वक्री बुध से देश और दुनिया में आयेंगे क्या बड़े और अहम बदलाव? जानें अभी

ज्योतिष में जब कोई ग्रह उल्टी चाल चलता है तो इसे ग्रहों की वक्री चाल कहते हैं। असल में ग्रह उल्टी चाल चलते नहीं है ऐसा केवल धरती से देखने पर प्रतीत होता है। सितंबर महीने की 27 तारीख को बुध ग्रह वक्री होने जा रहा है अर्थात अपनी उल्टी चाल प्रारंभ कर रहा है। अपने इस विशेष ब्लॉग में आज हम बात करेंगे बुध ग्रह की इसी वक्री चाल के प्रभाव के बारे में, इसका देश और दुनिया पर पड़ने वाला असर, और साथ ही जानेंगे बुध ग्रह को कुंडली में मजबूत बनाने के कुछ ज्योतिषी उपायों के बारे में भी।

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ज्योतिष में बुध ग्रह को व्यापार, बुद्धि, और वाणी का कारक कहा जाता है। ऐसे में बुध की यह वक्री गति ज्योतिष की दुनिया में बेहद ही महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। बुध ग्रह शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में जब बुध ग्रह वक्री होगा तो स्वाभाविक है कि इसका प्रभाव इन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा।

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वक्री बुध 2021: तिथि और समय 

बुध ग्रह 27 सितंबर 2021 को सुबह 10:40 पर तुला राशि में अपनी वक्री गति शुरू करेंगे।  18 अक्टूबर तक यह इसी स्थिति में रहेंगे। इसी दौरान 2 अक्टूबर को  वक्री बुध कन्या राशि में वापस लौटकर आएंगे और उसके बाद 18 अक्टूबर 2021 को कन्या राशि में ही अपनी मार्गी गति शुरू करेंगे। 

वक्री बुध 2021 महत्व 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी नौ ग्रह समय-समय पर अपना राशि परिवर्तन करते हैं। एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की यह गति कभी सीधी होती है जिसे मार्गी कहते हैं तो कभी यह गति उल्टी भी हो जाती है जिसे वक्री कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को तेजस्वी दिव्य पीतांबरधारी, संपूर्ण आभूषणों से विभूषित, अर्थशास्त्रों के ज्ञाता, उत्कृष्ट बुद्धि संपन्न, मधुर वाणी बोलने वाले महान गणितज्ञ ग्रह के रूप में माना गया है। 

मार्गी चाल की अपेक्षा में ग्रहों की वक्री चाल को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बुध का वक्री होना भी बेहद ही महत्वपूर्ण घटना साबित हो सकता है क्योंकि बुध ग्रह संचार व्यवस्था, वाणी, कम्युनिकेशन, लेखन, गणित, बुद्धि आदि का संचालन करते हैं। ऐसे में बुध ग्रह के वक्री होने से बनती बात बिगड़ सकती है, लड़ाई झगड़े, वाद विवाद और गलतफहमियों की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा जो लोग दिमाग का प्रयोग ज्यादा करते हैं उन्हें भी समस्या होने की आशंका रहती है। साथ ही उन्हें इस अवधि में सही ढंग से निर्णय लेने में भी तमाम परेशानियाँ उठानी पड़ सकती हैं।

कुंडली में मजबूत और कमज़ोर बुध ग्रह का प्रभाव 

ज्योतिष में बुध ग्रह को एक शुभाशुभ ग्रह का दर्जा प्राप्त है। जहां कन्या बुध की उच्च राशि होती है वहीं मीन इनकी नीच राशि मानी गई है। इसके अलावा सभी 27 नक्षत्रों में आश्लेषा, ज्येष्ठा, और रेवती नक्षत्र का स्वामित्व बुध ग्रह को प्राप्त है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं, ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक सुंदरता देखने लायक होती है। साथ ही ऐसे व्यक्ति बेहद ही चालाक और बौद्धिक रूप से तेज और कुशल वक्ता भी होते हैं। कुंडली में शुभ बुध के प्रभाव से व्यक्ति गणित विषय में बेहद ही अच्छा होता है और ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि भी बेहद को कुशाग्र होती है।

वहीं इसके विपरीत पीड़ित बुध के प्रभाव से व्यक्ति अपनी बातों को दूसरों तक साझा नहीं कर पाता है। साथ ही ऐसे व्यक्ति गणित के विषय में कमजोर होते हैं। पीड़ित बुध की वजह से व्यक्ति दिमागी रूप से कमजोर होने के साथ-साथ चीजों को समझने में भी उन्हें दिक्कतें उठानी पड़ती है। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति व्यापार में हानि और जीवन में दरिद्रता का सामना करते हैं।

