बुध का कुंभ राशि में गोचर: ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि वाणी, तर्क, व्यापार शिक्षा और संवाद का प्रमुख कारक माना जाता है। जब यही बुध ग्रह अपनी राशि बदलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तो सोच समझने का तरीका बदलने लगता है, निर्णयों में व्यावहारिकता बढ़ती है और संवाद का प्रभाव गहरा हो जाता है। कुंभ राशि नवचार, स्वतंत्र विचार और समाज से जुड़े बदलावों का प्रतीक है, ऐसे में बुध का यहां गोचर मानसिक स्तर पर नई हलचल पैदा करता है और जीवन के क्षेत्रों में परिवर्तन की भूमिका तैयार करता है।
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आने वाले समय में बुध का यह गोचर कुछ राशियों के लिए अवसरों के नए द्वार खोल सकता है, तो कुछ के लिए यह आत्ममंथन और सीख लेने का दौर भी बन सकता है। इस अवधि में करियर, व्यापार, रिश्ते और निर्णय लेने की क्षमता पर विशेष असर देखने को मिलेगा। बता दें कि बुध ग्रह कुंभ राशि में गोचर करने जा रहे हैं।
एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग में आपको “बुध का कुंभ राशि में गोचर” से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी। तो आइए आगे बढ़ते हैं और सबसे पहले जानते हैं बुध गोचर की तिथि और समय।
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बुध का कुभ राशि में गोचर: तिथि और समय
बुद्धि और ज्ञान के देवता बुध ग्रह 03 फरवरी 2026 की रात 09 बजकर 38 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कुंभ राशि के स्वामी ग्रह शनि देव हैं और इस वजह से छात्र उच्च स्तर की दक्षता के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने में सक्षम होंगे।
ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि तर्क, वाणी और विवेक का प्रतिनिधि माना जाता है। यह ग्रह व्यक्ति को सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और संवाद कौशल को प्रभावित करता है। बुध की स्थिति जन्म कुंडली में यह बताती है कि व्यक्ति कितनी स्पष्टता से अपने विचार व्यक्त कर पाता है, व्यापार और लेन-देन में कितना कुशल है और शिक्षा व ज्ञान के क्षेज्ञ में उसकी पकड़ कैसी है।
बुध को गणित, लेखन, मीडिया, तकनीक, व्यापार और संचार से जुड़े कार्यों का कारक ग्रह माना जाता है। जब बुध मजबूत होता है, तो व्यक्ति तार्किक, समझदार और व्यवहारकुशल बनता है, वहीं बुध के कमजोर या अशुभ होने पर भ्रम, गलत निर्णय, वाणी दोष और मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए ज्योतिष में बुध ग्रह को जीवन की बौद्धिक दिशा तय करने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है।
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कुंभ राशि में बुध की विशेषता
कुंभ राशि में स्थित बुध व्यक्ति की सोच को आधुनिक, स्वतंत्र और प्रगतिशील बना देता है। इस स्थिति में बुध पांपरिक ढर्रे से हटकर नए विचारों, अनोखे दृष्टिकोण और भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय़ लेने की क्षमता प्रदान करता है। ऐसे लोग तर्क संगत होने के साथ-साथ समाज, तकनीक और मानव कल्याण से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रखते हैं।
कुंभ में बुध होने पर व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली, स्पष्ट और तर्कपूर्ण होती है, जिससे वह अपनी बात दूसरों तक अलग और प्रभावी ढंग से पहुंचा पाता है। यह योग वैज्ञानिक सोच, नवाचार, रिसर्च, तकनीकी क्षेत्र और सामाजिक कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। हालांकि, कभी-कभी अत्यधिक तर्कशीलता के कारण भावनात्मक दूरी या अपनी बात पर अड़े रहने की प्रवृत्ति भी देखी जा सकती है। कुल मिलाकर कुंभ राशि में बुध की स्थिति व्यक्ति को भीड़ से अलग सोचने वाला, दूरदर्शी और बदलाव को अपनाने वाला बनाती है।
