16 नवंबर को होने वाला सूर्य गोचर चमकाएगा किसकी किस्मत और देश-दुनिया पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

गोचर का अर्थ होता है गमन करना यानि की चलना। सरल शब्दों में कहें तो, कोई चीज़ जब गति में होती है तो उसे गोचर कहते हैं। चलिए और विस्तार से समझाएं तो गोचर शब्द में ‘गो’ का अर्थ होता है तारा जिसे आप नक्षत्र या ग्रह के रूप में समझ सकते हैं और ‘चर’ शब्द का अर्थ होता है चलना। ऐसे में इन दोनों को मिलाने से इस शब्द का अर्थ निकलता है ग्रहों का चलना। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सभी नौ ग्रहों की अपनी गति होती है।

अपने इस ब्लॉग में मुख्यतौर पर हम बात करेंगे जल्द ही होने वाले सूर्य के गोचर की। सूर्य का यह गोचर 16 नवंबर 2021 को होने जा रहा है। यहाँ जानिए इस गोचर का देश और दुनिया पर क्या कुछ प्रभाव देखने को मिलेगा, साथ ही जानिए सूर्य का यह गोचर किन राशियों की किस्मत चमकाएगा और इस गोचर से किन राशियों को रहना होगा सावधान?

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सूर्य गोचर 2021: समय (Sun Transit 2021)

सभी ग्रहों का स्वामी सूर्य 16 नवंबर से 30 दिनों की अवधि के लिए वृश्चिक राशि में गोचर करेगा। सूर्य ग्रह 16 नवंबर, 2021 को 12:49 बजे वृश्चिक राशि में गोचर करेगा।

इस गोचर का आपकी राशि पर क्या कुछ प्रभाव पड़ेगा यह जानने के लिए आप अभी यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

सूर्य गोचर: अर्थ और महत्व 

सभी ग्रह समय-समय पर अलग अलग राशियों में भ्रमण (या जिसे हम गोचर कहते हैं) करते हैं। ग्रहों के इस भ्रमण का राशियों पर जो भी प्रभाव पड़ता है उसे हम गोचर का फल या गोचरफल कहते हैं। बात करें सूर्य गोचर की तो, सूर्य के गोचर को सूर्य संक्रांति कहते हैं। ऐसे में समय-समय पर सूर्य जिस भी राशि में गोचर करता है उसके गोचर को उस राशि के नाम की संक्रांति से जाना जाता है।

उदाहरण के तौर पर समझाएं तो अब जैसे की सूर्य वृश्चिक राशि में गोचर करने जा रहा है तो, इसे वृश्चिक संक्रांति के नाम से जाना जायेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य तकरीबन एक महीने की अवधि के लिए एक राशि में गोचर करता है और फिर अपना राशि परिवर्तन अर्थात गोचर दूसरी राशि में कर लेता है।

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जल्द होने वाले सूर्य गोचर का देश और दुनिया पर प्रभाव

इस विषय पर एस्ट्रोसेज के ज्योतिषी आचार्य मृगांक शर्मा ने अपनी विद्वान राय व्यक्त की है। उनके अनुसार 16 नवंबर को होने वाले सूर्य गोचर से देश और दुनिया पर कुछ अहम और बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, आइये जानते हैं।

आत्मा का कारक ग्रह सूर्य बहुत महत्वपूर्ण ग्रह है और इसका गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण तिथियों को जन्म देने वाला माना जाता है क्योंकि सूर्य राजा अर्थात यह किसी भी देश के वरिष्ठ नेतृत्व को भी परिभाषित करता है। यदि स्वतंत्र भारत की कुंडली से देखें तो सूर्य का यह गोचर सप्तम भाव में होगा। वृश्चिक राशि मंगल के आधिपत्य वाली राशि है और मंगल सूर्य देव के मित्र हैं, इसलिए सूर्य का यह गोचर अपनी मित्र राशि में होगा।  

काल पुरुष की कुंडली के अनुसार यह अष्टम भाव की राशि है।  ऐसे में सूर्य का अष्टम भाव में गोचर होना कुछ पुराने खुले हुए राज बाहर निकलने का समय हो सकता है। अर्थात हमें अपनी वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों के शासन काल में हुए कुछ राज सुनने और देखने को मिल सकते हैं और जनता के सामने प्रकट हो सकते हैं। 

इसके परिणामस्वरूप कुछ महत्वपूर्ण बदलाव शासन प्रशासन में देखने को मिल सकते हैं। कुछ विशिष्ट तबादले होने की भी संभावना बनेगी। वृश्चिक राशि में पहले से ही केतु महाराज विराजमान हैं इसलिए सूर्य का उनके साथ स्थित होना जनता के स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा अनुकूल नहीं है लेकिन व्यापारिक समझौतों और विदेशी व्यापार और संबंधों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा लेकिन कुछ जगह बात गरमा गरमी के कारण अटक भी सकती है। 

यदि दुनिया की बात की जाए तो इस दौरान विभिन्न राष्ट्रों के मध्य गरमागरम बहस होने और एक दूसरे के प्रति गुप्त षड्यंत्र रचने या गुप्तचरों को सक्रिय करने का समय हो सकता है। ऐसे में कोई बड़ा सत्ता परिवर्तन भी देखने को मिल सकता है तथा जनता के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। 

ऐसे में भारत को भी अपनी सीमाओं पर ज्यादा चौकसी की आवश्यकता पड़ेगी और गुप्तचर एजेंसियों को सक्रिय रहना पड़ेगा ताकि किसी भी प्रकार के षड़यंत्र से बचा जा सके। चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को इस दौरान विशेष रूप से सतर्क रहना होगा।    

इस सूर्य के गोचर से किसकी चमकेगी किस्मत और किसको रहना होगा सावधान?

