अगर कुंडली मिलान के समय दिखे “नाड़ी दोष”, तो भूलकर भी ना करें विवाह!

भारतीय ज्योतिष के अनुसार विवाह के समय अष्टकूट मिलान में से सबसे बड़ा स्थान नाड़ी को दिया गया है। कुंडली मिलान के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की प्रक्रिया में बनने वाले दोषों में से नाड़ी दोष को ही सबसे अधिक अशुभ दोष माना भी जाता है। जिसके प्रभाव से वर-वधू दोनों में से एक अथवा दोनों की मृत्यु हो जाने जैसी भारी मुसीबतें भी आ सकतीं है। इसीलिए अनेक ज्योतिषी कुंडली मिलान के समय नाड़ी दोष बनने पर ऐसे लड़के तथा लड़की का विवाह करने से मना कर देते हैं। कुंडली में मौजूद दोषों की जानकारी पाने और उनकी वजह से हो रही समस्या का सटीक समाधान जानने के लिए हमारे अनुभवी ज्योतिष आचार्य सुनील बरमोला से कॉल पर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।  

नारद पुराण में प्रमाणित रूप से प्राप्त होता है कि भले ही वर-वधू के अन्य गुण मिल रहे हों, लेकिन अगर नाड़ी दोष उत्पन्न हो रहा है, तो इसे किसी भी हाल में इसे नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि यह वैवाहिक जीवन के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होता है। ऐसे रिश्ते या तो नर्क समान गुज़रते हैं या बेहद दुखद हालातों में टूट जाते हैं, यहां तक कि जोड़े में से किसी एक की मृत्यु भी हो सकती है। 

विस्तार से पढ़ें: मांगलिक दोष का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव और समाधान

नाड़ी  दोष व उसका प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह जान लेना बहुत ज़रूरी है कि क्या नाड़ी दोष वास्तव में ही इतनी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है या फिर इस दोष के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर लिखा गया है। सबसे पहले हमें इस बात कि जानकारी होनी चाहिए कि नाड़ी दोष वास्तव में होता क्या है? और ये दोष बनता कैसे है? 

गुण मिलान की प्रक्रिया में आठ कूटों का मिलान किया जाता है जिसके कारण इसे अष्टकूट मिलान भी कहा जाता है तथा ये आठ कूट इस प्रकार हैं- वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी – 

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार तीन प्रकार की होती है नाड़ी-  – 

  • आदि नाड़ी- वाराहमिहिर के अनुसार अगर वर-वधू की कुंडली में ‘आदि नाड़ी दोष’ हो, तो उनका तलाक निश्चित है।
  • मध्य नाड़ी- “मध्य नाड़ी दोष” होने पर दोनों की ही मृत्यु हो सकती है या दोनों में से किसी एक को मृत्यु तुल्य कष्ट मिलता है।
  • अन्त्य नाड़ी- “अन्त्य नाड़ी दोष” हो तो वैवाहिक जीवन बेहद कष्टमय गुज़रता है या दोनों में किसी एक की मृत्यु हो जाती है और अकेले रहने पर भी उनका जीवन सामान्य से अधिक कष्टदायक होता है।

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प्रत्येक व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा की किसी नक्षत्र विशेष में उपस्थिति से उस व्यक्ति की नाड़ी का पता चलता है। नक्षत्र संख्या में कुल 27 होते हैं, जिनके द्वारा तीन प्रकार की नाड़ी बनती है आदि, मध्य, अन्त्य  9 नक्षत्रों के समूह में चंद्रमा के स्थित होने से जातक की जन्म कुंडली में एक नाड़ी का निर्माण होता है जिसके पूर्ण 8 अंक होते हैं।  

गुण मिलान करते समय यदि वर और वधू की नाड़ी अलग-अलग हो, तो उन्हें नाड़ी मिलान के 8 में से 8 अंक प्राप्त होते हैं, जैसे कि वर की आदि नाड़ी तथा वधू की मध्य नाड़ी या फिर अन्त्य नाड़ी। किन्तु यदि वर और वधू की नाड़ी एक ही हो तो उन्हें नाड़ी मिलान के 8 में से 0 अंक प्राप्त होते हैं और इसे “नाड़ी दोष” का नाम दिया जाता है।

नाड़ी दोष की प्रचलित धारणा के अनुसार यदि वर-वधू दोनों की ही आदि नाड़ी हो, तो ऐसी स्थिति में तलाक या अलगाव की प्रबल संभावना बनती है और यदि वर-वधू दोनों की मध्य नाड़ी या अन्त्य नाड़ी हो, तो वर-वधू में से किसी एक या दोनों की मृत्यु की प्रबल संभावना बनती है। 

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नाड़ी दोष का परिहार  

लड़के और लड़की के जन्म कुंडली में कुछ ज्योतिषीय परिहार होते हैं, जो नाड़ी दोष के नकारात्मक प्रभावों को खत्म करते हैं।(“परिहार” का अर्थ होता है किसी चीज़ से बचने की क्रिया या दोष, अनिष्ट आदि को दूर करने का काम)

  • यदि वर-वधू दोनों का जन्म एक ही नक्षत्र के अलग-अलग चरणों में हुआ हो, तो वर-वधू की नाड़ी एक होने के बाद भी नाड़ी दोष नहीं बनता।
  • यदि वर-वधू दोनों की जन्म राशि एक ही हो किंतु नक्षत्र अलग-अलग हों, तो वर-वधू की नाड़ी एक होने के बाद भी नाड़ी दोष नहीं बनता।
  • यदि वर और वधू की कुंडली में एक ही नक्षत्र है लेकिन राशियां अलग-अलग हैं, तो नाड़ी दोष नहीं माना जाता है। (लड़की का जन्म राशि और जन्म चरण दूल्हे से पहले नहीं होना चाहिए)

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नाड़ी दोष को दूर करने के उपाय 

  • महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख बार का भक्ति पूर्वक जाप करने से नाड़ी दोष का प्रभाव कम होता है और शांतिपूर्वक जीवनसाथी के साथ जीवन व्यतीत करता है।   
  • यदि किसी जोड़े की कुंडली में नाड़ी दोष है तो, भावी दुल्हन की शादी से पहले भगवान विष्णु की मूर्ति से शादी करानी चाहिए। यह उपाय इस दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
  • ज्योतिषीय ग्रंथ पीयूष धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विवाह में नाड़ी दोष बाधा उत्पन्न कर रहा है तो उसे स्वर्ण दान, वस्त्र दान, अन्न दान करना चाहिए।
  • सोने से सर्प की आकृति बनाकर, उसकी विधिपूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा करके महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराने से भी नाड़ी दोष का प्रभाव दूर होता है।  

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