रक्षाबंधन पर लगेगा आंशिक चंद्र ग्रहण!

आंशिक चंद्र ग्रहण 2026: जानें तिथि, समय, नियम और सावधानियां!

आंशिक चंद्र ग्रहण 2026: अगस्त 2026 में केवल 16 दिनों के भीतर दूसरा ग्रहण लगने जा रहा है। इस माह का दूसरा ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन के दिन पड़ेगा इसलिए लोगों के मन में तिथि, समय और दृश्यता को लेकर सवाल उठ रहे होंगे। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में आपको “आंशिक चंद्र ग्रहण 2026” से जुड़ी जानकरी प्राप्त होगी। साथ ही, इस ग्रहण की सही तिथि, समय या सूतक काल लागू होगा या नहीं, इसके बारे में भी हम आपको अवगत करवाएंगे। 

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आंशिक चंद्र ग्रहण 2026: तिथि एवं समय 

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह ग्रहण श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। इस आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का समय इस प्रकार रहेगा:

ग्रहण का आरंभ:  रात 08 बजकर 04 मिनट से

अधिकतम ग्रहण:  रात 09 बजकर 43 मिनट 

ग्रहण समाप्त:  रात 11 बजकर 22 मिनट पर 

अवधि: 3 घंटे 18 मिनट 

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आंशिक चंद्र ग्रहण 2026: दृश्यता 

28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। सामान्य रूप से आंशिक चंद्र ग्रहण देश के किसी भी हिस्से में नज़र नहीं आएगा। 

सूतक काल मान्य नहीं होगा: जैसे कि हमने बताया कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इस दौरान सभी तरह के अनुष्ठान, शुभ कार्य, मंदिर में पूजा और दैनिक गतिविधियां बिना किसी रोक-टोक के किए जा सकेंगे। इसी प्रकार, रक्षाबंधन का पर्व भी निर्विघ्न मनाया जा सकेगा। 

विश्व में दृश्यता: बता दें कि आंशिक चंद्र ग्रहण भारत, चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया समेत एशिया के ज्यादातर हिस्सों में दिखाई नहीं देगा। लेकिन, यह अमेरिका के कई हिस्सों, पश्चिमी यूरोप और पश्चिमी अफ्रीका में नज़र आएगा। ब्रिटेन के लोग आंशिक चंद्र ग्रहण को शुरुआती चरण में देख पाएंगे और ग्रहण अधिकतम सुबह 05 बजकर 12  मिनट पर होगा। 

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आंशिक चंद्र ग्रहण का अर्थ 

चंद्र ग्रहण उस समय घटित होता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं: पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपच्छाया चंद्र ग्रहण। 

पूर्ण चंद्र ग्रहण: पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान संपूर्ण चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में आ जाता है जिससे चंद्रमा लाल या तांबे के रंग में दिखाई देने लगता है। 

आंशिक चंद्र ग्रहण: आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की उम्ब्रा में प्रवेश करता है, जबकि बाकी हिस्सा प्रकाशित रहता है। इस प्रकार, चंद्रमा का कुछ भाग अंधकार में और कुछ भाग प्रकाश में रहता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि 28 अगस्त 2026 को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण बहुत ख़ास होगा, क्योंकि ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का लगभग 96% हिस्सा ढक जाएगा। ऐसे में, यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होने के बावजूद पूर्ण चंद्र ग्रहण के जैसा दिखाई दे सकता है। 

उपच्छाया चंद्र ग्रहण: उपच्छाया चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया यानी कि पृथ्वी के बाहरी हिस्से से गुजरता है। इसी वजह से चंद्रमा थोड़ा धुंधला दिखाई देता है और इसे नंगी आंखों से देखना मुश्किल होता है।     

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आंशिक चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व 

आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी अपनी विशेष ग्रह की स्थिति के कारण वैदिक ज्योतिष में इसका महत्व बढ़ जाता है। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में शतभिषा नक्षत्र में रहेगा, जबकि सूर्य सिंह राशि में मघा नक्षत्र में स्थित होगा। ज्योतिष की दृष्टि से यह स्थिति खास है, क्योंकि शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु और मघा नक्षत्र के स्वामी केतु देव हैं। इस प्रकार, ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्र राहु-केतु के स्वामित्व वाले नक्षत्र में रहेंगे। 

वैदिक ज्योतिष में राहुकेतु को ग्रहण के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा छाया ग्रहों के नक्षत्र में स्थित होते हैं, तब ग्रहणकाल में कर्म संबंधी ऊर्जा अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। यह ग्रहण 12 अगस्त 2026 को घटित हुए सूर्य ग्रहण की ऊर्जा को आगे बढ़ाती है जिससे आत्मचिंतन और आत्मविकास को बल मिलता है। इसके अलावा, चंद्रमा मन, भावनाओं और आंतरिक शांति के कारक हैं। इस ग्रहण के दौरान पोषण देने वाली ऊर्जा प्रभावित होगी, इसलिए यह अवधि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल माना जाएगा।

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शतभिषा नक्षत्र में लगने वाले आंशिक चंद्र ग्रहण का महत्व 

आंशिक चंद्र ग्रहण 2026 शतभिषा नक्षत्र में लगेगा जो वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से 24वां नक्षत्र है। यह कुंभ राशि में स्थित है। शतभिषा का अर्थ “सौ चिकित्सक” या “सौ उपचारक” होता है जो उपचार और ज्ञान का ग्रह है। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु देव हैं और इसके अधिदेवता वरुण देव हैं, जिन्हें व्यवस्था और समुद्र से जुड़ा देवता माना जाता है। यह नक्षत्र सत्य, अनुशासन, शोध, विज्ञान, चिकित्सा और आध्यात्मिकता से संबंधित है। 

शतभिषा नक्षत्र से प्रभावित लोग विश्लेषणात्मक और खुले विचारों वाले होते हैं। यह चंद्र ग्रहण शतभिषा नक्षत्र में लगेगा इसलिए शतभिषा, आर्द्रा, स्वाति, धनिष्ठा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोगों पर अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इन लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव या घटनाएं देखने को मिल सकते हैं। 

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आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान किए जाने वाले उपाय 

  • आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्र देव के बीज मंत्र “ॐ सोम सोमाय नमः” का जाप करें। ऐसा करने से आप भावनात्मक रूप से संतुलन, मानसिक शांति और आंतरिक स्थिरता पाने में सहायता मिलती है। 
  • इस दिन आप “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमः शिवाय” जैसे मंत्रों का जाप करके भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। 
  • चंद्र ग्रहण के समय ध्यान, पूजा या धार्मिक कार्यों के लिए समय निकालें, क्योंकि ग्रहण की अवधि को आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।
  • इस अवधि में लोगों को कपड़े, भोजन, अनाज या जरूरत की वस्तुओं का दान करें। 
  • आंशिक चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान शांत रहें और सोच को सकारात्मक बनाए रखें। मन में नकारात्मक विचार लेकर आने से बचें। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. आंशिक आंशिक चंद्र ग्रहण 2026 में कब पड़ेगा?

इस साल आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। 

2. क्या आंशिक चंद्र ग्रहण 2026 भारत में दिखाई देगा?

नहीं, यह ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा। 

3. क्या चंद्र ग्रहण 2026 में सूतक काल का पालन किया जाएगा?

नहीं, यह ग्रहण भारत में नज़र नहीं आएगा इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।