विष्णु पद मंदिर: भारत का एक ऐसा मंदिर जहाँ भगवान विष्णु के चरणों के होते हैं साक्षात् दर्शन

विविधताओं का यह देश भारत अपने मंदिरों, मंदिरों के प्रति लोगों की आस्था, देवी-देवताओं, व्रत-त्योहार इत्यादि के लिए जाना जाता है। इस समय जब पूरा देश एक वैश्विक महामारी से लड़ रहा है और हम सभी के जीवन में तनाव हद से ज्यादा बढ़ गया है ऐसे में हम निरंतर कोशिश कर रहे हैं की आपके जीवन में सकारात्मकता की लौ जलती रहे। ऐसे में हम आपको घर बैठे कुछ ऐसे मंदिरों के दर्शन कराते हैं जिनके बारे में लोगों के बीच काफी मान्यता है। 

ऐसे में घर बैठे मंदिरों के दर्शन करने की इस कड़ी में आज करते हैं बिहार के गया में स्थिति एक ऐसे मंदिर के दर्शन जहां पर भगवान विष्णु के चरणों के साक्षात दर्शन किए जा सकते हैं।

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विष्णुपद मंदिर: गया (बिहार)

बिहार के गया में स्थित यह मंदिर बेहद ही खास है। कहा जाता है यहां पर भगवान विष्णु के चरणों के साक्षात दर्शन होते हैं और यह मंदिर सतयुग में स्थापित हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन पूरे विश्व में यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां पर श्री हरि के चरणों की पूजा की जाती है।

कहां स्थित है यह मंदिर और क्या है इस मंदिर से जुड़ी मान्यता

विष्णुपद मंदिर बिहार में फल्गु नदी के पश्चिम छोर पर स्थित है। कहा जाता है कि, यह मंदिर भगवान विष्णु के पद चिन्हों पर बनाया गया है। ऐसे में जो कोई भी व्यक्ति इस मंदिर के दर्शन करता है भगवान विष्णु उसके जीवन से सभी दुख, कष्ट और परेशानियां दूर करते हैं। ऐसे व्यक्तियों की सभी मनोकामनाएं भी अवश्य पूरी होती हैं।

इस मंदिर से जुड़ी कथा

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, जब राक्षस गयासुर को स्थिर करने के लिए धर्मपुरी से माता धर्मवत्ता शिला को लाया गया था। जिसे गयासुर पर रखकर श्री हरि ने अपने पैरों से दबा दिया था। कहा जाता है तभी से इस शिला पर भगवान के पद चिन्ह मौजूद है और तभी से इस जगह का विशेष महत्व माना जाता है।

कहा जाता है कि, एक समय की बात है जब गयासुर नामक असुर ने घोर तपस्या करके भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया था। आशीर्वाद मिलने के बाद वह राक्षस बेहद अहंकारी और उत्पाती हो गया था। उसके उत्पात से देवी देवता भी परेशान हो गए थे। ऐसे में देवताओं ने भगवान विष्णु से खुद को गयासुर के उत्पात से बचाने की गुहार लगाई। तब भगवान विष्णु ने गयासुर के सिर पर अपना पैर रखकर उसे मुक्ति प्रदान की और देवी-देवताओं को उसके उत्पात से मुक्त किया। कहा जाता है वह पत्थर आज भी इस मंदिर में मौजूद है। इस घटना के बाद से ही इस जगह को मुक्तिदाता स्थान माना गया है।

इस मंदिर में साल भर होता है पिंडदान 

मंदिर से जुड़ी एक अन्य रोचक बात के अनुसार ये कहा जाता है कि, यह मंदिर पितरों की मुक्ति के लिए भी बेहद ही उत्तम माना जाता है। इस मंदिर में पितरों की शांति और उनकी आत्मा की मुक्ति के लिए पिंडदान किए जाने की परंपरा है। ऐसे में यहां पर साल पर पिंडदान होता है।

इस मंदिर से जुड़ी अन्य रोचक बातें

  • इस मंदिर से जुड़ी अन्य रोचक बातों की बात करें तो कहा जाता है इस मंदिर में भगवान विष्णु के पद चिन्हों को स्पर्श करने मात्र से व्यक्ति के सभी पाप, कष्ट दूर होते हैं। 
  • इसके अलावा इस मंदिर में स्वयं प्रभु श्री राम और माता जानकी भी आए थे। 
  • इसके अलावा कहा जाता है कि इसी जगह पर प्रभु श्री राम और माता सीता ने दशरथ महाराज का पिंडदान भी किया था।

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