सावन मास की महिमा : पाएं सावन महीने से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी

आषाढ़ महीने की शुरुआत होते ही महादेव के भक्तों के अंदर उत्साह फूट पड़ता है क्योंकि इस महीने के बाद ही सावन का पवित्र महीना प्रारम्भ होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन हिन्दू वर्ष का पांचवा महीना है। यह महीना विशेष तौर से भगवान शिव को समर्पित होता है। सावन के शुभ अवसर पर शुरू हो चुका है “सावन महा सेल”। पाएं एस्ट्रोसेज के सभी ज्योतिषीय उत्पादों, सेवाओं पर धमाकेदार ऑफर, बड़ी छूट और आकर्षक डील। साथ ही हमारे विद्वान ज्योतिषियों से पाएं आकर्षक रेट पर अपनी समस्याओं का समाधान। अभी क्लिक करें नीचे दिये बैनर पर।

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ऐसे में आइये जानते हैं कि सावन का पवित्र महीना कब से शुरू हो रहा है, क्या है इसका महत्व और सभी सोमवार व्रत की तिथियां क्या हैं। इसके अलावा हम आपको इस लेख में सावन में होने वाले सभी ग्रह के गोचर और उनका देश पर क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है, इस बात की भी जानकारी देने वाले हैं। 

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आइये सबसे पहले सावन का महत्व आपको बता देते हैं।

सावन महीने का महत्व

सावन का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष है क्योंकि यह महीना भगवान शिव को भी बेहद प्रिय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन के महीने में माता पार्वती ने निराहार रहकर भगवान शिव को पति रूप में पाने का कठोर व्रत किया था। यह भी एक वजह है कि भगवान शिव को सावन का महीना बेहद प्रिय है। इस महीने देश भर में सनातन धर्म के अनुयायी भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में जल अर्पित करते हैं। सावन में पड़ने वाले सोमवार में रुद्राभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है। 

यह पूरा महीना ही भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। महिलाएं इस दौरान अपने पति के लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस पूरे महीने कांवड़िए काँवड़ लेकर चलते हैं और भगवान शिव पर गंगाजल अर्पित करते हैं। पूरे देश की सड़कें इस महीने भगवा रंग से सराबोर हो जाती हैं। 

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ऐसे में आइये अब आपके साथ काँवड़ यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी साझा कर देते हैं।

साल 2021 में काँवड़ यात्रा होगी या नहीं

प्रत्येक साल सावन महीने में काँवड़ यात्रा निकालने की परंपरा रही है। इसलिए ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है कि बात सावन महीने की हो और कांवड़ का ज़िक्र ना आये। सावन के महीने में शिव की भक्ति में डूबे उनके भक्तों द्वारा कांवड़ यात्रा शुरू कर दी जाती है। इस दौरान तीर्थस्थालों से कांवड़िये गंगाजल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करने के बाद शिव मंदिरों में उस गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। हालाँकि इस वर्ष क्योंकि देश पहले से ही एक गंभीर वैश्विक महामारी से ग्रस्त है, ऐसे में भीड़भाड़ में इस बीमारी में बढ़ने की आशंका के चलते कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गयी है। 

कांवड़ यात्रा से जुड़ी पौराणिक कथा 

बहुत कम ही लोग जानते हैं कि हर वर्ष भव्य पैमाने पर निकलने वाली इस कांवड़ यात्रा से जुड़ी भी एक बेहद प्रचलित कथा है, जिसके अनुसार बताया जाता है कि, जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब, इस मंथन से चौदह रत्न प्राप्त हुए थे। लेकिन इन्हीं चौदह रत्नों में से एक था हलाहल विष। 

कहा जाता है कि यह विष इतना जहरीला था कि इस से पूरी सृष्टि को खतरा था। ऐसे में सृष्टि को इस विष के प्रकोप से बचाने के लिए भगवान शिव ने इस विष को पी लिया। हालाँकि उन्होंने इस विष को अपने गले से नीचे नहीं जाने दिया।