वक्री बुध 2021:  देश और दुनिया पर प्रभाव 

  • मौसम पर असर: इससे मौसम में अचानक से कुछ बदलाव देखे जाने की संभावना है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अत्यधिक तापमान की स्थिति भी बन सकती है। यह अप्रत्यक्ष रूप से वर्षा वनों (रेनफ़ॉरेस्ट) और वन्यजीवों के लिए समस्या की स्थिति साबित हो सकती है।
  • कोरोना महामारी पर असर: मौसमी फ्लू में वृद्धि की प्रबल आशंका बन रही है जिससे विश्व स्तर पर कोरोनावायरस के मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
  • वैश्विक राजनीति पर असर: देशों की कूटनीति नीतियों में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। वे व्यापार और वाणिज्य में कुछ नई शर्तें और नियम आदि लागू कर सकते हैं। प्रत्येक देश से संबंधित विदेश नीतियों में भी कुछ परिवर्तनों के भी प्रबल आसार हैं।
  • देश की राजनीति पर असर: कुछ छिपी हुई राजनीति होगी और सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही कुछ छिपे हुए एजेंडे बनाएंगे।
  • भारत-अफगानिस्तान पर असर: अफगानिस्तान के साथ संबंध भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होंगे और भारत अपनी सुरक्षा से समझौता करने को तैयार नहीं होगा। भारत उनके खिलाफ कुछ सख्त कार्रवाई करने की योजना बना सकता है।
  • मीडिया जगत पर असर: मीडिया अधिक लोकप्रियता हासिल करेगा और लगातार सुर्खियों में बना रहेगा क्योंकि वे देश की आर्थिक स्थितियों और वित्त के बारे में कुछ जानकारी लाने में सफल रहने वाले हैं।
  • शेयर मार्केट पर असर: इस दौरान शेयर बाजार में तेजी देखने को मिलेगी।

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वक्री बुध 2021: जीवन पर असर 

बुध ग्रह जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इससे बुध गोचर कहते हैं। ज्योतिष में बुध गोचर की अवधि सबसे कम मानी गई है। यह एक राशि में तकरीबन 14 दिनों तक रहता है और फिर राशि परिवर्तन कर लेता है। बुध के गोचर के दौरान शिक्षा के क्षेत्र, गणित के क्षेत्र और वाणिज्य के क्षेत्र से संबंधित या इन क्षेत्रों में नौकरी करने वाले लोगों को लाभ मिल सकता है।

कुंडली के अलग-अलग भागों में बुध की गोचर का फल भी अलग अलग होता है। ऐसे में कभी व्यक्ति को इसका शुभ फल प्राप्त होता है तो कभी अशुभ वालों का भी दुख भोगना पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 27 सितंबर  को बुध ग्रह वक्री गोचर नहीं कर रहा है बल्कि केवल वक्री हो रहा है। 

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कुंडली में बुध को मज़बूत बनाने के ज्योतिषीय उपाय

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में यदि कोई भी ग्रह पीड़ित या कमजोर अवस्था में होता है तो इससे व्यक्ति के जीवन में प्रतिकूल परिणाम देखने को मिलते हैं। ऐसे में ऐसे कुछ ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाने से हम ग्रहों को मजबूत करके उनका शुभ परिणाम अपने जीवन में हासिल कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं बुध ग्रह को मजबूत करने के कुछ सरल ज्योतिष के उपायों के बारे में:

  • गौमाता को हरा चारा खिलाएं। 
  • बुधवार के दिन 8 साल से छोटी उम्र की कन्याओं को हरे रंग की चूड़ियां, हरे रंग के वस्त्र, और मुमकिन हो तो हरे रंग का कोई भोजन कराएं। 
  • नियमित रूप से बुध स्तोत्र का पाठ करें। यदि नियमित रूप से आप यह पाठ नहीं कर सकते हैं तो कोशिश करें की कम से कम हर बुधवार के दिन विशेष तौर पर इस स्त्रोत का पाठ करें। 
  • बुधवार का व्रत रखें। 
  • विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करें। 
  • तुलसी जी को जल अर्पित करें। 
  • अनाथ बच्चों व गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करें। 
  • बुधवार के दिन श्री गणेश जी के मंदिर में लड्डू का दान करें और फिर उन्हें प्रसाद रूप में स्वयं भी ग्रहण करें और लोगों को भी दें।

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