सूर्य का मेष राशि में गोचर: जानें आपकी राशि पर क्या होगा इसका प्रभाव व उपाय!

सूर्य का मेष राशि में गोचर: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक ग्रह एक निश्चित समयांतराल में राशि परिवर्तन करता है। जिसका विशेष प्रभाव मानव जीवन व पूरी पृथ्वी पर देखने को मिलता है। सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन की अवधि अलग-अलग होती है और इसका प्रभाव भी भिन्न-भिन्न रूप से पड़ता है। आपको बता दें कि सूर्य जल्द ही अपनी उच्च राशि मेष राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कोई भी ग्रह अपनी उच्च राशि में पूर्ण फल प्रदान करने में सक्षम होता है और इसका प्रभाव सभी 12 राशि के जातकों पर देखने को मिलता है। तो आइए बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं सूर्य के इस राशि परिवर्तन का सभी राशि के जातकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और इसके अशुभ प्रभावों से बचने के क्या उपाय हैं लेकिन इससे पहले जानते हैं सूर्य के मेष राशि में गोचर का समय व तिथि।

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सूर्य का मेष राशि में गोचर से संबंधित अन्य चीजों को जानने के लिए, करें विद्वान ज्योतिषियों से बात करके

सूर्य का मेष राशि में गोचर: समय व तिथि

आत्मा के कारक ग्रह सूर्य का मेष राशि में गोचर 14 अप्रैल 2023, शुक्रवार की दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर होगा। सूर्य देव 15 मई, 2023 तक मेष राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद यह पुन: राशि परिवर्तन करेंगे।

सूर्य का मेष राशि गोचर: प्रभाव 

सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं। सूर्य ग्रह की उच्च और नीच राशि की बात करें तो यह मेष राशि में उच्च और तुला राशि में नीच के माने गए हैं। ये जब मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में मौजूद होते हैं तो यह स्थिति शक्तिशाली मानी जाती है। सूर्य देव मेष राशि के पांचवे भाव के स्वामी हैं। इसके प्रभाव से जातकों को करियर में सफलता प्राप्त होगी, भाग्य का साथ मिलेगा और धन लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि की प्राप्ति होगी। सूर्य का मेष राशि में गोचर सरकारी नौकरी करने वाले जातकों के लिए भी फलदायी साबित होगी। इस गोचर के परिणामस्वरूप जातक के अंदर अध्यात्म के प्रति झुकाव बढ़ेगा।

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ज्योतिष में सूर्य ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। ज्योतिष में सूर्य उच्च पद, नेतृत्व की क्षमता, आत्मविश्वास, मान-सम्मान के कारक हैं। ज्योतिष के अनुसार किसी भी पुरुष जातक की कुंडली में सूर्यदेव पिता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि किसी महिला की कुंडली में यह पति के जीवन के बारे में बताते हैं। कार्यक्षेत्र में सूर्य उच्च व प्रशासनिक पद के साथ-साथ समाज में मान-सम्मान व प्रतिष्ठा को दर्शाते हैं। यदि किसी की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में हों तो नौकरी, बिज़नेस और राजनीति में सफलता दिलाते हैं। साथ ही जीवन में संतुष्टि, अच्छी सेहत और तेज़ दिमाग भी प्रदान करते हैं। जबकि कुंडली में सूर्य की कमज़ोर स्थिति से जातक की जिंदगी में सुख-समृद्धि की कमी होती है और वह कई बीमारियों से घिरा रहता है। दिशाओं में यह पूर्व दिशा के स्वामी हैं जबकि धातुओं में यह तांबे और सोने के स्वामी होते हैं। सूर्य बृहस्पति (गुरु), मंगल और चंद्रमा के मित्र ग्रह हैं जबकि शुक्र, शनि, राहु और केतु इनके शत्रु हैं। बुध ग्रह के साथ यह सम भाव रखते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य एक राशि में एक माह की अवधि तक गोचर करते हैं अर्थात एक माह के बाद दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। सूर्य ऊर्जा, शक्ति, सकारात्मकता और स्पष्टता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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इन लक्षणों से जानिए सूर्य देने वाले हैं अशुभ फल

  • सूर्य अशुभ फल देने वाले हों तो घर में प्रकाश देने वाली वस्तुएं जैसे बल्ब का खराब होना, फ्यूज उड़ना या प्रकाश का स्रोत बंद हो जाने जैसी समस्या हो सकती है।
  • जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में होते हैं उस व्यक्ति को शरीर में अकड़न, आंख में परेशानी जैसे- रोशनी का कम होना, जलन, मुंह में बार-बार थूक आना, नौकरी या प्रमोशन में बाधाएं उत्पन्न होना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • इसके अलावा समाज में जातक को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी महसूस हो सकती है।
  • किसी कारण से फसल का सूख जाना भी सूर्य के कमज़ोर होने के संकेत हैं।
  • व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद और व्यापार आदि में बड़ी परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
  • इसके साथ ही सूर्य के कमज़ोर होने पर जातक की सुसराल में बदनामी हो सकती है और तिरस्कार हो सकता है या कई झूठे आरोप लगने की स्थिति भी बन सकती है।

