व्यास पूजा 2026

इस साल कब की जाएगी व्यास पूजा? जानें तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व!

 व्यास पूजा 2026: वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों में से एक ग्रह को सबसे शुभ माना जाता है और वह है बृहस्पति ग्रह इस ग्रह को ज्ञान, धर्म, आध्यात्मिक, प्रगति, विवाह, संतान और भाग्य के कारक ग्रह माना गया है। संस्कृत भाषा में बृहस्पति देव को “गुरु ग्रह” के नाम से जाना जाता है अर्थात अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने वाला। साल में एक दिन ऐसा आता है जब पूरे संसार में गुरु देव का सम्मान महर्षि वेदव्यास के रूप में किया जाता है जिनकी गिनती संसार के सबसे महान गुरुओं में होती है। 

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बता दें कि व्यास पूर्णिमा 2026 को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है जो हर साल बहुत धूमधाम और भक्तिभाव से मनाई जाती है। आइए अब हम आगे बढ़ते हैं और एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं व्यास पूजा 2026 से जुड़ी समस्त जानकारी। 

व्यास पूजा 2026: तिथि और पूजा मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। ज्योतिष में आषाढ़ी पूर्णिमा तिथि पर गुरु ग्रह का प्रभाव विशेष रूप से माना जाता है। 

व्यास पूर्णिमा/गुरु पूर्णिमा की तिथि: 29 जुलाई 2026, बुधवार

पूर्णिमा तिथि आरंभ: 28 जुलाई 2026 की शाम 06 बजकर 21 मिनट से, 

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026 की रात 08 बजकर 07 मिनट तक 

नोट: हिंदू पंचांग के अनुसार, व्यास पूजा 2026 या गुरु पूजा के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना आवश्यक होता है।

  • अगर पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के बाद पहले 3 मुहूर्तों तक रहती है, तब इसी दिन व्यास पूजा या गुरु पूर्णिमा को मनाया जाएगा।
  • यदि पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के बाद 3 मुहूर्त से पहले समाप्त हो जाए, तब इस पूजा को एक दिन पहले किया जाएगा। 

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व्यास पूजा और नक्षत्रों का संबंध

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा धनु राशि में स्थित होता है, जिसके स्वामी गुरु देव हैं। साथ ही, यह पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में मौजूद होते हैं और इसके अधिपति देव शुक्र ग्रह हैं। ऐसे में, इस योग को बहुत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।

धनु राशि में चंद्र ग्रह: चंद्र देव को मन, भावनाओं  और ग्रहण करने की क्षमता के कारक माना जाता है। जब यह गुरु ग्रह की धनु राशि में विराजमान होते हैं, तो व्यक्ति का मन ज्ञान, शिक्षा, अध्यात्म और उच्च ज्ञान प्राप्त करने की तरफ स्वाभाविक रूप से आकर्षित होता हैं।

शुक्र देव द्वारा शासित पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: शुक्र देव को प्रेम, सुंदरता, कला और वैवाहिक जीवन के कारक ग्रह कहा गया है। ऐसे में, जब गुरु महाराज के ज्ञान देने वाली ऊर्जा शुक्र ग्रह की सौम्यता से मिलती है, तो यह पूर्णिमा आपके आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाने के साथ-साथ रिश्ते में प्रेम, सम्मान और मधुरता बढ़ाने का काम भी करती है। 

कुल मिलाकर, आषाढ़ पूर्णिमा का दिन विशेष माना जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव “आदि गुरु” के रूप में प्रकट हुए थे। इस शुभ दिन को मानव जीवन में नए अवसरों, ज्ञान और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक माना जाता है।

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व्यास पूजा 2026: आदि गुरु महर्षि वेदव्यास 

प्राचीन काल के महान ऋषि और ब्रह्म सूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा 18 पुराणों जैसे पवित्र ग्रंथों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिया तिथि पर हुआ था। इनके पिता ऋषि पराशर थे।

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, महर्षि व्यास जी तीनों काल भूतकाल, भविष्यकाल और वर्तमान का ज्ञान रखते थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख लिया था कि भविष्य में लोगों की रुचि धर्म के प्रति कम होती जाएगी। मनुष्य का अपने भगवान पर से विश्वास कम होने लगेगा, वह अपने कर्तव्यों से दूर भागने लगेगा और उनकी आयु भी कम होती जाएगी। ऐसे में, लोगों के लिए संपूर्ण वेदों का अध्ययन करना मुश्किल हो जाएगा। 