प्रत्येक गोचर विभिन्न राशियों पर प्रभाव डालता है और सूर्य जो कि ग्रहों का राजा है उसका गोचर भी सभी 12 राशियों को पूर्ण रूप से प्रभावित करेगा लेकिन किसी के लिए यह ज्यादा शुभ होगा तो किसी को सावधान सतर्क रहने की आवश्यकता पड़ेगी। 

यदि इस मुख्य रूप से वृश्चिक राशि में होने वाले सूर्य की गोचर की बात करें तो मिथुन राशि, कन्या राशि, मकर राशि और कुंभ राशि के लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम लेकर आएगा। आपको सरकारी क्षेत्र से लाभ के योग प्रशस्त होंगे। आपका समाज में मान सम्मान बढ़ेगा और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।  यदि किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं तो भी उसके लिए यह गोचर अनुकूल है। आपके संबंध वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी क्षेत्र के लोगों से बनेंगे जो आपके लिए बड़े काम के साबित होंगे। 

 इनके अतिरिक्त मेष राशि, वृषभ राशि, तुला राशि और धनु राशि के लोगों को इस गोचर में काफी ध्यान देना होगा। उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। बनते हुए कार्यों में विघ्न आ सकते हैं। खर्चों में अधिकता आ सकती है और अधिक प्रयास करने के बाद ही सफलता मिलने की संभावना बन सकती है इसलिए इस समय में आपको ज्यादा प्रयास और ज्यादा मेहनत करने पर जोर देना होगा और स्वयं को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी करनी होगी।  

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वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह का महत्व 

सूर्य को जगत की आत्मा कहा जाता है। बिना सूर्य के जीवन की कल्पना भी करना नामुमकिन और असंभव है। नवग्रहों के राजा सूर्य को कुंडली में पिता, पूर्वज, आत्मा, उच्च पद, सरकारी नौकरी और मान-सम्मान आदि का कारक कहा गया है। कुंडली में सूर्य की जैसी स्थिति होती है उसके अनुरूप ही व्यक्ति को शुभ-अशुभ फलों की प्राप्ति होती है।

कुंडली में सूर्य के शुभ फल: जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य मज़बूत अवस्था में या शुभ स्थिति में विराजमान होता है उन्हें सरकारी नौकरी का सुख, समाज में मान-सम्मान, राजनीतिक जीवन में सफलता आदि प्राप्त होती है। साथ ही ऐसे व्यक्तियों के उनके पिता के साथ संबंध भी मज़बूत होते हैं। ऐसे व्यक्ति दयालु स्वाभाव के होते हैं और अपने जीवन में अपार सफलत भी हासिल करते हैं। इसके अलावा बली सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति अपने काम और रिश्तों के प्रति बेहद वफादार भी होते हैं।

कुंडली में सूर्य के अशुभ फल: इसके विपरीत जिन लोगों की कुंडली में सूर्य ग्रह दुर्बल अवस्था, पीड़ित अवस्था या कमज़ोर स्थिति में होता है उन्हें अपने जीवन में नौकरी में असफलता, मान सम्मान में कमी, और आँखों की समस्या आदि झेलनी पड़ती है। इसके अलावा ऐसे व्यक्तियों के उनके पिता के साथ संबंध भी ख़ास अच्छे नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति बेवजह की भी बातों पर गुस्सा करते हैं और स्वाभाव में अहंकारी होते हैं। पीड़ित सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति ईर्ष्यालु स्वाभाव का बन जाता है और अहंकारी भी होने लगता है।

जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में नहीं होता है उन्हें पितृ दोष जैसे गंभीर दोषों का भी परिणाम भुगतना पड़ता है। कुंडली में सूर्य की स्थिति या गोचर के फलस्वरूप मिलने वाले बुरे फलों से बचने के लिए सूर्य ग्रह की शांति और उससे संबंधित कुछ ज्योतिषीय उपाय करने की सलाह दी जाती है।

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सूर्य ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय उपाय जो चमकाएंगें आपका भाग्य 

सूर्य की स्थिति या गोचर के फलस्वरूप मिलने वाले बुरे फलों से बचने के लिए सूर्य ग्रह की शांति और कुंडली में सूर्य को मज़बूत करने के उपाय हम आपको यहाँ प्रदान कर रहे हैं। यदि आप अपनी कुंडली के आधार पर व्यक्तिगत उपाय या समाधान जानना चाहते हैं तो देश के जाने-माने और विद्वान ज्योतिषियों से अभी फोन/चैट के माध्यम से संपर्क करें

  • पिता, पितातुल्य लोगों और अपने से बड़े लोगों का सदैव सम्मान करें।
  • भगवान विष्णु, श्री राम और सूर्यदेव की नियमित रूप से पूजा करें।
  • आदित्य ह्रदय स्त्रोत का साफ़ मन और स्पष्ट उच्चारणपूर्वक जप करना आपके लिए फलदायी साबित हो सकता है।
  • मुमकिन हो तो रविवार का व्रत करें।
  • रविवार के दिन सूर्य की होरा में और सूर्य नक्षत्रों में गुड़, गेंहू, तांबा, माणिक्य रत्न, खस आदि का दान करना भी शुभ माना गया है।
  • इसके अलावा कुंडली में सूर्य ग्रह को मज़बूत करने के लिए 1 मुखी रुद्राक्ष / 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ रहता है। (हालांकि जैसा की हम हमेशा कहते हैं कि, कोई भी रत्न हमेशा किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लेने के बाद ही धारण करना अच्छा रहता है। आप भी रुद्राक्ष धारण करने से पहले जानकार ज्योतिषी से सलाह-मशविरा अवश्य कर लें और हमेशा लैब सर्टिफाइड रत्न ही पहनें।) 

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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