कुंडली में सूर्य के शुभ होने के मिलते हैं ये संकेत

  • कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति को सरकारी सेवा में उच्च पद की प्राप्ति होती है।
  • जातक के अंदर अच्छी नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
  • समाज में अचानक उसके मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होने लगती है।
  • सूर्य की मजबूती स्थिति जातक को तेज प्रदान करती है।
  • सूर्य जब शुभ स्थिति में होते हैं तो व्यक्ति का चेहरा प्रभावशाली और चमकता हुआ होता है और ऐसे लोग किसी के अधीन होकर काम करना पसंद नहीं करते हैं।

कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करने के अचूक उपाय

  • कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने के लिए 12 या 21 रविवार का व्रत रखें। माना जाता है कि ऐसा करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और हर क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है।
  • सूर्य मजबूत करने के लिए रविवार के दिन स्नान करने के बाद अगर संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए या फिर आप लाल रंग का रुमाल भी अपने साथ रख सकते हैं। इसके साथ ही ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करें।
  • कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन स्नान के बाद एक लोटे में साफ जल लें और इसमें लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और दूर्वा मिलाकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
  • कोशिश करें कि रविवार के दिन नमक का सेवन न करें।
  • सूर्य कमजोर होने पर जातक को लाल और पीले रंग के वस्त्र, गुड़, सोना, तांबा, गेहूं, लाल कमल, मसूर की दाल, गाय आदि का दान करना चाहिए। 
  • सूर्य को मजबूत करने के लिए ज्योतिषी से सलाह लेकर माणिक्य रत्न धारण किया जा सकता है।

सूर्य का मेष राशि में गोचर: सभी राशियों पर प्रभाव

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य देव पांचवें भाव पर शासन करते हैं। यह भाव अध्यात्म के प्रति झुकाव और संतान को दर्शाता है। पांचवे भाव के स्वामी के रूप में सूर्य देव का पहले भाव में मौजूद होना जातकों के लिए…(विस्तार से पढ़ें)

वृषभ राशि

आपकी कुंडली के चौथे भाव पर सूर्य देव का स्वामित्व है और अब यह आपकी कुंडली के बारहवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं। चौथा भाव आराम और बारहवां भाव हानि को दर्शाता है…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के लिए सूर्य देव तीसरे भाव के स्वामी हैं और अब वह आपकी कुंडली के ग्यारहवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं। यह भाव लाभ और इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करता है… (विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए सूर्य देव दूसरे भाव के स्वामी हैं। यह भाव आर्थिक पक्ष और घरेलू जीवन को दर्शाता है। आपकी चंद्र राशि के दसवें भाव में सूर्य महाराज गोचर करने जा रहे हैं और यह…(विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य देव पहले भाव के स्वामी हैं और अब वह आपकी कुंडली के नौवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं। यह भाव भाग्य, विदेश यात्रा और धर्म को दर्शाता है। सूर्य का मेष राशि में गोचर…(विस्तार से पढ़ें)

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए सूर्य देव बारहवें भाव के स्वामी हैं और यह आपके राशि के लिए एक हानिकारक ग्रह हैं। वहीं बारहवां भाव जीवन में ख़र्चों और हानि को दर्शाता है… (विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि के लिए सूर्य देव ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं और यह आपके लिए एक हानिकारक ग्रह हैं। अब सूर्य महाराज आपकी कुंडली के सातवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं। यह भाव…(विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य देव दसवें भाव के स्वामी हैं जो कि लाभकारी ग्रह हैं। अब यह आपकी कुंडली के छठे भाव में दसवें भाव के स्वामी के रूप में गोचर करने जा रहे हैं… (विस्तार से पढ़ें)

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य देव नौवें भाव के स्वामी हैं और अब वह आपकी कुंडली के पांचवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं। नौवां भाव भाग्य… (विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

सूर्य का मेष राशि में गोचर, आपके करियर के लिहाज़ से ज्यादा फायदेमंद साबित न होने की आशंका है। इस दौरान…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

सूर्य का मेष राशि में गोचर बिज़नेस करने वाले जातकों के लिए शुभ रहेगा। इस दौरान कुंभ राशि के जातकों का व्यवसाय अच्छी तरक्की करेगा और… (विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

आशंका है कि बिज़नेस करने वाले जातकों के लिए गोचर की अवधि ज्यादा लाभकारी न रहे। इस दौरान आपको धन लाभ…(विस्तार से पढ़ें)

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