भविष्य को देखते हुए ही व्यास जी ने मानव कल्याण के लिए वेदों को चार भागों में विभाजित किया, ताकि कमज़ोर स्मरण शक्ति और सीमित समझ रखने वाले लोग भी इस ज्ञान से लाभ प्राप्त कर सकें। वेदों को जिन चार भागों में विभाजित किया गया है वह हैं – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

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इसके बाद, महर्षियों व्यास जी ने इन चारों वेदों का ज्ञान अपने शिष्यों वैशंपायन, सुमंतु मुनि, पैल और जैमिनि को प्रदान किया। वेदों का ज्ञान बेहद गूढ़ और रहस्यमय था इसलिए महर्षि वेदव्यास जी ने पुराणों की रचना की, जिसे “पांचवां वेद” भी कहा जाता है। व्यास जी द्वारा निर्मित पुराणों में वेदों के गूढ़ ज्ञान को रोचक कथाओं और सरल उदाहरणों के माध्यम से संसार की समझाया। 

इसी क्रम में, व्यास जी ने यह ज्ञान अपने शिष्य राम हर्षण को प्रदान किया था। इसके पश्चात, व्यास जी के शिष्यों ने अपनी समझ और ज्ञान के अनुसार वेदों को कई शाखाओं और उपशाखाओं में विभाजित किया जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इनसे ज्ञान प्राप्त करके सीख सकें। 

ऐसे में, आप सोच सकते हैं कि अगर महर्षि व्यास जी न होते, तो वेदों का ज्ञान आम लोगों तक शायद कभी पहुँच ही नहीं पाता। जनमानस तक वेदों और पुराणों का ज्ञान पहुंचाने का श्रेय महर्षि व्यास को जाता है। वैदिक ज्योतिष, आयुर्वेद, योग और हिंदू दर्शन की पूरी नींव वेदों पर आधारित होती है। वर्तमान समय में ज्योतिष में जिन राशियों, नक्षत्रों और ग्रहों के सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है। यह सब हमें इतने व्यवस्थित और सरल रूप में इसलिए प्राप्त हो सकें क्योंकि महर्षि व्यास की पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को सहजकर सुरक्षित किया।

बता दें कि महर्षि वेदव्यास जी को सबसे महान गुरु कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व वेदव्यास जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इसी गुरु शिष्य परंपरा के तहत गुरु पूर्णिमा के अवसर पर व्यास जी की और अपने गुरु की पूजा की जाती है।

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कुंडली के आधार पर व्यास पूजा का ज्योतिषीय महत्व 

वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह को दूसरे और पांचवें भाव का स्वामित्व प्राप्त है। वहीं, राशि चक्र में इन्हें धनु और मीन राशि के स्वामी माना गया है। गुरु ग्रह को निम्न चीजों के कारक माना जात है जो इस प्रकार हैं:

संतान (पांचवां भाव): जो जातक संतान से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए गुरु देव की पूजा करना फलदायी साबित होता है।

विवाह: महिलाओं की कुंडली में गुरु ग्रह मुख्य रूप से विवाह को नियंत्रित करते हैं। 

धन-धान्य और भाग्य: जब गुरु ग्रह कुंडली के पहले, चौथे, पांचवें, नौवें या ग्यारहवें भाव में उपस्थित होते हैं, तो जातक को आर्थिक जीवन में भाग्य का अच्छा साथ मिलता है।

उच्च शिक्षा और ज्ञान: आध्यात्मिकता और शिक्षा दोनों का ही संबंध कुंडली में मजबूत गुरु ग्रह से माना जाता है। 

धर्म और नैतिकता: व्यक्ति को सही और गलत की समझ, अच्छे कर्म करने की भावना और जीवन में नैतिक मूल्य अपनाने जैसे गुणों का संबंध भी गुरु ग्रह होता है। 

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व्यास पूजा 2026: गुरु ग्रह को मज़बूत करने के लिए अवश्य करें ये उपाय

ऐसा माना जाता है कि व्यास पूजा के दिन अपने गुरु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने से कुंडली में मौजूद गुरु दोष से राहत प्राप्त होती है। अगर आप नहीं जानते हैं कि गुरु दोष क्या होता है, तो बता दें कि जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर, पीड़ित या अशुभ होती है, तब इस अवस्था को गुरु दोष कहा जाता है। इस दोष के नकारात्मक प्रभाव के कारण विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में समस्या, करियर में सही दिशा का न मिलना, गुरुजनों के साथ रिश्ते बिगड़ना और आध्यात्मिक दूरी जैसी समस्याओं का सामना जातक को करना पड़ता हैं। 

