विनायक चतुर्थी पर कैसे करें भगवान गणेश का पूजन ?

हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य से पहले किये जाने की मान्यता है। भगवान गणेश का एक नाम विघ्नहर्ता भी है। कहा जाता है क्योंकि अपने भक्तों के दुखों को भगवान गणेश पल भर में हर लेते हैं इसी वजह से इनका एक नाम विघ्नहर्ता भी है। सनातन धर्म में कुल 24 दिन निर्धारित किए गए हैं जिसमें सिर्फ भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

यानी कि हर वर्ष के प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। वैशाख माह की 27 अप्रैल 2020, दिन सोमवार को विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जायेगा।

इम्युनिटी कैलकुलेटर: चेक करें अपनी इम्यूनिटी

विनायक चतुर्थी मुहूर्त 

प्रातः 11:37  से  दोपहर 13:01 तक, इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनसे अपने मन की मुराद मांगी जाती है। 

विनायक चतुर्थी पूजन विधि

  • प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन शाम के समय स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश भगवान की पूजा की जाती है। 
  • इस दिन की पूजा में फूल इत्यादि अवश्य शामिल किया जाता है। 
  • इसके बाद आरती की जाती है और भगवान को धूप, दीप, नवैद्य इत्यादि दिखाए जाते हैं। 
  • पूजा के बाद गणपति से सुख और परिवार के सुख और मंगल की कामना की जाती है। 
  • भगवान श्री गणेश भक्तों की सारी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं। 
  • इसके बाद शाम के समय चंद्र दर्शन करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है। 
  • कुछ लोग इस दिन कथा भी सुनते हैं।

 जीवन में किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए प्रश्न पूछें  

विनायक चतुर्थी व्रत कथा 

शिव पुराण के अनुसार भगवान गणेश शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे। शिव पुराण में इस बात का भी उल्लेख है कि माता ने भगवान गणेश को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए 12 वर्षों तक तपस्या व्रत एवं साधना की थी। जिसके फलस्वरूप शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।

इस दिन की पूजा में वस्त्र, गंध, चंदन से तिलक, अक्षत, रक्त पुष्प, पुष्प माला, दूर्वा, सिंदूर, अबीर, गुलाल, सौभाग्य द्रव्य, सुगंधित द्रव्य, धूप, दीप, मोदक, इत्यादि भगवान को अवश्य चढ़ाना चाहिए।  पूजा के बाद लाल चंदन की माला से गणेश मंत्र का जाप करें। 

जानें अपने बच्चों का भविष्य : 10वीं 12वीं की रिजल्ट भविष्यवाणी

विनायक चतुर्थी क्या है?

हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक चंद्रमा में दो चतुर्थी पड़ती है। एक शुक्ल पक्ष के दौरान अमावस्या के बाद की चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी कहते हैं और दूसरी कृष्ण पक्ष के दौरान पूर्णिमा के बाद पड़ने वाली चतुर्थी जिसको संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का त्यौहार पूरे विश्वभर में भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। 

खासकर के महाराष्ट्र में इस त्यौहार को बेहद ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। विनायक चतुर्थी को बहुत से लोग वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं। वरद शब्द का अर्थ होता है भगवान से किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए कहना। मान्यता है कि जो कोई भी इंसान इस दिन व्रत का पालन करता है उन्हें भगवान गणेश ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं।

कॉग्निएस्ट्रो आपके भविष्य की सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शक

आज के समय में, हर कोई अपने सफल करियर की इच्छा रखता है और प्रसिद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन कई बार “सफलता” और “संतुष्टि” को समान रूप से संतुलित करना कठिन हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में पेशेवर लोगों के लिये कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट मददगार के रुप में सामने आती है। कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट आपको अपने व्यक्तित्व के प्रकार के बारे में बताती है और इसके आधार पर आपको सर्वश्रेष्ठ करियर विकल्पों का विश्लेषण करती है।

 

इसी तरह, 10 वीं कक्षा के छात्रों के लिए कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट उच्च अध्ययन के लिए अधिक उपयुक्त स्ट्रीम के बारे में एक त्वरित जानकारी देती है।

 

 

जबकि 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट पर्याप्त पाठ्यक्रमों, सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों और करियर विकल्पों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराती है।

 

 

Spread the love
पाएँ ज्योतिष पर ताज़ा जानकारियाँ और नए लेख
हम वैदिक ज्योतिष, धर्म-अध्यात्म, वास्तु, फेंगशुई, रेकी, लाल किताब, हस्तरेखा शास्त्र, कृष्णमूर्ती पद्धति तथा बहुत-से अन्य विषयों पर यहाँ तथ्यपरक लेख प्रकाशित करते हैं। इन ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक लेखों के माध्यम से आप अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं। एस्ट्रोसेज पत्रिका को सब्स्क्राइब करने के लिए नीचे अपना ई-मेल पता भरें-

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.