एक दिन में दो अहम ग्रहों का राशि-परिवर्तन: जानें देश और दुनिया को कैसे करेंगे प्रभावित

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का गोचर हो या वक्री दोनों ही विशेष महत्व रखता है। गोचर का सामान्य भाषा में अर्थ होता है एक ग्रह का राशि परिवर्तन। अर्थात जब कोई ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में जाता है तो इसे गोचर कहते हैं। यहाँ जानने वाली बात यह भी है कि ग्रहों का यह परिवर्तन कभी वक्री होता है तो कभी मार्गी। वक्री का अर्थ होता है जब ग्रह उलटी चाल चलता है और मार्गी का अर्थ होता है ग्रहों की सीधी चाल।

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ग्रहों का गोचर और ग्रहों की वक्री चाल का ज्योतिष की दुनिया में विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में अक्टूबर महीने की शुरुआत में ही, अर्थात 02 अक्टूबर शनिवार के दिन दो ग्रह राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। इनमें से जहाँ एक ग्रह (शुक्र का वृश्चिक राशि में गोचर) सामान्य गोचर करेगा वहीं, दूसरा ग्रह (वक्री बुध का कन्या राशि में गोचर) वक्री अवस्था में गोचर करेगा।

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स्वाभाविक है कि, एक दिन में दो महत्वपूर्ण ग्रहों का बड़ा फेरबदल देश, दुनिया और सामान्य जन-जीवन को अवश्य ही प्रभावित करेगा। तो आइये अपने इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं एक दिन में दो महत्वपूर्ण ग्रहों के इस परिवर्तन का क्या पड़ेगा देश-दुनिया और आप पर प्रभाव। साथ ही जानते हैं शुक्र और वक्री बुध के गोचर से जुड़ी कुछ अहम और जानने वाली बातें।

शुक्र गोचर: समय और महत्व 

शुक्र ग्रह 2 अक्टूबर 2021 को सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर वृश्चिक राशि में गोचर कर जायेगा।

शुक्र ग्रह की बात करें तो वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह को शुभ ग्रह माना गया है। शुक्र ग्रह कला, प्रेम, सौंदर्य, वैवाहिक जीवन, वाहन, भौतिक सुखों, इत्यादि चीजों का कारक माना जाता है। ऐसे में जिन व्यक्तियों की कुंडली में शुक्र ग्रह शुभ स्थिति में होता है ऐसे व्यक्ति समस्त सांसारिक सुख प्राप्त करते हैं। वहीं जिन व्यक्तियों की कुंडली में शुक्र ग्रह अशुभ स्थिति में होता है उनके वैवाहिक जीवन में तमाम तरह की परेशानियां होने लगती हैं, सांसारिक सुखों में कमी आने लगती है, और ऐसे व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति में भी गिरावट देखने को मिलती है।

शुक्र ग्रह से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • शुक्र ग्रह की पौराणिक मान्यता की बात करें तो, शुक्र ग्रह को हिंदू पुराणों में दैत्य गुरू के रूप में उल्लेखित किया गया है। 
  • पौराणिक काथाओं के अनुसार शुक्र का प्रचलित नाम शुक्राचार्य है। शुक्राचार्य भगवान शिव के परम भक्त थे। 
  • शुक्र महर्षि भृगु ऋषि के पुत्र हैं। 
  • इसके अलावा सप्ताह में शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह को समर्पित है। ऐसे में इस दिन का व्रत करने से भी व्यक्ति को शुक्र ग्रह से सम्बंधित शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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गोचर की बात करें तो शुक्र ग्रह के गोचर की अवधि लगभग 23 दिनों की होती है। यानी कि एक राशि में शुक्र ग्रह लगभग 23 दिनों तक रहता है और उसके बाद राशि परिवर्तन कर लेता है। शुक्र के गोचर का सभी 12 भावों में अलग-अलग फल प्राप्त होता है लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रथम भाव, द्वितीय भाव, तृतीय भाव, चतुर्थ भाव, पंचम भाव, अष्टम भाव, नवम भाव, एकादश भाव और द्वादश भाव में जहां शुक्र गोचर के समय शुभ फल प्राप्त होता है वहीं, षष्टम भाव, सप्तम भाव और दशम भाव में इसके नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।