यदि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह कमज़ोर, नीच राशि में, अस्त अवस्था में या फिर छठे, आठवें, या बारहवें भाव में स्थित होते हैं. तो व्यक्ति के लिए व्यास पूजा 2026 के दिन गुरु दोष शांति पूजा करना बेहद शुभ मान जाता है।

  • व्यास पूजा के दिन यानी कि 29 जुलाई 2026 29 जुलाई को सूर्योदय से पहले पीली माला पर गुरु बीज मंत्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः” का 108 बार जाप करें।
  • इस शुभ अवसर पर बृहस्पति गायत्री मंत्र का पाठ करें। साथ ही, प्रत्येक गुरुवार को “ॐ वृषभध्वजाय विद्महे, घृणिहस्ताय धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्” मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें।
  • व्यास पूजा के दिन वेद व्यास जी की पूजा करें और उन्हें पीले फूल, पीले वस्त्र और चने की दाल अर्पित करें। साथ ही, व्यास वंदना श्लोक का पाठ करें।
  • इस दिन ब्राह्मण या गुरु तुल्य व्यक्ति को पीले वस्त्र, चना दाल, हल्दी, केले और पीली मिठाई का दान करें।
  • व्यास पूजा के दिन पीपल के पेड़ पर हल्दी मिलाकर जल चढ़ाएं या फिर केले अर्पित करते हुए “ॐ गुरवे नमः” मंत्र का जाप करें।
  • इस पावन तिथि पर “ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा” मंत्र का 21 या 108 बार जाप करें।
  • किसी अनुभवी एवं ज्योतिषी की सलाह के बाद गुरुवार के दिन दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में अच्छी गुणवत्ता का पुखराज रत्न धारण करें।
  • गुरु पूर्णिमा का व्रत रखें। संभव हो, तो व्यास पूजा के दिन केवल सात्विक भोजन जैसे फल, दूध और पीली मिठाइयों का ही सेवन करें। इसके अलावा, तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखें। 
  • व्यास पूजा के दिन गुरु गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या फिर आप सुन सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि व्यास पूजा पर पवित्र ग्रंथों का पाठ करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है। 

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व्यास पूजा पर इस विधि से करें पूजा

हिंदू धर्म में देवी-देवता की कृपा पाने के लिए पूजा को सही विधि से करना आवश्यक होता है इसलिए हम आपको व्यास पूजा 2026 की सही पूजा विधि प्रदान करने जा रहे हैं। 

  • व्यास पूजा पर जातक सुबह जल्दी उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद, चौकी पर महर्षि वेद व्यास जी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें फूल- माला और अन्य सामग्री अर्पित करें। 
  • महर्षि व्यास जी की पूजा के बाद आप अपने गुरु के पास जाएं और उन्हें आदरपूर्वक किसी आसन पर बैठाएं। इसके पश्चात, आप गुरुदेव को माला पहनाएं।
  • अब आप गुरु को अपने सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, फल, फूल और दक्षिणा स्वरूप धन अर्पित करें। साथ ही, गुरु जी के चरण छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। 
  • इस दौरान गुरु वंदना श्लोक “गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥” का पाठ करते रहें। 
  • व्यास पूजा के दिन गुरु ग्रह से जुड़ी पीली वस्तुएं जैसे पीले फूल, पीले वस्त्र, चना दाल, हल्दी, केला और सोना आदि को अपने सामर्थ्य के अनुसार गुरु, किसी गरीब ब्राह्मण या मंदिर में दान करें। ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि गुरु पूर्णिमा या व्यास पूजा के दिन इन चीज़ों का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. साल 2026 में व्यास पूजा कब है?

इस वर्ष व्यास पूजा को 29 जुलाई 2026 को किया जाएगा। 

2. व्यास पूजा के लिए पूर्णिमा तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?

व्यास पूजा पर पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 की शाम 06 बजकर 21 मिनट पर होगी और इसकी समाप्ति 29 जुलाई 2026 की रात 08 बजकर 07 मिनट पर होगी। 

3. व्यास पूजा करने से कौन-सा ग्रह मज़बूत होता है?

व्यास पूजा 2026 का व्रत और पूजा करने से गुरु ग्रह की स्थिति कुंडली में मज़बूत होती है। ऐसा करने से गुरु दोष से राहत मिलती है।