लोहड़ी 2026: नए साल की शुरुआत के साथ सबको बेसब्री से वर्ष के पहले त्योहार यानी कि “लोहड़ी” का इंतज़ार रहता है जो पंजाबी और सिख समुदाय के प्रमुख पर्व होता है। इसे पर्व को हर साल बहुत धूमधाम से मनाया जाता है जिसके रौनक पूरे भारतवर्ष में देखने को मिलती है। इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई अपने पाठकों के लिए लोहड़ी 2026 का यह विशेष ब्लॉग लेकर आए हैं जिसके अंतर्गत हम आपको वर्ष 2026 के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्व लोहड़ी के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

साथ ही, इस दिन का धार्मिक, ज्योतिषीय और ऐतिहासिक महत्व से भी आपको अवगत करवाएंगे। इसके अलावा, लोहड़ी 2026 के अवसर पर आप किन उपायों को अपनाकर जीवन में धन-धान्य और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं. इसके बारे में भी हम विस्तार से चर्चा करेंगे। तो आइए आगे बढ़ते हैं और बिना देर किए शुरुआत करते हैं लोहड़ी 2026 स्पेशल इस ब्लॉग की।
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भारत एक ऐसा देश है जो विविधताओं से भरा है जहां भिन्न-भिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग एक-साथ मिलजुल कर रहते हैं और हर पर्व को बेहद प्रेम और सौहार्द से मनाते हैं। नए साल की शुरुआत होते ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है, और इन्हीं में से एक है उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार लोहड़ी।
मकर संक्रांति की तरह लोहड़ी को भी पूरे उत्साह और जोश से मनाया जाता है, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में। बता दें कि लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस अवसर पर संध्या के समय सभी लोग पारंपरिक पोशाक पहनते हैं और खुले स्थान पर आग जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। चलिए अब हम जान लेते हैं वर्ष 2026 में लोहड़ी कब मनाई जाएगी और क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त।
लोहड़ी 2026 तिथि और पूजा मुहूर्त
लोहड़ी की सही तिथि को लेकर हर साल लोगों के बीच एक कन्फ्यूजन देखने को मिलती है। ऐसे में, एस्ट्रोसेज एआई आपको लोहड़ी 2026 की सही तिथि के बारे में बताने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, लोहड़ी का पर्व प्रत्येक वर्ष पौष माह की शुक्ल पक्ष तिथि पर मनाया जाता है। इसके अगले दिन मकर संक्रांति आती है। इस प्रकार, साल 2026 में लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
लोहड़ी 2026 की तिथि: 13 जनवरी 2026, मंगलवार
लोहड़ी का क्षण: 14 जनवरी 2026 की दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से।
आइए अब हम जानते हैं लोहड़ी 2026 का धार्मिक महत्व।
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धार्मिक दृष्टि से लोहड़ी 2026
धार्मिक दृष्टि से लोहड़ी का विशेष महत्व माना गया है जिसे बहुत हर्षोउल्लास से मनाया जाता है। लोहड़ी पर्व से अनेक प्रकार की पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हुई हैं जिनके बारे में हम आपको बताएंगे। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और नई फसल का स्वागत करना होता है। सिखों और पंजाबी समुदाय के लोगों के लिए लोहड़ी का पर्व विशेष स्थान रखता है और यह दिन किसानों के लिए बेहद ख़ास होता है, इसलिए लोहड़ी को “फसल का त्योहार” भी कहा जाता है।
लोहड़ी के अवसर पर किसान अपनी कटी हुई फसल अग्नि देव को सबसे पहले अर्पित करते हैं और अगले वर्ष भी अच्छी फसल की कामना करते हैं। लोहड़ी के अवसर पर अग्नि देव की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन अग्नि देव के पूजन से आपको धन-धान्य, शांति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इनकी कृपा से जीवन की सभी समस्याओं और बाधाओं का अंत होता है।
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लोहड़ी का अर्थ और महत्व
बात करें लोहड़ी 2026 के अर्थ की, तो लोहड़ी में ‘ल’ का अर्थ है लकड़ी, ओह का अर्थ उपले, और ड़ी का मतलब रेवड़ी से होता है। इन तीनों को मिलाने पर लोहड़ी शब्द की उत्पति होती है। लोहड़ी का त्योहार प्रत्येक वर्ष पौष माह के अंतिम दिन मनाने की परंपरा है और इसी दिन लोहड़ी जलाई जाती है। बता दें कि लोहड़ी के त्योहार को सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के बाद से प्रकृति में अनेक तरह के बदलाव नज़र आने लगते हैं।
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ऐसा माना जाता है कि लोहड़ी की रात वर्ष की सबसे लंबी रात होती है और इसके बाद से दिन बड़े होने लगती है और रातें छोटी। मौसम भी धीरे-धीरे अनुकूल होने लगता है और ठंड का प्रकोप कम होने लगती है, इसलिए लोहड़ी की अग्नि में मक्के, तिल, मूंगफली गजक, चिड़वे, गुड़ आदि अर्पित करने के बाद खाने का रिवाज है।
पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में लोहड़ी की अलग ही रौनक देखने को मिलती है क्योंकि इस दिन फसलों की कटाई और गन्ने की फसल की बुवाई की जाती है। लोहड़ी पर किसान भगवान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और वहीं, कुछ किसान नए वित्तीय वर्ष का आरंभ करते हैं।
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कैसे मनाया जाता है लोहड़ी 2026 का पर्व?