विष इतना जहरीला था कि इससे भगवान शिव का कंठ ही नीला पड़ गया। इसी वजह से भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ भी पड़ गया। तब भगवान महादेव का परम भक्त रावण, काँवर में गंगाजल लेकर आया और उसी जल से उसनें शिवलिंग का अभिषेक किया। जिसके बाद ही भोलेनाथ को इस विष से मुक्ति मिली। तभी से कांवरिये मीलों पैदल चलकर गंगाजल लाते हैं और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं।

आइये अब जानते हैं कि सावन में पड़ने वाले सोमवार की तिथि क्या है।

सावन के सोमवार की तिथि

सावन का महीना इस साल यानी कि साल 2021 में 25 जुलाई से शुरू हो रहा है और 22 अगस्त को इस पवित्र महीने का समापन होगा। इस दौरान कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

पहला सोमवार व्रत  : 26 जुलाई, 2021

दूसरा सोमवार व्रत : 02 अगस्त, 2021

तीसरा सोमवार व्रत : 09 अगस्त, 2021

चौथा सोमवार व्रत : 16 अगस्त, 2021

आइये अब आपको बता देते हैं कि सावन महीने में भगवान शिव की पूजा करने की विधि क्या है।

सावन में ऐसे करें पूजा

सावन के महीने में सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करके साफ व सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव को शुद्ध जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से स्नान कराएं। भगवान को स्नान करवाते वक्त मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि अर्पित करें। शिव चालीसा का पाठ करें और शिव आरती करें। महिलाएं इस दिन माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। इससे उनके पति की आयु लंबी होगी और घर में सौभाग्य की वृद्धि होगी।

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आइये अब आपको बता देते हैं कि सावन महीने का ज्योतिषीय महत्व क्या है।

क्या है सावन का ज्योतिष महत्व? 

ज्योतिष के अनुसार, श्रावण मास के प्रारंभ में सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करता है। सूर्य का यह गोचर सभी 12 राशियों को प्रभावित करता है और इसलिए सावन के महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व माना गया है।

आइये अब जानते हैं कि सावन के महीने में किन-किन ग्रहों का गोचर होने वाला है।

सावन महीने में होने वाले ग्रह गोचर

सावन के महीने में इस साल यानी कि साल 2021 में कुल चार महत्वपूर्ण गोचर होने जा रहे हैं। आइये इन सभी गोचर की घटनाओं पर एक नजर डाल लेते हैं।

पहला गोचर : बुध का कर्क राशि में गोचर

सावन महीने के पहले ही दिन यानी कि 25 जुलाई को बुध ग्रह अपना स्थान परिवर्तन करने वाला है। 25 जुलाई 2021 को रविवार की सुबह 11 बजकर 31 मिनट पर बुध ग्रह चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि कर्क में गोचर कर जाएगा। बुध कर्क राशि में 09 अगस्त 2021 को सोमवार की सुबह 01 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है। इसके बाद यह सूर्य के स्वामित्व वाली राशि सिंह में गोचर कर जाएगा।

दूसरा गोचर : बुध का सिंह राशि में गोचर

सावन महीने का दूसरा गोचर भी बुध ग्रह का ही होने वाला है। 09 अगस्त 2021 को सोमवार की सुबह 01 बजकर 23 मिनट पर बुध चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि कर्क को छोड़ कर सूर्य के स्वामित्व वाली राशि सिंह में प्रवेश कर जाएगा। बुध की सिंह राशि में यह स्थिति 26 अगस्त 2021 को बृहस्पतिवार की सुबह 11 बजकर 08 मिनट तक रहने वाली है। इसके बाद बुध अपनी स्वराशि कन्या में गोचर कर जाएंगे।

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तीसरा गोचर : शुक्र का कन्या राशि में गोचर

सावन महीने का तीसरा गोचर शुक्र ग्रह का होने जा रहा है। भौतिक सुखों के दाता शुक्र इस समय सिंह राशि में स्थित हैं। 11 अगस्त 2021 को बुधवार की सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर शुक्र बुध के स्वामित्व वाली राशि कन्या में गोचर कर जाएगा। शुक्र कन्या राशि में 06 सितंबर 2021 को सोमवार की देर रात 12 बजकर 39 मिनट तक स्थित रहने वाला है। इसके बाद यह अपनी स्वराशि तुला में गोचर कर जाएगा।

