‘रिंग ऑफ फायर’ सूर्यग्रहण: 2046 से पहले अब नहीं दिखेगा यह दुर्लभ नज़ारा- जानें इसकी ख़ासियत और समय

सूर्य ग्रहण 2023: एक अन्य महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना की जानकारी लेकर एस्ट्रोसेज का एक खास ब्लॉग अपने रीडर्स के लिए हाज़िर है। इस ब्लॉग में साल 2023 में लगने वाले दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण के बारे में चर्चा करेंगे और साथ ही, वैदिक ज्योतिष की नज़र से इसे समझने की कोशिश करेंगे।

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इस ब्लॉग में हम आपको अक्टूबर 2023 में लगने वाले सूर्यग्रहण की तारीख़ और समय के बारे में बताएंगे और साथ ही, यह भी बताएंगे कि यह ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा और दुनिया के किस हिस्से में दिखाई नहीं देगा, यह ग्रहण किस प्रकार का होगा और इसका सभी 12 राशियों पर कैसा प्रभाव देखने को मिलेगा। तो, बिना किसी देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं इस ग्रहण के बारे में सब कुछ। सभी जानकारी के लिए ब्लॉग को अंत तक जरूर पढ़ें।

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सूर्य ग्रहण क्या है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब माना जाता है जब सूर्य पर छाया ग्रह राहु का प्रभाव होता है और इसके परिणामस्वरूप सूर्य कमज़ोर हो जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे हम प्रत्यक्ष आंखों से स्पष्ट रूप से देख सकते हैं लेकिन धार्मिक रूप से सूर्य ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि इस दौरान जगत को ऊर्जा देने वाले सूर्यदेव राहु के प्रभाव में आकर कमज़ोर यानी पीड़ित होने लगते हैं।

सौरमंडल में सभी नौ ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं और हमारी पृथ्वी पर भी सूर्य की रोशनी ही जीवन का आधार मानी जाती है। यह जीव धारियों को जीवन ऊर्जा प्रदान करती है। पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा भी सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है और यही कारण है कि पृथ्वी पर सूर्य को ईश्वर तुल्य माना जाता है क्योंकि यह सभी को जीवन प्रदान करते हैं।

विज्ञान के अनुसार, सूर्य ग्रहण सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा के आने के कारण होता है। जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आता है तो पृथ्वी से सूर्य का प्रकाश वाला भाग दिखाई नहीं देता और उस समय पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश न पड़कर चंद्रमा की परछाई नजर आने लगती है। इसी स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरियों के कारण कभी सूर्यग्रहण थोड़ी देर और कभी बहुत देर का हो सकता है। हालांकि यह अवधि थोड़े ही समय के लिए ही होती है जिससे शीघ्र ही ग्रहण की समाप्ति हो जाती है और फिर से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर आने लगता है।

यह किस प्रकार का सूर्य ग्रहण है?

साल 2023 का पहला सूर्यग्रहण अप्रैल माह में लग चुका है और यह सूर्य ग्रहण एक संकर सूर्य ग्रहण था। वहीं दूसरा सूर्य ग्रहण 14 अक्टूबर, 2023 दिन शनिवार को लग रहा है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, इससे पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को सूर्य का आवर्त भाग नहीं दिखाई देता है। वलयाकार ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा का स्पष्ट व्यास सूर्य से छोटा होता है, जिससे सूर्य की अधिकांश रोशनी अवरुद्ध हो जाती है और सूर्य एक वलय (रिंग) जैसा दिखने लगता है। वलयाकार ग्रहण को आंशिक ग्रहण माना जाता है और इसे दुनिया के भिन्न-भिन्न हिस्सों से देखा जा सकता है। ग्रहण कभी भी हर जगह दिखाई नहीं देता है लेकिन खगोलीय विज्ञान से जुड़े लोगों के लिए यह एक बड़ी घटना मानी गई है। 

हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि को लगता है और इस बार साल 2023 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण कृष्ण पक्ष अमावस्या को आएगा। आमतौर पर सूर्य ग्रहण अनेक रूपों में दिखाई दे सकता है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण जिसे खग्रास सूर्यग्रहण कहते हैं, के रूप में भी दिखाई दे सकता है तो आंशिक सूर्यग्रहण जिसे खंडग्रास सूर्यग्रहण कहते हैं, उसके रूप में भी दिखाई दे सकता है। इसके अतिरिक्त यह कंकणाकृति सूर्यग्रहण के रूप में भी दिखाई दे सकता है।

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2023 का दूसरा सूर्य ग्रहण: तिथि और दृश्यता

तिथिदिनप्रारंभ समयसमाप्तिदृश्यता
आश्विन मास कृष्ण पक्ष अमावस्याशनिवार/रविवार 14 अक्टूबर/15 अक्टूबर, 2023शाम 08 बजकर 34 मिनट सेमध्यरात्रि 02 बजकर 25 मिनट तकमेक्सिको, बारबाडोस, अर्जेंटीना, कनाडा, कोलंबिया, क्यूबा, ​​इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, अरूबा, एंटीगुआ, बहामास, बोलीविया, ब्राजील, पेरू, पैराग्वे, जमैका, हैती, ग्वाटेमाला, गुयाना, निकारागुआ, त्रिनिदाद और टोबैगो, उरुग्वे, वेनेज़ुएला, अमेरिका, कोस्टा रिका, कोलंबिया, चिली, बेलीज़, डोमिनिका, ग्रीनलैंड और सूरीनाम। (भारत में दृश्यमान नहीं)

नोट: कृपया ध्यान दें कि उपरोक्त वर्णित सूर्य ग्रहण का जो समय दिया गया है, वह भारतीय समय के अनुसार दिया गया है। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। तो तदनुसार, इसका धार्मिक महत्व और सूतक काल मान्य नहीं होगा। ग्रहण का सूतक काल भी वहीं पर मान्य होता है, जहां पर यह दृश्य मान होता है इसलिए भारत में इसकी दृश्यता ना होने के कारण भारत में इसका कोई भी सूतक मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण 14 अक्टूबर 2023, शनिवार और चित्रा नक्षत्र में कन्या राशि में घटित हो रहा है। सूर्य ग्रहण का समय संयुक्त राज्य अमेरिका के समय पर आधारित है। आपको बता दें कि रात को 24 घंटे बाद के समय को अगला दिन माना जाता है।

सूर्य ग्रहण 2023: ज्योतिषीय दृष्टिकोण

साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 14 अक्टूबर 2023 को कृष्ण पक्ष अमावस्या को लगेगा। उस दौरान सूर्य कन्या राशि में चित्रा नक्षत्र में विराजमान होंगे। कन्या राशि के स्वामी बुध इसी भाव में स्थित रहेंगे। बता दें कि चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल है।

सूर्य ग्रहण पर अद्भुत संयोग- जानें ‘रिंग ऑफ फायर’ का रहस्य 

इस साल के दूसरे और आखिरी सूर्यग्रहण पर कई योग भी बन रहे हैं। जैसे इस दिन सर्वपितृ अमावस्या है, जिससे इस दिन का महत्व अपने आप में ही बढ़ने वाला है। दूसरा, ग्रहण के दौरान सूर्य और बुध दोनों ही कन्या राशि में मौजूद रहने वाले हैं जिससे बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। विद्वान ज्योतिषियों की मानें तो, सूर्यग्रहण पर बन रहा बुधादित्य योग बहुत से जातकों की आर्थिक स्थिति के लिहाज से शुभ संकेत भी दे रहा है। 

इस सूर्यग्रहण के दौरान अन्तरिक्ष में सूर्य के अंदर एक काली आकृति बन जाएगी जिसके आसपास आग का छल्ला नज़र आएगा इसे ही अंग्रेज़ी में ”रिंग ऑफ फायर’ के नाम से जाना जाता है और ये काली आकृति दरअसल और कुछ नहीं बल्कि चंद्रमा ही होता है। यही वजह है कि 14 अक्टूबर को दुनिया के कुछ हिस्सों में दिखने वाला यह सूर्य ग्रहण सामान्य नहीं माना जा रहा है। इस खास सूर्य ग्रहण को एन्युलर सोलर एक्लिप्स यानि कंकणाकृति सूर्यग्रहण के नाम से जाना जाएगा जिससे रिंग ऑफ फायर का नजारा बनेगा। 

