23 मई को शनि देव होंगे मकर राशि में वक्री, जानें इसका महत्व, प्रभाव और उपाय

ज्योतिष शास्त्र में शनि को उसकी धीमी गति के लिए जाना जाता है। शनि को शक्ति व अनुशासन रखने वाले ग्रह के तौर पर भी जाना जाता है। शनि तीनों लोकों के न्यायाधीश हैं और सम्पूर्ण जगत को उसके कर्म के अनुसार फल देने में विश्वास रखते हैं। मकर व कुंभ राशि के स्वामी शनि तुला राशि में उच्च के माने जाते हैं और मेष राशि में नीच हो जाते हैं। 

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जिस जातक की कुंडली में शनि नीच स्थान पर स्थित हो तो सामान्य स्थिति में ऐसे जातकों को जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक व शारीरिक समस्याएं जीवन को नर्क समान बना देती हैं। ऐसे में आपको समझ आ गया होगा कि ज्योतिष शास्त्र में शनि का क्या महत्व है। अब यही शनि देवता 23 मई को मकर राशि में वक्री होने जा रहे हैं। 

ऐसे में आज हम आपको इस लेख में यह बताएंगे कि शनि अगर वक्री हो तो उसका क्या प्रभाव पड़ता है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए क्या ज्योतिषीय उपाय अपनाए जा सकते हैं।

कब वक्री हो रहा है शनि?

शनि देवता फिलहाल मकर राशि में गोचर कर रहे हैं। 23 मई 2021 को रविवार के दिन सुबह 09 बजकर 15 मिनट पर शनि देवता सूर्य देवता से 120 डिग्री दूर हो जाएंगे। इसी के साथ शनि देवता की वक्री चाल प्रारंभ हो जाएगी। इसके बाद फिर 11 अक्टूबर 2021 को सोमवार के दिन जब सूर्य देवता कन्या राशि में मौजूद होंगे तब वे मकर राशि में मौजूद शनि देवता के 120 डिग्री करीब आ जाएंगे। इसी के साथ शनि देवता दोबारा मकर राशि में मार्गी हो जाएंगे।

क्या होता है वक्री होना?

वक्री होना, ज्योतिष शास्त्र की एक विशेष घटना है जिसमें कोई भी ग्रह आगे न चलते हुए पीछे चलता हुआ प्रतीत होता है। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि असल में वह ग्रह पीछे की ओर नहीं चलता बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह पीछे की ओर चल रहा है।

शनि वक्री का प्रभाव

शनि ग्रह की गति सभी नौ ग्रहों के बीच सबसे धीमी है। यह ग्रह अपने गोचर अवधि का 36 प्रतिशत समय वक्री होने में गुजार देता है। शनि जब वक्री होता है तो इसका विशेष प्रभाव उन पर पड़ता है जिनकी कुंडली में शनि की ढैया या फिर शनि की साढ़े साती चल रही होती है। शनि की दृष्टि इस दौरान काफी तीव्र व तीक्ष्ण हो जाती है। वैसे जातक जिनकी कुंडली में शनि अशुभ स्थान पर बैठा हो उन्हें इस दौरान मानसिक, शारीरिक व आर्थिक तौर पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

क्या है शनि वक्री के प्रभावों से बचने का उपाय?

पहला उपाय : शनि देवता का दिन शनिवार को माना गया है। इस दिन काले वस्त्र धारण करें। आसपास कहीं शनि देवता का मंदिर हो तो शनिवार के दिन शनि देवता के दर्शन करें और सरसों तेल से उनका अभिषेक करें। इससे शनि देवता बहुत ही प्रसन्न होते हैं।

दूसरा उपाय : हनुमान जी की पूजा से शनि देवता शांत होते हैं। ऐसे में मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी की पूजा करें और साथ ही रामायण के सुंदरकांड का पाठ करें। इससे शनि देवता का प्रभाव जातकों पर कम होता है।

तीसरा उपाय : शनि देवता जातकों को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ऐसे में शनिवार के दिन काले उड़द की दाल, काला कपड़ा या फिर सरसों का तेल दान करें। शनिवार के दिन काले कुत्ते या कौवे को रोटी खिलाएं। किसी लंगड़े जरूरतमंद को दान करने से भी आप पर शनि देवता की शुभ दृष्टि पड़ेगी।

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चौथा उपाय : प्रतिदिन भगवान शिव को आक का पत्ता अर्पित करें। इसके साथ ही भगवान शिव का गाय के दूध में काला तिल मिलाकर अभिषेक करें। अगर यह शिवलिंग किसी पीपल पेड़ के नीचे मौजूद हो तो और भी शुभ फल प्राप्त होता है। शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।

पांचवा उपाय : “ॐ शं शनैश्चराय नमः” और “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्रों का जाप करें। माँ काली के पूजा से भी शनि देवता शांत होते हैं।

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