनको धारण करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ मिलता है और कुछ धागे को पहनने से जीवन में सुख-समृद्धि और धन का आगमन होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न रंगों के महत्व को बताया गया है। यहाँ विभिन्न रंगों के धागों का संबंध संबंधित ग्रहों से होता है लिहाज़ा उनका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। चलिए जानते हैं विभिन्न रंग के सूत्रों के महत्व और लाभ:

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पीले रंग के सूत्र

शास्त्रों में पीले रंग का संबंध भगवान विष्णु से है। यह कलर व्यक्ति की कलात्मक एवं तार्किक शक्ति का प्रतीक होता है। यदि कोई व्यक्ति पीले रंग का धागा पहनता है तो उस व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है। इसके साथ ही उस व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और संवाद शैली में ज़बरदस्त सुधार देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त इस पवित्र धागे को हिन्दू धर्म के विवाह संस्कार से भी जोड़ा गया है। शादी-विवाह में दुल्हन दूल्हे को यह धागा बाँधकर पति के रूप में स्वीकार करती है।

जनेऊ

सनातन धर्म में जनेऊ सफेद रंग के तीन सूत्र से बना पवित्र धागा होता है। इसको पूर्ण विधि के अनुसार बाएं कंधे से दाएं बाजू की ओर शरीर में धारण किया जाता है। यहाँ तीन सूत्र का अर्थ त्रिदेव यानी ब्रहमा, विष्णु और महेश (शंकर जी) से है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सफेद रंग शुक्र ग्रह से संबंधित है। जनेऊ को उपनयन संस्कार अथवा यज्ञोपवित संस्कार के दौरान धारण किया जाता है। सामान्य रूप से यह संस्कार किसी बालक के किशोरावस्था से युवा अवस्था में प्रवेश करने पर किया जाता है।

केसरिया धागा

वैदिक ज्योतिष के अनुसार केसरिया या भगवा रंग त्याग, अग्नि और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। यह रंग सूर्य ग्रह से संबंध रखता है। हिन्दू धर्म में इस रंग को बेहद पवित्र रंग माना जाता है। यह साधु संतों का रंग होता है। बृहस्पति ग्रह के सहयोग से केसरिया रंग लोगों में आध्यात्मिक चेतना और ज्ञान का प्रसार करता है। ख्याति, शक्ति और समृद्धि पाने के लिए लोग केसरिया रंग का सूत्र अपनी कलाई में धारण करते हैं।

काला धागा

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार काला रंग का संबंध शनि ग्रह से है। इसलिए यह शनि से संबंधित ग्रह दोषों को दूर करता है। काला धागा व्यक्ति को बुरी नज़र और भूत प्रेत जैसी बुरी आत्माओं से बचाता है। हिन्दू धर्म में छोटे बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए उनके कमर में पहनाया जाता है। किशोर आयु के व्यक्ति इस धागे को अपनी कलाई या फिर बाजू में बांधते हैं। कुछ लोग इस काले धागे को अपने गले में भी पहनते हैं। यह धागा काला जादू एवं गूढ़ विज्ञान में भी प्रयोग में लाया जाता है। काला धागा मनुष्य के पंच तत्वों को ऊर्जा प्रदान करता है।

लाल धागा (कलावा)

कलावा धारण करना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। यज्ञ के दौरान इस धागे को पहना जाता था। इसलिए कलावा बांधने की परंपरा बहुत पहले से ही चली आ रही है। अक्सर पूजा के दौरान यह धागा पंडित द्वारा बांधा जाता है। इस धागे को रक्षा सूत्र अथवा मौली के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष की मानें तो लाल धागा बहुत शुभ होता है। इस धागे को लोग ईश्वर के आशीर्वाद के रूप में अपने हाथ में पहनते हैं। लोगों का विश्वास है कि कलावा पहनने से उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

आशा करते हैं कि हिन्दू धर्म की परंपरा के बारे में दी गई यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी। एस्ट्रोसेज के माध्यम से हम आपके लिए इस तरह के विशेष लेख लिखते रहेंगे!

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