इसके अलावा साल के आखिरी सूर्य ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत यह भी बताई जा रही है कि 2012 के बाद पहली बार यह अमेरिका के सभी हिस्सों में नजर आएगा और इसके बाद ये सीधे वर्ष 2046 में नज़र आने वाला है। 

हालांकि हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, ‘रिंग ऑफ फायर’ सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में लोग इसे नासा के आधिकारिक वैबसाइट पर लाइव के माध्यम से यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं, जिसकी स्ट्रीमिंग 14 अक्टूबर 2023 को शाम 4:30 बजे शुरू हो जाएगी।

सूर्य ग्रहण 2023: सूतक काल

कृपया ध्यान दें कि सूर्य ग्रहण का उपरोक्त समय भारतीय मानक समय के अनुसार दिया गया है। साल 2023 का दूसरा सूर्य ग्रहण एक वलयाकार ग्रहण होगा लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए यह सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में, भारत के लोग अपनी नियमित दिनचर्या का सामान्य रूप से पालन कर सकते हैं और उन्हें किसी विशेष नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। जिन स्थानों पर यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, उनका जिक्र ऊपर दिए गए बॉक्स में किया गया है। उन स्थानों में सूतक काल भी लगेगा और उन लोगों के लिए सूर्य ग्रहण से संबंधित नियमों का पालन करना लाभकारी होगा।

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सूतक क्या है?

सूतक को सूर्य या चंद्र ग्रहण से पहले की समय अवधि कहा जाता है। सूतक काल में किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है क्योंकि इस समय पृथ्वी का वातावरण बुरी तरह से प्रदूषित हो जाता है। जिसका नकारात्मक प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है। सूतक काल का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है। इस दौरान भगवान की प्रार्थना या अन्य धार्मिक गतिविधियों जैसे पवित्र अनुष्ठान करना सख्त वर्जित माना जाता है। सूतक काल की गणना प्रहर को ध्यान में रखकर की जाती है।

बता दें कि हिन्दू धर्म अनुसार, दिन-रात मिलाकर 24 घंटे में आठ प्रहर होते हैं। औसतन एक प्रहर तीन घंटे या साढ़े सात घटी का होता है जिसमें दो मुहूर्त होते हैं। एक प्रहर एक घटी 24 मुहूर्त की होती है। दिन के चार और रात के चार प्रहर मिलाकर आठ प्रहर होते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सूर्य ग्रहण के सूतक काल की गणना चार प्रहर को ध्यान में रखकर की जाती है। इसलिए सूर्य ग्रहण का सूतक काल वास्तविक ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। 

हालांकि सूतक तभी माना जाता है जब ग्रहण उक्त स्थान पर दिखाई दे। सूतक काल के दौरान कई कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। इन कार्यों में शामिल है खाना-पीना, सोना, किसी भी वस्तु को काटना नहीं चाहिए, तेल मालिश करना। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान नया उद्यम शुरू करना, धार्मिक गतिविधियां करना या देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूना भी वर्जित माना जाता है। ग्रहण के दौरान आप केवल मंत्र आदि का जाप करें।