जैसे कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि लोहड़ी का पर्व सर्दियों के अंत का प्रतीक है जिसे पंजाब में रबी की फसल की कटाई के जश्न के अवसर मनाया जाता है। लोहड़ी पर घर-घर जाकर लोकगीत गाए जाते हैं और बच्चे हर घर लोहड़ी लेने के लिए जाते हैं, उन्हें मूंगफली, गुड़, तिल और गजक देने की परंपरा है। लोहड़ी की अग्नि को प्रजव्वलित करने के लिए सर्वप्रथम लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है और संध्या के समय खुले स्थान पर लोहड़ी की आग जलाई जाती है।
इसके पश्चात, पूजा के दौरान लोहड़ी की अग्नि में मक्का, तिल और गुड़ आदि को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है और बाद में, इसे प्रसाद के तौर पर सबको दिया जाता जाता है। साथ ही, लोग अपने-अपने घरों के बाहर ढोल बजाकर पारंपरिक पंजाबी गानों पर भांगड़ा करते हैं। यह त्योहार नवविवाहित दंपतियों के लिए भी विशेष मायने रखता है जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे।
चलिए अब हम आपको अवगत करवाते हैं नव विवाहितों के लिए लोहड़ी का पर्व क्या महत्व रखता है।
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नवविवाहितों के लिए लोहड़ी का महत्व
नव विवाहित दंपतियों के लिए लोहड़ी का पर्व विशेष मायने रखता है। मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से है। हिंदू धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि प्रजापति दक्ष ने अपने यज्ञ में अपनी पुत्री सत्ती और अपने दामाद शिव जी का अपमान किया था जिससे क्रोधित होकर माता सती ने हवन कुंड की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे।
इसके पश्चात, भगवान शंकर ने राजा दक्ष का क्रोधवश सिर धड़ से अलग कर दिया था। लेकिन ब्रह्मा जी के आग्रह करने पर शिव जी ने प्रजापति दक्ष को पुनः जीवनदान दे दिया था और उनके शरीर पर बकरे का सिर लगा दिया था। युगों के बाद जब माता सती ने पुनः देवी पार्वती के रूप जन्म लिया, तब लोहड़ी के दिन ही प्रजापति दक्ष ने माता पार्वती से अपनी गलती की क्षमा मांगते हुए उनके ससुराल उपहार भेजे थे। उस समय से ही लोहड़ी पर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद और उपहार देने की परंपरा चली आ रही है। साथ ही, लोहड़ी के दिन नव विवाहितों के सुखी दांपत्य जीवन के लिए प्रार्थना की जाती है।
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लोहड़ी 2026 की पौराणिक कथा
लोहड़ी के त्योहार से दुल्ला भट्टी की एक पुरानी कथा जुड़ी है जिसे आपने कभी न कभी जरूर सुना होगा। इसके बिना लोहड़ी अधूरी मानी जाती है। मध्यकाल में जब भारत के पंजाब पर मुगल राजा अकबर का शासन था, उस समय वहां एक दुल्ला भट्टी नाम का साहसी और वीर व्यक्ति रहता था। पौराणिक कथा के अनुसार, पंजाब के संदल नामक स्थान पर अमीर सौदागरों को लड़कियां बेचीं जा रही थी, उस समय दुल्ला भट्टी ने उनकी इन सौदागरों से रक्षा की थी, न सिर्फ़ दुल्ला भट्टी ने इन लड़कियों को आज़ाद करवाया था, बल्कि उनकी शादी भी करवाई थी। इस प्रकार, हर साल लोहड़ी के त्योहार पर दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है जो आज भी हमे गलत के खिलाफ आवाज उठाने की शिक्षा देते हैं।
लोहड़ी 2026 पर जरूर करें ये 3 उपाय
गरीबों को दान: लोहड़ी 2026 के अवसर पर गरीब एवं जरूरतमंदों को रेवड़ी, गुड़, मक्का, गेहूं और गर्म कपड़े आदि का दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आपको माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, इस दिन गेहूं और अन्य अनाजों के दान से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