हर व्यक्ति चाहता है कि, जिसके जीवन में तमाम तरह के सांसारिक सुख हों, उसके जीवन में एक अच्छा घर हो, वाहन हो, अच्छी स्त्री हो और जीवन में हर तरह के भौतिक सुख हों। लेकिन क्योंकि शुक्र को इन सभी वस्तुओं का कारक माना गया है ऐसे में शुक्र ग्रह की कृपा से ही व्यक्ति को यह सभी सुविधाएं प्राप्त होती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह पीड़ित होता है या कमजोर अवस्था में होता है तो उसके भौतिक सुखों में कमी आ सकती है। 

लेकिन ज्योतिष में इसका भी समाधान है। शुक्र के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से व्यक्ति अपनी कुंडली में मौजूद शुक्र ग्रह को मजबूत कर सकता है। आइए जानते हैं शुक्र ग्रह की शांति और उसे मजबूत करने के कुछ सरल उपाय उनके बारे में।

वक्री बुध का गोचर: समय और महत्व 

बुध अपनी वक्री अवस्था में 2 अक्टूबर 2021 को कन्या राशि में सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर गोचर कर जायेगा।

बुध ग्रह की बात करें तो वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह बुद्धि, संचार, और त्वचा का कारक कहा जाता है। यूं तो बुध एक शुभ ग्रह है लेकिन जब यह कुंडली में किसी अशुभ ग्रह के साथ आ जाता है तो इससे व्यक्ति को अशुभ परिणाम मिलने लगते हैं। ऐसे में जिन व्यक्तियों की कुंडली में बुध ग्रह शुभ स्थिति में होता है ऐसे जातकों की वाणी काफी प्रभावित करने वाले होती है, ऐसे व्यक्ति शानदार वक्ता होते हैं, और साथ ही बेहद ही तार्किक होते हैं। वहीं जिन व्यक्तियों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है ऐसे जातकों को अपनी बात दूसरों को समझाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, साथ ही ऐसे व्यक्तियों की वाणी कठोर और असभ्य बनने लगती है।

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बुध ग्रह से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें 

  • पौराणिक मान्यता के अनुसार बुध की माता तारा हैं और उनके पिता चंद्रमा हैं।
  • इसके अलावा पौराणिक मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि, बुध ग्रह भगवान नारायण का प्रतिनिधित्व करते हैं। 
  • हिंदू धर्म में बुध ग्रह को देव की उपाधि दी गयी है। 
  • सप्ताह में बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित है। ऐसे में इस दिन का व्रत करने से भी व्यक्ति को बुध ग्रह से सम्बंधित शुभ फल प्राप्त होते हैं।

गोचर की बात करें तो बुध ग्रह के गोचर की अवधि तकरीबन 14 दिनों की होती है। यानी कि 14 दिनों के बाद बुध ग्रह एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है। बुध का वक्री अवस्था में गोचर का अर्थ होता है जब सीधी गति के बजाय बुध ग्रह उल्टी गति में गोचर करता है तो इससे वक्री बुध का गोचर कहा जाता है। बुध के गोचर का सभी 12 भावों में अलग-अलग प्रभाव प्राप्त होता है लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार द्वितीय भाव, चतुर्थ भाव, षष्टम भाव, अष्टम भाव, दशम भाव और एकादश भाव में शुभ फल देता है। वहीं इसके अलावा अन्य सभी भावों में इसका फल सामान्य या नुकसानदेह हो सकता है। 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध को मुख्य रूप से बुद्धि, वाणी, चेतना, व्यापार, सांख्यिकी और त्वचा आदि का कारक माना गया है। ऐसे में जिन व्यक्तियों की कुंडली में बुध ग्रह शुभ स्थिति में नहीं होता है। उन्हें उपरोक्त चीजों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ज्योतिष में इसका भी समाधान है। 

बुध ग्रह के कुछ ऐसे सरल और सटीक उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से व्यक्ति अपनी कुंडली में मौजूद बुध ग्रह को मजबूत कर सकता है और उनके शुभ फल प्राप्त कर सकता है। आइए जानते हैं बुध ग्रह की शांति और उसे मजबूत करने के कुछ सरल उपाय उनके बारे में।

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एक दिन में दो बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन : देश दुनिया पर इसका प्रभाव 