सूर्य ग्रहण 2023: सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण अनुकूल प्रतीत नहीं हो रहा है। यह ग्रहण आपके पेशेवर जीवन में कई परेशानियां लेकर आ सकता है। इस दौरान आपको कार्यक्षेत्र में अपने वरिष्ठों व सहकर्मियों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है, जिसके चलते आपको कार्यक्षेत्र में कई उतार-चढ़ाव झेलना पड़ सकता है। कुछ लोगों को ग्रहण के दौरान करियर के संदर्भ में नौकरी में किसी अप्रत्याशित स्थानांतरण का सामना करना पड़ सकता है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह अवधि उनकी संतान पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इस दौरान आपके संतान के बीमार होने की संभावना अधिक है और उनके स्वास्थ्य को लेकर आप चिंतित हो सकते हैं। यह भी हो सकता है कि आपके बच्चों के साथ आपके रिश्ते खराब हो जाएं। वहीं जो लोग रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं उन्हें मानसिक तनाव महसूस हो सकता है और उन्हें नए विचारों पर काम करना मुश्किल लग सकता है, जिसके चलते काम में देरी या परेशानियां पैदा होने की आशंका है। संभव है कि विद्यार्थियों का मन इस अवधि में पढ़ाई में न लगे।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण विशेष रूप से कठिन साबित हो सकता है। इस अवधि आपके घर का वातावरण कई नकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ होने की संभावना है, जिसके चलते घर में झगड़े और संघर्ष उत्पन्न हो सकता है। यदि आप कोई संपत्ति खरीदने का विचार बना रहे हैं तो इस योजना को आगे के लिए टाल दें क्योंकि इस दौरान आपको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों को सूर्य ग्रहण के दौरान ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है। इस दौरान आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ सकती है और ऐसे में, आप किसी संक्रमण या वायरस की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। आपको सलाह दी जाती है कि थोड़ा सतर्क रहें और अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान दें। हो सकता है कि इस अवधि आपको घबराहट महसूस हो। जो लोग पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं वे विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के दौरान असहज महसूस कर सकते हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए यह अवधि आर्थिक रूप से कठिन साबित हो सकती है क्योंकि आपको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, आपको सलाह दी जाती है कि इस अवधि किसी को पैसा उधार न दें और यदि संभव हो तो खुद भी किसी से पैसा उधार न लें। यह एक ऐसा समय साबित हो सकता है जब आपको अपनी आय में उतार-चढ़ाव का अनुभव होगा। जो लोग पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े हैं उन्हें परिवार के साथ विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

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कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को इस दौरान डिप्रेशन से गुजरना पड़ सकता है और आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी देखने को मिल सकती है। इस दौरान आपके व्यक्तित्व में आकर्षण कम हो सकता है और आपको किसी बीमारी या चोट का भी सामना करना पड़ सकता है। वहीं सूर्य ग्रहण की यह अवधि आपको वायु जनित रोग और संक्रामक रोग दे सकते हैं, जिससे आपके मानसिक तनाव में वृद्धि हो सकती है।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों को इस दौरान भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अवांछित स्थानांतरण या लंबी दूरी की यात्राएं आपके लिए परेशानी पैदा कर सकती है। इसके अलावा, बिज़नेस से संबंधित यात्रा भी आपके लिए फलदायी साबित न होने के संकेत हैं। आर्थिक जीवन की दृष्टि से देखें तो मेडिसिन व दवाइयों या किसी अन्य कारण से आपके पैसे खर्च हो सकते हैं और ये खर्चे आपकी रातों की नींद उड़ा सकते हैं।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण फलदायी साबित होगा। इस दौरान आपको आर्थिक लाभ होगा। साथ ही, पैतृक संपत्ति से भी लाभ अर्जित करने के कई अवसर प्राप्त होंगे। वृश्चिक राशि वालों के लिए यह अवधि कई अच्छे मौके लेकर आएगी। आपको अपने सोशल नेटवर्क से भी फायदा होगा।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों को इस दौरान कार्यस्थल पर संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है और वरिष्ठों के साथ आप विवाद भी होने की संभावना है। हो सकता है कि कार्यक्षेत्र में आपके वरिष्ठ आपके कड़ी मेहनत और प्रयासों के लिए आपकी सराहना न करें और इससे आपको निराशा हो सकती है। कुछ जातकों को अपनी प्रतिष्ठा में कमी महसूस हो सकती है, जिस वजह से वे नौकरी छोड़ सकते हैं।

मकर राशि

सूर्य ग्रहण की इस अवधि के दौरान मकर राशि के जातकों का वैवाहिक जीवन शांतिपूर्ण रहेगा और आपको भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। आपको अपने पिता, गुरु या मेंटर का सहयोग मिलेगा। धर्म आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े सभी कार्यों में शामिल होने से आपको लाभ होगा। काम के सिलसिले में लंबी दूरी की यात्रा भी आपके अनुकूल साबित हो सकती है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों को सूर्य ग्रहण के दौरान बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है क्योंकि आप बार-बार किसी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। आप इस अवधि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में चाहे व आर्थिक हो, व्यक्तिगत हो या कोई अन्य हो में बदलाव महसूस करेंगे। यदि आप वाहन चलाते हैं तो आपको सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि आपकी लापरवाही आपके लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