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12 भावों में बुध ग्रह का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, तर्क, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है। कुंडली के 12 भावों में बुध की स्थिति व्यक्ति की सोच, संवाद और निर्णय क्षमता को अलग-अलग रूपों में प्रभावित करती है। नीचे 12 भावों में बुध ग्रह के प्रभाव को सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है:
पहला भाव
पहले भाव में बुध होने से व्यक्ति बुद्धिमान, चतुर और प्रभावशाली वक्ता बनता है। ऐसे लोग जल्दी सीखते हैं और अपनी समझदारी से दूसरों को प्रभावित करते हैं। बातचीत और तर्क इनके मजबूत पक्ष होते हैं।
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दूसरा भाव
यह स्थिति धन वाणी और पारिवारिक जीवन पर प्रभाव डालती है। व्यक्ति की वाणी मधुर होती है और धन कमान की समध अच्छी होती है। व्यापार या बोलकर कमाई करने में सफलता मिल सकती है।
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तीसरा भाव
तीसरे भाव में बुध साहस, संचार और लेखन क्षमता को मजबूत करता है। ऐसे लोग मीडिया, लेखन, मार्केटिंग या सेल्स से जुड़े क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। भाई-बहनों से सहयोग मिलता है।
चौथा भाव
यह योग मानसिक शांति, शिक्षा और घरेलू सुखों को प्रभावित करता है। व्यक्ति पढ़ाई में तेज होता है और संपत्ति या वाहन से लाभ मिलने की संभावना रहती है।
पांचवां भाव
पांचवां भाव में बुध बुद्धि रचनात्मकता और शिक्षा को बढ़ाता है। ऐसे लोग पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओ और संतान से जुड़ी बातों में सकारात्मक परिणाम पाते हैं।
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छठे भाव
यह स्थिति व्यक्ति को तर्क के बल पर शत्रुओं पर विज दिलाती है। नौकरी, प्रतियोगिता और विवादों में समझदारी से काम लेने की क्षमता बढ़ती है, हालांकि स्वास्थ्य को लेकर सावधानी जरूरी होती है।
सातवां भाव
संबंधों और साझेदारी में संवाद की भूमिका बढ़ जाती है। जीवनसाथी समझदार हो सकता है और व्यापारिक साझेदारी में लाभ मिलने के योग बनते हैं, लेकिन बातचीत में संतुलन जरूरी होता है।
आठवां भाव
आठवां भाव शोझ, रहस्य और गूढ़ विषयों से जुड़ा होता है। व्यक्ति गहरी सोच रहखने वाला होता है, लेकिन मानसिक उतार-चढ़ाव या निर्णय में भ्रम की स्थिति बन सकती है।
नौवां भाव
इस भाव में बुध भाग्य, धर्म और उच्च शिक्षा को प्रभावित करता है। व्यक्ति तर्क के साथ धार्मिक और दार्शनिक विषयों में रुचि रखता है तथा शिक्षण या सलाह देने वाले कार्यों में सफलता पा सकता है।
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दसवां भाव
यह योग करियर और कार्यक्षेत्र के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। व्यक्ति बुद्धि और संवाद के बल पर ऊंचा पद प्राप्त कर सकता है। प्रशासन, व्यापार, मीडिया और मैनेजमेंट में सफलता मिलती है।
ग्यारहवां भाव
ग्यारहवां भाव में बुध आय, लाभ और सामाजिक दायरे को बढ़ाता है। व्यक्ति नेटवर्किंग में माहिर होता है और मित्रों व संपर्कों के माध्यम से धन लाभ के योग बनते हैं।
बारहवां भाव
बारहवां भाव में बुध होने से व्यक्ति कल्पनाशील और गहरी सोच वाला होता है। विदेश से जुड़े कार्यों, लेखन या आध्यात्मिक क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुध ग्रह 03 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में गोचर करेंगे।
बुध का गोचर बुद्धि, वाणी, शिक्षा, व्यापार, करियर और निर्णय लेने की क्षमता पर सीधा प्रभाव डालता है। इस दौरान सोचने का तरीका और संवाद शैली बदल सकती है।
कुंभ राशि में बुध का गोचर सामान्यतः शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नवाचार, तर्कशक्ति, तकनीकी सोच और सामाजिक समझ को बढ़ाता है। हालांकि कुछ राशियों को आत्ममंथन और सावधानी की आवश्यकता होती है।