Bhishma Dwadashi: आज है भीष्म द्वादशी, इस दिन ज़रूर करें तिल का दान

माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन भीष्म द्वादशी (Bhishma Dwadashi) का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष आज यानी 24 फरवरी 2021 बुधवार के दिन भीष्म द्वादशी (Bhishma Dwadashi 2021) का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विधान बताया गया है। 

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, भीष्म पितामह ने अष्टमी के दिन अपने शरीर का त्याग किया था। हालांकि उनके निमित्त जो कोई भी धार्मिक कर्म इत्यादि किए गए वह द्वादशी के दिन किए गए थे। यही वजह है कि, भीष्म अष्टमी के बाद भीष्म द्वादशी का पर्व मनाया जाता है। 

यह भी पढ़ें: जानें भीष्म अष्टमी की रोचक कथा और शिक्षा

भीष्म द्वादशी 2021 तिथि और पूजा मुहूर्त (Bhishma Dwadashi Puja Muhurat)

भीष्म द्वादशी 24 फरवरी 2021 को बुधवार के दिन मनाई जाएगी.

द्वादशी तिथि आरंभ – 23 फरवरी 2021, 18:06 से.

द्वादशी समाप्त – 24 फरवरी 2021, 18:07

भीष्म द्वादशी से संबंधित कथा (Bhishma Dwadashi Katha)

महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह कौरवों के पक्ष से युद्ध लड़े थे। ऐसे में पांडवों को ऐसा प्रतीत हुआ कि वह कुछ भी करके भीष्म पितामह को हरा नहीं सकते हैं। तभी उन्हें इस बात की भनक लगी कि, भीष्म पितामह ने प्रण लिया था कि वह युद्ध में भी किसी भी स्त्री के समक्ष कभी भी शस्त्र नहीं उठाएंगे। ऐसे में जैसे ही पांडवों को इस बारे में भनक लगी उन्होंने एक चाल चली। उन्होंने शिखंडी को युद्ध के मैदान में भीष्म पितामह के समक्ष खड़ा कर दिया। 

अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार भीष्म पितामह ने अस्त्र-शस्त्र का उपयोग नहीं किया और अर्जुन में इस मौके का फायदा उठाते हुए उन पर बाणों की वर्षा कर दी। जिसके चलते भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेट गए। हालांकि उन्होंने असंख्य बाण लगने के बावजूद अपने प्राणों का त्याग नहीं दिया। उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। ऐसे में उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक का इंतजार किया। 

सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण पर पहुंचा तब अष्टमी तिथि के दिन भीष्म पितामह ने अपने प्राणों का त्याग किया। हालांकि उनके पूजन और अन्य कर्मकांड के लिए माघ मास की द्वादशी तिथि चयनित की गई। कहा जाता है इसी वजह से माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी (Bhishma Dwadashi) के रूप में मनाया जाता है। 

यह भी पढ़ें: कौरवों के युयुत्सु ने महाभारत के युद्ध में दिया था पांडवों का साथ

भीष्म द्वादशी पर तिल का महत्व (Bhishma Dwadashi Mahatva)

भीष्म द्वादशी के दिन तिल का दान करने, तिल के पानी से स्नान करने और तिल को हवन आदि में इस्तेमाल करने का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि जो कोई भी व्यक्ति भीष्म द्वादशी के दिन तिल का दान करता है उसके जीवन में तमाम ख़ुशियाँ अपना घर बना लेती हैं। साथ ही ऐसे व्यक्तियों को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता भी प्राप्त होती है। 

भीष्म द्वादशी के दिन तिल का दान करने से लेकर तिल को स्नान के पानी में डालकर उस जल से स्नान करने और तिल को खाने का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू धार्मिक महत्व के अनुसार तिल को बेहद ही पवित्र, पाप दूर करने वाला और पुण्यदाई माना जाता है। ऐसे में मुमकिन हो तो भीष्म द्वादशी के दिन अपनी यथाशक्ति अनुसार किसी ब्राह्मण को तिल का दान अवश्य करें। 

कहा जाता है कि, तिल का दान करने से अग्निष्टोम यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। सिर्फ इतना ही नहीं कहा जाता है कि, तिल का दान करने से गौ दान जितना फल व्यक्ति को प्राप्त होता है। 

यह भी पढ़ें: इस वजह के चलते पांडवों को खाना पड़ा था अपने मृत पिता का मांस

भीष्म द्वादशी पूजन विधि (Bhishma Dwadashi Pujan Vidhi)

  • भीष्म द्वादशी के दिन स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। 
  • इसके अलावा इस दिन सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। 
  • भीष्म द्वादशी के दिन भीष्म पितामह के निमित्त तिल, जल और कुश तर्पण करें। हालांकि यदि आप खुद किन्ही कारणवश तर्पण नहीं कर सकते तो आप किसी जानकार और योग्य ब्राह्मण से ऐसा करा सकते हैं। 
  • इसके अलावा भीष्म द्वादशी के दिन अपने यथाशक्ति अनुसार ब्राह्मणों और ज़रूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। 
  • भीष्म द्वादशी के दिन पूर्वजों का तर्पण करने का विधान बताया गया है। इसके अलावा इस दिन भीष्म पितामह की कथा सुनी जाती है। 
  • जो कोई भी व्यक्ति इस दिन सच्ची श्रद्धा और पूरे विधि विधान से इस दिन की पूजा आदि करता है उसके जीवन के सभी कष्ट और परेशानियां दूर होते हैं और साथ ही पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सही ढंग से किया जाए तो व्यक्ति को इस दिन की पूजा से पितृ दोष जैसे बड़े दोष से भी छुटकारा प्राप्त होता है।

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

Dharma

बजरंग बाण: पाठ करने के नियम, महत्वपूर्ण तथ्य और लाभ

बजरंग बाण की हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है। हनुमान जी को एक ऐसे देवता के रूप में ...

51 शक्तिपीठ जो माँ सती के शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों के हैं प्रतीक

भारतीय उप महाद्वीप में माँ सती के 51 शक्तिपीठ हैं। ये शक्तिपीठ माँ के भिन्न-भिन्न अंगों और उनके ...

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Kunjika Stotram) से पाएँ दुर्गा जी की कृपा

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एक ऐसा दुर्लभ उपाय है जिसके पाठ के द्वारा कोई भी व्यक्ति पराम्बा देवी भगवती ...

12 ज्योतिर्लिंग: शिव को समर्पित हिन्दू आस्था के प्रमुख धार्मिक केन्द्र

12 ज्योतिर्लिंग, हिन्दू आस्था के बड़े केन्द्र हैं, जो समूचे भारत में फैले हुए हैं। जहाँ उत्तर में ...

दुर्गा देवी की स्तुति से मिटते हैं सारे कष्ट और मिलता है माँ भगवती का आशीर्वाद

दुर्गा स्तुति, माँ दुर्गा की आराधना के लिए की जाती है। हिन्दू धर्म में दुर्गा जी की पूजा ...

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.