आषाढ़ पूर्णिमा 2026: साल भर में आने वाली सभी 12 पूर्णिमा तिथियों का अपना महत्व होता है। इसी क्रम में, आषाढ़ माह की पूर्णिमा को आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ी पूर्णिमा की शुभ तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही, इस दिन सत्यनारायण कथा का पाठ करने का भी विधान है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संपदा का वास सदैव रहता है। बता दें कि पूर्णिमा का संबंध हिंदू धर्म में चंद्रमा से माना जाता है इसलिए इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

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एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “आषाढ़ पूर्णिमा 2026” के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा। साथ ही, इस साल कब रखा जाएगा आषाढ़ पूर्णिमा व्रत? कैसे करें भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी का पूजन? इसके बारे में भी हम बात करेंगे। इसके अलावा, जीवन में धन-समृद्धि पाने के लिए आप किन उपायों को कर सकते हैं, यह भी हम आपको बताएंगे। तो आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि के बारे में।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 में कब है?
हिंदू पंचांग में आषाढ़ माह साल का पांचवां महीना होता है और इस माह में कई व्रत-पर्व मनाए जाते हैं। इन्ही में से एक है आषाढ़ माह की पूर्णिमा, जिसे आषाढ़ पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माँ लक्ष्मी की पूजा करने से भक्त को धन-समृद्धि और वैभव का आशीर्वाद मिलता है।
आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि: 29 जुलाई, 2026, बुधवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ: 28 जुलाई 2026 की शाम 06 बजकर 21 मिनट से,
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026 की रात 08 बजकर 07 मिनट तक
नोट: हिंदू धर्म में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
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आषाढ़ पूर्णिमा 2026 पर बनेंगे शुभ योग
सनातन धर्म और ज्योतिष में शुभ योग का विशेष माना जाता है। जब किसी व्रत या त्योहार पर शुभ योग निर्मित होता है, तब उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस प्रकार, आषाढ़ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अत्यंत कल्याणकारी माने जाने वाले प्रीति योग और हर्षण योग का निर्माण होगा। इस दिन दो बहुत शुभ बनेंगे। बता दें कि प्रीति योग प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा जीवन में लेकर आता है जबकि हर्षण योग कार्यों में सफलता का आशीर्वाद देता है। ऐसे में, गुरु पूर्णिमा का व्रत आपके जीवन में सुख-शांति और सफलता लेकर आएगा।
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आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा को बहुत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन गुरु पूर्णिमा और व्यास जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। बता दें कि गुरु पूर्णिमा को गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। शिष्य अपनी गुरु की वंदना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के रचियता वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही हुआ था।
आषाढ़ पूर्णिमा के शुभ दिन ईश्वर का स्मरण और दान-पुण्य करना बहुत पुण्यदायक होता है। ऐसा कहा जाता है कि आषाढ़ पूर्णिमा पर भक्तजन द्वारा श्रद्धाभाव से व्रत, पूजा और दान करने से सौभाग्य, सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान की प्राप्ति होती है। कुछ भक्तजन इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा देते हैं।
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ज्योतिषीय दृष्टि से आषाढ़ पूर्णिमा
पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से होता है और वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा का विशेष स्थान दिया गया है। बया दें कि चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है, जिससे मानसिक शक्ति, एकाग्रता और शांति में वृद्धि होती है। आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी ख़ास माना जाता है क्योंकि यह काल दक्षिणायन होता है। यह अवधि आत्मा की यात्रा और आंतरिक विकास का संकेत देती है। जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस समय को आत्मविश्लेषण, ध्यान और आत्मिक अनुशासन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
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आषाढ़ पूर्णिमा 2026: पूजा विधि
जो जातक आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत करना चाहते हैं, वह नीच दी गई विधि से पूजन कर सकते हैं जो इस प्रकार है:
- सर्वप्रथम आप सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नित्य कर्मों से निवृत होकर स्नान करें।
- स्नान के पश्चात आप साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद, आप सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें।
- अब भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का ध्यान करें तथा उनको नमन करें।
- पूजा स्थान पर विष्णु जी की प्रतिमा या चित्र के आगे दीपक जलाएं और धूप दिखाएं।
- फिर, आप देवी-देवताओं को पीले फूल, तुलसी, फल और मिठाई अर्पित करें।
- इसके बाद, आरती करें।
- आषाढ़ पूर्णिमा के दिन केवल सात्विक भोजन का सेवन करें या फलाहार करें।
- आप अपने गुरु का आशीर्वाद लें और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें।
- संध्या के समय चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें।
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आषाढ़ पूर्णिमा पर धन प्राप्ति के लिए अवश्य करें ये उपाय
लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त पूजा: आषाढ़ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा एक साथ करें। उन्हें पीले और लाल फूल चढ़ाएं और पंचामृत से स्नान कराएं। साथ ही, तिल के तेल का दीपक जलाएं। इस उपाय को करने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में शांति बनी रहती है।
श्रीयंत्र की पूजा: आषाढ़ पूर्णिमा की सुबह श्रीयंत्र की स्थापना एक लाल वस्त्र पर करें और इसे दूध, शहद और गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद, कमलगट्टे की माला से “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
पीपल के पेड़ के नीच दीपक जलाएं: आषाढ़ पूर्णिमा 2026 की संध्या के समय पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए सात बार वृक्ष की परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
पूर्णिमा व्रत और चंद्रमा को अर्घ्य दें: आषाढ़ पूर्णिमा व्रत रखने वाले जातक रात को चंद्रमा को दूध, जल, चावल और शक्कर मिलाकर अर्घ्य दें। इस उपाय को करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आषाढ़ पूर्णिमा इस साल 29 जुलाई 2026, बुधवार के दिन पड़ेगी।
सनातन धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा और व्यास जयंती जैसे पर्व मनाए जाते हैं।
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ रहता है।