मार्च 2022 शुभ विवाह मुहूर्त: 9 मार्च से शादी-विवाह पर लगेगा ब्रेक, जानें वजह !

मार्च 2022 विवाह शुभ मुहूर्त: इस वर्ष विवाह संस्कार जैसे मांगलिक कार्यक्रमों के लिए सामान्य से कम ही शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं। इसी क्रम में विवाह-शादी की बात करें तो 21 फरवरी 2022 के बाद शादी पर ब्रेक लगने से कही भी शहनाई नहीं गूजेंगी। क्योंकि ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो 21 फरवरी से पूरे मार्च माह और फिर मध्य अप्रैल तक कोई भी शुभ मुहूर्त न होने से शादी समारोह नहीं किया जाएगा। 

इसके पीछे का कारण समझें तो एस्ट्रोसेज के ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि 23 फरवरी से 26 मार्च तक गुरु तारा अस्त होने के कारण, इस दौरान शादी करना वर्जित रहेगा। इसके साथ ही 14 मार्च 2022 से अगले 30 दिनों तक यानी 14 अप्रैल 2022 तक मीन राशि में खरमास रहेगा। इसके परिणामस्वरूप भी विवाह संस्कार जैसे सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगी। 

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30 दिनों तक रहेगा मीन खरमास 

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति यानी गुरु ग्रह को शुभ ग्रह माना गया है। जो ज्ञान, आध्यात्मिकता के साथ पारिवारिक उन्नति के भी कारक होते हैं। गुरु को धनु और मीन राशि का स्वामी भी माना गया है। ऐसे में मीन राशि में खरमास लगने से इस दौरान किसी भी नए व शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। चूंकि हिन्दू धर्म में शादी बेहद महत्वपूर्ण संस्कार है, इसलिए भी गुरु के अस्त होने व खरमास जैसे अशुभ अवधि में शादी जैसे शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। 

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मार्च 2022 में नहीं बनेगा शादी का कोई भी शुभ मुहूर्त

साल का तीसरा महीना “मार्च”, यूँ तो हिंदू धर्म का सर्वाधिक पवित्र माह माना जाता है। क्योंकि पूजा पाठ व आस्था की दृष्टि से ये माह कई मायनों में बेहद खास होता है। परंतु वर्ष 2022 में इस महीने शादी के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त न होने से, इस महीने आपको भी शुभ कार्यों को करने से बचना चाहिए। हालांकि 10 मार्च से 18 मार्च को होलाष्टक 2022 लगने से और गुरु ग्रह अस्त होने के कारण इस दौरान शुभ कार्य नहीं होंगे। परंतु बावजूद इसके ये पूरा माह ही देवी-देवताओं की आराधना व पितरों की शांति हेतु पूजा-पाठ करने के लिए अनुकूल रहेगा। 

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21 फरवरी से अस्त हो चुका है गुरु तारा

ज्योतिषशास्त्र की माने तो 21 फरवरी 2022, सोमवार से गुरु तारा अस्त हो गया है। जिसके कारण इस दिन से सभी शुभ कार्यों पर रोक लग गई है। क्योंकि वैदिक शास्त्रों में ये उल्लेख मिलता है कि हर शुभ-अशुभ ग्रह के हर स्थान परिवर्तन का, फिर चाहे वो अस्त हो, वक्री हो या गोचरीय अवस्था में हो, इसका सीधा प्रभाव प्रत्येक मनुष्य के जीवन को किसी न किसी रूप से ज़रूर प्रभावित करता है। ऐसे में गुरु का अस्त होना भी सामान्य तौर पर एक अशुभ अवधि मानी जाती है, इसलिए इस दौरान किये गए शुभ कार्य नकारात्मक परिणाम देने वाले सिद्ध होते हैं। 

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