संतान प्राप्ति की है चाह तो नवरात्रि के पांचवें दिन इस विधि से करें मां स्कंदमाता की पूजा – हर मनोकामना होगी पूरी!

नवरात्रि विशेष इस अंक में एक बार फिर हम आपके सामने हाजिर हैं लेकर नवरात्रि के पांचवें दिन से जुड़ी हर छोटी बड़ी और महत्वपूर्ण बातें। इस ब्लॉग में हम जानेंगे नवरात्रि के पांचवें दिन किस देवी की पूजा की जाती है और क्या है देवी की पूजा करने की सही विधि। 

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इसके अलावा नवरात्रि के पांचवें दिन आप कौन सी वस्तु का भोग लगा सकते हैं, कौन से रंग के वस्त्र पहन की पूजा कर सकते हैं, क्या कुछ उपाय करके अपने जीवन में सुख शांति प्राप्त कर सकते हैं, और नवरात्रि के पांचवें दिन किस ग्रह को किस विधि से मजबूत किया जा सकता है इस बात की जानकारी भी आपको इस ब्लॉग के माध्यम से हम प्रदान करेंगे। तो लिए बिना देरी किए शुरू करते हैं यह खास ब्लॉग और जानते हैं  नवरात्रि के पांचवें दिन से जुड़ी ढ़ेरों दिलचस्प जानकारियां। 

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शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन 

सबसे पहले बात करें पांचवें दिन की तो, नवरात्रि का पांचवा दिन माँ स्कन्दमाता को समर्पित होता है।  स्कंदमाता भगवान स्कंद की माता हैं और इन्हें बुद्धिमत्ता देने वाली देवी कहा जाता है। इसके अलावा कहा जाता है कि स्कंदमाता मोक्ष के द्वारा खोलने वाली देवी भी हैं। यह अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करती हैं। देवी की पूजा करने से भक्तों के जीवन में तमाम तरह की खुशियां आती हैं। इसके अलावा संतान प्राप्ति के लिए भी स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

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शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – पूजा शुभ मुहूर्त 

अब आगे बढ़े और बात करें माता की पूजा की सही विधि की तो, 

  • नवरात्रि के पांचवें दिन भी सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण कर लें। 
  • इसके बाद मंदिर या पूजा की जगह पर चौकी पर स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। 
  • इसे गंगाजल से शुद्ध करें। 
  • कलश में पानी लेकर इसमें कुछ सिक्के डालें और इसे चौकी पर रख दें। 
  • अब व्रत और पूजा का संकल्प ले लें और पूजा में माता को रोली, कुमकुम और नैवेद्य अर्पित करें। 
  • धूप दीप से माँ की आरती उतारें और पूजा प्रारंभ करें। 
  • आप दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। 
  • अंत में देवी मां की आरती करें और घर में मौजूद सभी लोगों को प्रसाद अवश्य वितरित करें।

शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – माँ का स्वरूप 

बात करें स्कंदमाता के स्वरूप की तो, देवी के सभी रूपों की तरह मां का स्कंदमाता स्वरूप भी मन को मोह लेने जितना सुंदर है। माता की चार भुजाएं हैं जिसमें से दो हाथों में देवी ने कमल धारण किए हुए हैं। स्कंदमाता देवी की गोद में भगवान स्कंद बाल रूप में बैठे हुए हैं। मां स्कंदमाता सिंह की सवारी करती हैं। शेर पर सवार होकर मां दुर्गा अपने पांचवें यानी स्कंदमाता स्वरूप में भक्त जनों के कल्याण के लिए हमेशा तैयार और तत्पर नजर आती हैं।

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स्कंदमाता के बारे में प्रचलित पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, एक समय में तारकासुर नामक राक्षस हुआ करता था जिसने देवताओं और मनुष्यों के जीवन में आतंक मचाया हुआ था। इसकी मृत्यु केवल शिवपुत्र से ही संभव थी। तब मां पार्वती ने अपने पुत्र भगवान स्कंद (जिनका एक नाम कार्तिकेय भी है) को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने के लिए स्कंदमाता का रूप धारण किया। उन्होंने भगवान स्कंद को युद्ध के लिए तैयार किया। कहा जाता है कि स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षण लेने के बाद भगवान स्कंद ने ही तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था।

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शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन महत्व 

  • स्कंदमाता देवी की पूजा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। ऐसे में जिन जातकों को अपने जीवन में संतान की चाह होती है लेकिन किन्हीं भी कारणवश उनकी यह मनोकामना पूरी नहीं हो पा रही होती है उन्हें देवी स्कंद माता की अर्थात नवरात्रि के पांचवें दिन देवी के स्वरूप की पूजा करने की सलाह दी जाती है। 
  • इसके अलावा सही विधि और पूरी निष्ठा से पूजा करने पर माँ स्कंदमाता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और भक्तों के जीवन में खुशियां लेकर आती हैं। 
  • साथ ही स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
  • स्कंदमाता को सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री देवी भी कहा जाता है। ऐसे में इनकी पूजा करने से जातकों के अंदर अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। 

शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – प्रिय भोग  

नवरात्रि के हर एक दिन का अलग निर्धारित भोग बताया गया है। ऐसे में अगर हम नवरात्रि के पांचवें दिन की बात करें तो स्कंदमाता को केला बहुत ही प्रिय होता है। इस दिन की पूजा में माँ स्कंदमाता को केले का भोग अवश्य लगाएँ। केले के साथ आप बताशे को भी माता रानी के भोग में शामिल कर सकते हैं। यह दोनों ही चीज़ें मां को बेहद ही प्रिय होती हैं और इससे मां की प्रसन्नता शीघ्र हासिल की जा सकती है। 

इसके अलावा बात करें माँ स्कंदमाता के प्रिया फूल की तो, इन्हें लाल रंग के फूल बेहद ही प्रिय होते हैं। ऐसे में आप चाहें तो नवरात्रि के पांचवें दिन की पूजा में माँ स्कंदमाता को गुड़हल या लाल गुलाब के फूल अर्पित कर सकते हैं। इससे आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।

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शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – शुभ रंग  

भोग की ही तरह प्रत्येक देवियों से संबन्धित अलग-अलग रंग भी निर्धारित किए गए हैं। इसमें अगर बात करें माँ स्कंदमाता के प्रिय रंग की तो आप इस दिन की पूजा में नीले रंग के वस्त्र पहन कर पूजा कर सकते हैं। माँ स्कंदमाता को नीला रंग बेहद पसंद होता है। ऐसे में इस रंग के वस्त्र पहनकर आप माता की प्रसन्नता हासिल कर सकते हैं। साथ ही इस छोटे से उपाय को करने से आपको निरोगी काया का आशीर्वाद भी प्राप्त हो सकता है।

शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – इस दिन के अचूक उपाय

  • जिन भी जातकों को अपने जीवन में संतान प्राप्ति की चाह हो उन्हें नवरात्रि के पांचवें दिन एक चुनरी में नारियल लपेटने की सलाह दी जाती है। इसके बाद “नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भ सम्भवा. ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी” इस मंत्र का स्पष्ट उच्चारण पूर्वक जाप करते हुए यह नारियल और चुनरी स्कंदमाता के चरणों में अर्पित कर दें। 
  • पूजा के बाद इसे अपने शयनकक्ष में सिरहाने पर रख लें। कहा जाता है इस छोटे से अचूक उपाय को करने से मां स्कंदमाता भक्तों की झोली संतान की किलकारी से अवश्य भर देती हैं। 
  • इसके अलावा अगर आपके परिवार में किसी इंसान के विवाह में रुकावटें आ रही हैं तो नवरात्रि के पांचवें दिन 36 लॉन्ग और छह कपूर ले लें। इसमें हल्दी और चावल मिलाकर मां दुर्गा को आहुति दें। इसे करने से जल्द ही विवाह के संदर्भ में आ रही सभी रुकावटें दूर होगी। 
  • अगर आपका व्यवसाय ठीक से नहीं चल रहा है तो नवरात्रि के पांचवें दिन लौंग और कपूर में अमलतास के फूल या कोई भी पीला फूल मिला लें और फिर मां दुर्गा को आहुति दें। ऐसा करने से आपका व्यापार तरक्की करने लगेगा। 
  • स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां है तो इस दिन 152 लौंग और 42 कपूर के टुकड़े ले लें। इसमें नारियल की गिरी, शहद, और मिश्री मिला लें और इससे हवन करें। ऐसा करने से स्वास्थ्य संबंधित सभी परेशानियां दूर होगी।
  • अगर आपके काम में किसी तरह की बाधा आ रही है या रुकावटें आ रही है तो नवरात्रि के पांचवें दिन पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी अपने घर में ले आयें। इस मिट्टी पर दूध, दही, घी, अक्षत, रोली, चढ़ाएँ और इसके आगे दिया जलाएं। अगले दिन मिट्टी को वापस पेड़ के नीचे डाल दें। ऐसा करने से आपके जीवन से सभी रुकावटें और बाधाएँ निश्चित ही दूर होगी।

शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – स्कंद माता का मंत्र 

सिंहासनगता नित्यं,पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी,स्कंदमाता यशस्विनी।।

जिसका अर्थ हुआ कि, सिंह की सवारी करने वाली मां और अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करने वाली यशस्विनी स्कंदमाता आप हमारे लिए शुभदायी हो।

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

शारदीय नवरात्रि पाँचवाँ दिन – आज इस ग्रह को करें मजबूत 

अंत में बात करें नवरात्रि के पांचवें दिन के ग्रह से संबंध के बारे में तो, कहा जाता है कि नवरात्रि का पांचवा दिन बुध ग्रह से जुड़ा हुआ होता है। ऐसे में यदि आपके जीवन में बुध ग्रह से संबंधित दोष हैं, आपकी कुंडली में बुध ग्रह पीड़ित अवस्था में है, या आपको उसके सकारात्मक परिणाम नहीं प्राप्त हो रहे हैं, और इससे कारोबार और करियर में असफलता और निराशा प्राप्त हो रही है तो आपको नवरात्रि के पांचवें दिन विधिवत रूप से माँ स्कन्द माता की पूजा करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, इससे जुड़े दोष दूर होते हैं और करियर और कारोबार में तरक्की और सफलता मिलती है। साथ ही आपके जीवन में सभी मनोकामनाएं भी पूरी होने लगती हैं।

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