लोहड़ी की अग्नि में अर्पित करें ये चीज़ें: लोहड़ी की अग्नि में गुड़, रेवड़ी और तिल अर्पित करना शुभ होता है। ऐसा करने से आपके जीवन में धन-धान्य और समृद्धि का आगमन होता है। घर में सदैव बरकत बनी रहती है।
अग्नि की परिक्रमा: लोहड़ी की अग्नि की सात बार परिक्रमा करते हुए मन में अपनी मनोकामना कहें। मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
आइए अब जान लेते हैं लोहड़ी 2026 पर अग्नि में क्या डालना शुभ रहेगा।
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लोहड़ी 2026 पर राशि अनुसार अग्नि में अर्पित करें ये चीज़ें
मेष राशि: मेष राशि के जातक घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए सरसों के तेल में दो कीलें भिगोने के बाद आग में डालें। लोहड़ी की अग्नि ठंडी होने के बाद इन दोनों कीलों को घर के कोनों में रखने से नकारात्मक दूर होती है।
वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक लोहड़ी की आग में काली उड़द की दाल से बनी थोड़ी खिचड़ी अर्पित करें। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता रहती है और शनि देव की का प्रकोप भी कम होता है। पूजा के बाद, शेष खिचड़ी गाय को खिलाएं या गरीबों को बांट दें।
मिथुन राशि: अगर आपका कोई करीबी या प्रियजन अस्वस्थ हैं, तो लोहड़ी के अवसर पर ग्यारह काली मिर्च लेकर उस व्यक्ति का नाम ग्यारह बार लें। इसके बाद, यह काली मिर्च अग्नि में चढ़ा दें।
कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों को अपने माता-पिता की लंबी आयु की कामना के लिए लोहड़ी की आग में बताशा और खील डालना शुभ रहेगा।
सिंह राशि: सिंह राशि वाले अपनी किस्मत का साथ पाने के लिए लोहड़ी पर गेहूं, खील और बताशा आग में अर्पित करें।
कन्या राशि: कन्या राशि के जातक लोहड़ी पर आग में लौंग और मूंग अर्पित करें। ऐसा करने से आपके रिश्ते परिवार के सदस्यों के साथ अच्छे बने रहेंगे।
तुला राशि: लोहड़ी के दिन नौकरी के बेहतर अवसर या व्यापार में वृद्धि के लिए बताशा और ज्वार का दान करें।
वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि वाले अपने रिश्ते में प्यार बनाए रखने के लिए लोहड़ी की आग में 2 लौंग और तिल चढ़ाएं।
धनु राशि: धनु राशि के जातक कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए चंदन और हल्दी की जड़ को अपने सिर के ऊपर से घुमाकर लोहड़ी की अग्नि में डाल दें।
मकर राशि: मकर राशि के जातक इस दिन मन की शांति पाने के लिए लोहड़ी की आग में दो लौंग और काली सरसों के दाने अर्पित करें।
कुंभ राशि: लोहड़ी के अवसर पर कुंभ राशि वाले जरूरतमंदों, विशेष रूप से कन्याओं को गेहूं, तिल, गुड़ और गर्म कपड़े आदि का दान करें। साथ ही, अग्नि में तिल डालें। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और कार्यों में आ रही समस्याएं दूर होती हैं।
मीन राशि: मीन राशि के जातक रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए लोहड़ी की अग्नि में गन्ना डालें। ऐसा करने से रिश्ते में उत्पन्न गिले-शिकवे दूर होंगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस वर्ष लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
लोहड़ी को विशेष रूप से पंजाब में मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी की अग्नि संध्या के समय खुले स्थान पर जलाई जाती है।