चौथा गोचर : सूर्य का सिंह राशि में गोचर

सावन महीने का चौथा गोचर सूर्य का होने जा रहा है। ग्रहों के राजा सूर्य 17 अगस्त 2021 को मंगलवार की देर रात 01 बजकर 05 मिनट पर कर्क राशि से सिंह राशि में प्रवेश कर जाएगा। सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में 17 सितंबर 2021 को शुक्रवार की देर रात 01 बजकर 02 मिनट तक रहने वाला है। इसके बाद यह बुध के स्वामित्व वाली राशि कन्या में गोचर कर जाएगा।

आइये अब आपको बता देते हैं कि इन सभी गोचर से देश-दुनिया पर सावन के महीने में क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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सावन महीने में देश दुनिया पर ग्रह गोचर का असर

सावन का महीना आर्थिक लिहाज से देश-दुनिया के लिए अनुकूल रहने की संभावना है। इस दौरान शेयर मार्केट में तेजी रहने की संभावना है और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होने की पूरी संभावना है। हालांकि शुक्र ग्रह का कन्या राशि में गोचर होने की वजह से यह समय महिलाओं के लिए कष्टकारी रहने की आशंका है।

मौसम के लिहाज से इस पूरे महीने उठापटक की स्थिति रह सकती है। देश के कई हिस्सों में अत्यधिक वर्षा से इलाके जलमग्न हो सकते हैं और कई इलाकों में बारिश की कमी से लोग परेशान रह सकते हैं। उत्तर भारत के इलाके में इस महीने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम ही है।

राजनीति के लिहाज से यह महीना सत्ताधारी पार्टी के लिए चिंता का सबब बन सकती है। इस अवधि में विपक्ष कुछ मुद्दों के साथ जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करता हुआ दिख सकता है जिसकी वजह से हालिया सरकार दबाव में आती दिख सकती है। हालांकि सूर्य के सिंह राशि में गोचर करने के बाद इस स्थिति में बदलाव होने की पूरी संभावना है। इस दौरान मौजूदा सरकार कुछ ठोस कदम उठा सकती है जिसका उसे फायदा मिलेगा और जनता के बीच उसकी पकड़ एक बार फिर मजबूत होने की संभावना है। देश की राजनीति में गृह मंत्रालय का प्रभाव देखने को मिल सकता है। 

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वहीं देश भर में इस महीने धार्मिक क्रियाकलापों में वृद्धि होने की संभावना है। जगह-जगह धार्मिक आयोजनों से पूरा देश भक्ति के माहौल से सराबोर रह सकता है। वहीं सरकार की तरफ से शिक्षा के क्षेत्र में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ नई घोषणाएं हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक मंचों पर भारत का बोलबाला रहेगा। कई देशों से भारत के संबंध सुधरते हुए दिख सकते हैं।

आइये अब जान लेते हैं कि सावन के महीने ग्रहों के गोचर से में कौन से विशेष योग बन रहे हैं।

सावन में बन रहा है यह विशेष योग

चूंकि 09 अगस्त 2021 को बुध का गोचर सिंह राशि में होने जा रहा है और सूर्य भी 17 अगस्त 2021 को सिंह राशि में गोचर कर जाएगा, इसकी वजह से 17 अगस्त 2021 से लेकर 26 अगस्त 2021 तक सिंह राशि में बुधादित्य योग बनेगा जो कि एक बेहद ही शुभ योग माना जाता है।

ये राशियां होंगी विशेष रूप से प्रभावित

सावन के महीने में बुध, शुक्र और सूर्य के गोचरों को मिलाकर कुल चार गोचर होने जा रहे हैं। इस पूरे महीने इन गोचर की घटनाओं की वजह से कर्क राशि, सिंह राशि और कन्या राशि के जातकों के विशेष रूप से प्रभावित होने की संभावना है।

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