शनि प्रदोष व्रत से शनि देवता और भगवान शिव होते हैं प्रसन्न, देते हैं आर्शीवाद

इस दिन भगवान शिव और शनि देव की पूजा का विधान बताया गया है। शनिवार को आने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष या शनि त्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। शनिवार को भगवान शिव का दिन माना गया है ऐसे में इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष शनि त्रयोदशी या शनि प्रदोष व्रत 12 दिसंबर शनिवार को पड़ रहा है।

इस व्रत के बारे में लोगों के बीच काफी मान्यता है क्योंकि साल में यह दिन केवल तीन या चार बार ही आता है जब शनिवार को प्रदोष व्रत पड़ता है। इस दिन के बारे में ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन जो कोई भी इंसान भगवान शिव और शनि देव की पूरी सच्ची निष्ठा से पूजा करता है और व्रत रखता है उस इंसान की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं और उसके सभी पाप भी खत्म हो जाते हैं। 

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जाने प्रदोष व्रत या शनि त्रयोदशी की पूजा विधि 

  • इस दिन सुबह ब्रह्मा मुहूर्त में उठना चाहिए। जिसके बाद स्नान आदि करके भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। 
  • इस दिन भगवान शिव का पूजन अवश्य करें। 
  • प्रदोष व्रत में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। 
  • सुबह भगवान शिव को बेल-पत्र, गंगा-जल, अक्षत, धूप, दीप, अर्पित करें। 
  • शाम के समय दोबारा स्नान करें। सफेद कपड़े पहने और शिव जी का पूजन करें।
  • इस दिन कथा भी अवश्य कहें या सुनें। ऐसा करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। 
  • इसके बाद आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें। 

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शनि त्रयोदशी 

शनि देव भगवान शिव को अपना गुरु मानते हैं इसलिए मान्यता है कि, जो कोई भी इंसान भगवान शिव की पूजा करता है उन पर शनि-देव कभी भी खुद को कुदृष्टि नहीं डालते हैं। शनि त्रयोदशी का दिन शनि से संबंधित दोष दूर करने के लिए अति उत्तम माना गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के बाद शनि देव को तेल अवश्य चढ़ाएं। 

शनि त्रयोदशी का व्रत करने से शनि के प्रकोप, शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव अवश्य कम हो जाता है। इस दिन दशरथकृत शनि स्त्रोत का पाठ करने से इंसान के जीवन में शनि की को दृष्टि से होने वाले दुष्प्रभाव से भी बचा जा सकता है। इसके अलावा इस दिन शनि चालीसा और शिव चालीसा का भी पाठ करना चाहिए। 

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

वैसे तो प्रत्येक मास की दोनों त्रयोदशी के व्रत पुण्य को काफी फलदायी माना गया है लेकिन भगवान शिव के भक्त शनि देव के दिन त्रयोदशी का व्रत समस्त दोषों से मुक्ति देने वाला माना जाता है। इस व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि संतान प्राप्ति की कामना के लिये शनि त्रयोदशी का व्रत विशेष रूप से सौभाग्यशाली माना जाता है। इसके अलावा इस व्रत को रखने से इंसान के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की भी प्राप्ति होती है।

शनि प्रदोष के दिन/शनि त्रयोदशी के दिन अवश्य करे ये काम  

इस दिन शाम के समय जब सूर्य अस्त हो और रात की शुरुआत हो उस समय को प्रदोष काल कहते हैं। प्रदोष काल में शिव जी साक्षात शिवलिंग में प्रकट होते हैं इसलिए इस समय भगवान शिव जी का स्मरण करें और उनका पूजन करें। कहा जाता है ऐसा करने से इंसान को उत्तम फल मिलता है। प्रदोष व्रत से चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से भी इंसान को मुक्ति मिलती है। ऐसे में शनि प्रदोष के दिन विधि अनुसार पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद शनि देव का पूजन भी अवश्य करना चाहिए।

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शनि प्रदोष व्रत कथा 

एक बार एक ब्राह्मण का परिवार रहता था जो बेहद ही गरीबी में अपने दिन गुजार रहा था। एक दिन ब्राह्मण की पत्नी अपने दोनों पुत्रों को लेकर शांडिल्य मुनि के आश्रम में गई। वहां पहुँचकर ब्राह्मण की पत्नी ने अपने जीवन का सारा हाल ऋषि को बता दिया। अंत में उन्होंने कहा कि, ‘हे मुनिवर! मैं और मेरा परिवार बहुत ही गरीबी में कष्ट के साथ अपने दिन गुजार रहे हैं। मेरा बड़ा पुत्र वास्तव में एक राज पुत्र है जो राजपाट छिन जाने के बाद मेरे पास ही रहा है इसका नाम धर्म है, और छोटे पुत्र का नाम शुचीव्रत है। कृपया करके हमें कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे हमारा यह कष्ट दूर हो सके।’ 

मुनि ने ब्राह्मण की पत्नी की सारी बात सुनी और उन्हें शनि प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी। मुनि ने उन्हें व्रत विधि और कथा के बारे में भी बताया। इतना सुनकर ब्राह्मण की पत्नी वापस अपने घर चली गई कुछ दिनों बाद उन्होंने व्रत करना शुरू किया। व्रत करने के कुछ ही दिन बाद की बात है कि उनके छोटे बेटे को एक सोने के सिक्कों से भरा हुआ कलश मिला। इसके अलावा कुछ ही दिनों में बड़े बेटे को मुलाकात एक गंधर्व कन्या से हुई। दोनों एक दूसरे पर मोहित हो गए। 

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कन्या ने बताया कि वह विद्रविक नाम के गंधर्व की पुत्री है और उसका नाम अंशुमति है। कुछ समय बाद अंशुमति और बड़े बेटे का विवाह हो गया और राजकुमार धर्म ने राजपाट संभालने में विद्रविक की सहायता करनी शुरू कर दी। बताया जाता है तभी से इस वक्त की शुरुआत हुई।

जानने वाली बात: प्रदोष व्रत में दिन के अनुसार मिलता है फल, जानें शनि प्रदोष का महत्व और इस दिन मिलने वाले फल के बारे में।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदोष का व्रत दिन के अनुसार निर्धारित होता है। 

  • सोम प्रदोष व्रत से इंसान की अभीष्ट कामनाएं पूरी होती हैं। 
  • मंगल प्रदोष व्रत से किसी भी तरह के रोग से मुक्ति मिलती है।  
  • ठीक इसी तरह शुक्र प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। 

लेकिन इन सभी व्रतों में शनि प्रदोष व्रत का काफी महत्व बताया गया है। इस व्रत से संतान सुख में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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