  • शुक्र ग्रह 02 अक्टूबर- गाँधी जयंती (सार्वजनिक अवकाश) के दिन राशि चक्र की आठवीं राशि वृश्चिक में गोचर करेगा।
  • इसी दिन बुध ग्रह तुला राशि से अपनी उच्च राशि कन्या में वक्री अवस्था में गोचर कर जायेगा।
  • ऐसे में कहा जा सकता है कि, बुद्धि, संचार और मनोरंजन के ग्रह और फैशन, ग्लैमर और उत्सव के ग्रह का दो महत्वपूर्ण गोचर एक ही दिन होने जा रहा है। 
  • जल्द ही त्योहारों की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में त्योहारों के सीजन से ठीक पहले इन महत्वपूर्ण गोचरों का असर देश के समारोहों और बाजार की स्थितियों पर अवश्य ही देखने को मिलेगा।
  • खनिज, हीरे, चांदी और गहने की कीमतों में वृद्धि देखने को मिलेगी। साथ ही मसलों और दाल जैसी वस्तुओं के दाम बढ़ने की भी संभावना है। कॉटन और सिल्क जैसे फाइन टेक्सटाइल्स की कीमतों में भी बढोत्तरी देखने को मिलेगी।
  • इसके अलावा मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में तेजी आने की संभावना  है। आने वाली फिल्मों के लिए समय काफी अनुकूल रहेगा और इस दौरान बॉक्स ऑफिस पर धमाल और अच्छा पैसा कमाने में ये फिल्में सफल रहने वाली हैं। कोरोना काल से सिनेमाघरों में ताला लग गया था लेकिन अब एक बार फिर से सिनेमाघरों में रौनक लौट सकती है।
  • मौसम में कुछ प्रमुख और अहम बदलाव देखे जा सकते हैं। अक्टूबर के पूर्वार्ध में फिर से लू के थपेड़ों की भी आशंका जताई जा रही है।
  • इस अवधि के दौरान कुछ अधूरी वैज्ञानिक खोजों और परियोजनाओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
  • इस दौरान मेडिकल क्षेत्र में भी अहम बदलाव देखे जा सकते हैं। मुमकिन है कि इस दौरान कोई ऐसी दवा अपना काम सही ढंग से शुरू कर दे जो शुरूआत में प्रमुख परिणाम नहीं दिखा रही थीं।
  • वैश्विक स्तर पर कुछ पुरानी संधियां और दस्तावेज देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए फिर से विचाराधीन हो सकते हैं।
  • कुछ व्यापारिक नीतियों में बदलाव के चलते देशों के बीच कुछ गलतफहमियां होने की प्रबल आशंका है।
  • आशंका है कि इस समय अवधि में दुनियाभर में कोरोना मामलों की संख्या में वृद्धि की प्रबल आशंका है लेकिन देश कुछ नई दवाओं के नए परीक्षणों के साथ इस पर अंकुश लगाने की कोशिश करते नज़र आयेंगे।
  • किसानों को मिलने वाली सब्सिडी और सुविधाओं पर विचार तो किया जाएगा लेकिन इस सन्दर्भ में कोई बड़ा बदलाव सुर्खियों में नहीं आएगा।

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एक दिन दो बड़े गोचर: किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ?

वृश्चिक राशि, धनु राशि, कुंभ राशि वालों के लिए यह अनुकूल रहेगा।

मेष राशि, वृषभ राशि, मीन राशि वालों के लिए बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है।

कुंडली में शुक्र ग्रह को मज़बूत करने के उपाय 

  • जीवन में ज्यादा से ज्यादा सफ़ेद रंग का इस्तेमाल करें।
  • माँ लक्ष्मी की पूजा करें।
  • श्री सूक्त का पाठ करें।
  • महिलाओं और बड़े लोगों का सम्मान करें।
  • शुक्र ग्रह को मज़बूत करने के लिए हीरा रत्न पहनने की सलाह दी जाती है लेकिन यह उपाय केवल विद्वान ज्योतिषियों से परामर्श के बाद ही करें।

कुंडली में बुध ग्रह को मज़बूत करने के उपाय 

  • अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा हरा रंग और हरे रंग की वस्तुओं को शामिल करें।
  • भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • श्री विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र का जाप करें।
  • बहन, बेटियों और छोटी कन्याओं का विशेष रूप से सम्मान करें।
  • बुध ग्रह को मज़बूत करने के लिए पन्ना रत्न पहनने की सलाह दी जाती है लेकिन यह उपाय केवल विद्वान ज्योतिषियों से परामर्श के बाद ही करें।

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