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मीन राशि

मीन राशि के जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इस दौरान आपके और आपके पार्टनर के बीच कई गलतफहमियां पैदा हो सकती है। आशंका है कि आपको अपने पार्टनर के साथ गंभीर विवाद या झगड़े का सामना करना पड़े। जो लोग पार्टनरशिप में बिज़नेस कर रहे हैं उनका अपने साझेदारों से विवाद हो सकता है, जिसके चलते व्यापार में घाटा होने की संभावना है।

सूर्य ग्रहण के दौरान अपनाएं ये उपाय

वैदिक ज्योतिष में सूर्यदेव को विशेष महत्व दिया गया है और इन्हें सौर मंडल का राजा भी माना गया है। पिता के कारक ग्रह सूर्य का जीवन देने वाला प्रभाव होता है और हमारे जीवन में ऊर्जा और प्रकाश का प्राकृतिक स्रोत भी है इसलिए जब सूर्य पर ग्रहण लगता है तो हमारी आरोग्य क्षमता भी कमज़ोर पड़ती है और हमारी रोगों की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है।

सूर्य न केवल हमें सरकारी नौकरी प्रदान करते हैं बल्कि हमारे जीवन में मान-सम्मान और यश भी प्रदान करते हैं। देश और दुनिया के उच्च पदों पर बैठे लोग भी सूर्य के प्रभाव से ही वहां तक पहुंच पाते हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य पर राहु का प्रभाव अधिक होता है और विपरीत प्रकृति के ग्रह के प्रभाव के कारण सूर्य कमज़ोर अवस्था में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं, जिसे अपनाने से सूर्य ग्रहण के दौरान पड़ने वाले अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है।

  • सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से आपको लाभ होगा। सूर्य बीज मंत्र इस प्रकार है- ‘ॐ स्थान ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।’
  • इसके अतिरिक्त आप सूर्य ग्रहण काल में सूर्य देव की आराधना भी कर सकते हैं लेकिन उनकी मूर्ति का स्पर्श न करें।
  • इस दौरान शिव स्तुति या शिव चालीसा का पाठ करें।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करना सबसे शक्तिशाली और प्रभावी उपाय माना जाता है।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान शिव मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना भी लाभकारी होता है और इसके अलावा आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
  • सूर्य ग्रहण का समय एक ऐसा समय होता है कि जब आप किसी भी मंत्र का जाप और विशेष रूप से कर सकते हैं तो उसका आपको हजारों गुना फल प्राप्त होता है और आप मंत्र सिद्धि भी कर सकते हैं इसलिए इस समय में किसी भी मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • यदि आप किसी बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या का शिकार हैं और सभी उपाय करने के बाद भी आप को कोई राहत नहीं मिल रही है तो आपको सूर्य ग्रहण के दौरान इस विशेष शिव मंत्र का जाप करना चाहिए- ‘ॐ नमः शिवाय मृत्युंजय महादेवाय नमोस्तुते।’
  • यदि आप किसी बहुत बड़ी बाधा से ग्रसित हैं या किसी बीमारी का सामना कर रहे हैं तो आपको ग्रहण काल के दौरान अपने ऊपर से काले तिलों को सात बार घुमाकर किसी गरीब या जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।
  • इसके अलावा आप इस दौरान तिल का दान करना भी कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके घर और आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर हो जाएगी।
  • यदि आपकी कुंडली में राहु का अशुभ प्रभाव मिल रहा है तो सूर्य ग्रहण के दौरान राहु के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। यह मंत्र इस प्रकार है- ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।’
  • एक अन्य विशेष उपाय के रूप में आप माता महाकाली की उपासना भी कर सकते हैं। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि ग्रहण काल के दौरान किसी भी मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए और इस अवधि केवल मानसिक जाप करना ही उपयुक्त होता है।

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