कोरोना संकट के बीच जानें सितम्बर का यह महीना क्या कुछ लेकर आएगा

सितंबर 2020 पर एक नज़र 

साल 2020 हाथ में थामी गयी रेत की तरह फिसलता हुआ नज़र आ रहा है। यह साल का नौवां महीना शुरू होने वाला है और अभी तक कोरोना के डर से हम सभी अपने घरों में रहने को मजबूर हैं। हर एक इंसान की जिंदगी सामान्य पटरी से उतर चुकी है। डर, भय, और अनिश्चितताओं से भरा यह साल 2020 सामान्य साल की तुलना में कुछ अधिक ही लंबा प्रतीत होने लगा है।

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ऐसे में मौजूदा हालात के चलते सभी के मन में ढेरों सवाल हैं, चिंताएं हैं और परेशानियाँ हैं, जिनके जवाब हम सभी ढूंढना चाहते हैं। ऐसे में अगर आप भी अपने मन में उठे किसी भी सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो अभी यहां क्लिक करें और हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषियों से परामर्श पाएं। 

इस साल की शुरुआत से ही पूरा देश या यूँ कहिये पूरा विश्व कोरोना महामारी की मार झेल रहा है। लोग अपनी नौकरियाँ खो रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ना जाने कितने लोग मौत के मुंह में समा जा रहे हैं। हालाँकि धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन इतना काफी तो नहीं है ना? यहाँ यह भी कहना गलत नहीं होगा कि, आज के इस समय में हम सभी ने इस बदले प्रारूप में रहना स्वीकार कर लिया है। 

समय बिलकुल अनुकूल नहीं है, लेकिन अंग्रेजी की एक कहावत है, “THE SHOW MUST GO ON” इसी कहावत के तर्ज पर आइये इस बात की कामना के साथ आगे बढ़ते हैं, कि इस महीने कोई अच्छी खबर अवश्य आएगी। ऐसे में एक नज़र डालते हैं कि सितम्बर 2020 का महीना हमारे लिए क्या कुछ लेकर आने वाला है? 

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इस आर्टिकल में जानें, सितंबर में जन्मे लोगों की कुछ विशेषताएँ, साथ ही इस महीने में आने वाले व्रत-त्यौहार और ग्रहण-गोचर की संपूर्ण जानकारी। साथ ही सितंबर के महीने से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण भविष्यवाणी भी आपको यहाँ मिलेगी।

जानकारी: यह सितम्बर अपने आप में बेहद ही ख़ास और यह आपके जीवन में दोबारा शायद ही आये। ऐसा क्यों? आइये हम आपको बताते हैं, इस सितंबर वर्ष में चार रविवार, चार सोमवार, चार मंगलवार , चार बुधवार, चार गुरुवार, चार शुक्रवार, और चार शनिवार हैं। 

सितम्बर में जन्मे लोगों के बारे में कुछ ख़ास बातें

सितम्बर में जन्मे लोगों का व्यक्तित्व :  सितंबर के महीने में जन्मे लोग बेहद ही उदार स्वभाव के होते हैं। खुद से पहले दूसरों को रखना इनकी विशेषता होती है। कुछ भी नया सीखने-समझने में बेहद लालायित सितंबर में जन्मे लोग एक बार जो ठान लेते हैं उसे कर के ही छोड़ते हैं। हालाँकि इनका गुस्सा भी जगजाहिर होता है। सितंबर माह में जन्मे लोग बेहतरीन सिंगर,राइटर ,एडिटर ,साइंटिस्ट होते हैं।

सितम्बर में जन्मे लोगों का रोमांस :  प्यार और रोमांस के बारे में इस महीने जन्मे लोग काफी पैशनेट होते हैं। इन्हें अपने पार्टनर से कोई भी बात छुपाना बेहद नागवार लगता है। हालाँकि सितम्बर में पैदा होने वाले लोग थोड़े तानाशाह स्वभाव के होते हैं और उनका यह स्वभाव उनके प्रेम संबंध पर भी असर डाल सकता है।

सितम्बर में जन्मे लोगों का करियर : सितंबर में जन्मे लोग जब भी कोई काम अपने हाथों में लेते हैं, तो उसे पूरे परफेक्शन के साथ ख़त्म करते हैं। वे बहुत ही मेहनती होते हैं, शांत और रचनात्मक होते हैं। हालाँकि कभी-कभी इन्हें ऐसा भी लग सकता है कि यह जो भी काम कर रहे हैं उसपर इन्हें तारीफ मिलनी चाहिए, जो की इनके करियर पर थोड़ा नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। 

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सितम्बर में जन्मे लोगों का आर्थिक पक्ष : सितम्बर में पैदा होने वाले लोग, काफी वैभवशाली होते हैं। ऐसे लोग कार्यक्षेत्र पर उच्च पदों पर आसीन होते हैं और एशो-आराम की ज़िंदगी जीते हैं। धार्मिक धारणा वाले सितम्बर में पैदा हुए लोग, हमेशा ज़रूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर नज़र आते हैं। 

सितम्बर में जन्मे लोगों का स्वास्थ्य : सितम्बर में जन्मे लोग सामान्य कद-काठी के होते हैं। अपनी शर्तों पर जीवन जीने वाले इस महीने पैदा हुए लोगों को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।  बुजुर्ग अवस्था में गठिया और चर्म रोग के शिकार होने की आशंका बनी रहती है।

सितम्बर में जन्मे लोगों का समाज में मान-सम्मान :  सुलझे स्वभाव के सितम्बर में पैदा हुए लोगों को समाज में भी ख़ासी पद-प्रतिष्ठा हासिल होती है। हालाँकि समाज में अपनी पद-प्रतिष्ठा बरक़रार रखने के लिए इन्हें अपने गुस्से पर काबू रखने की सलाह दी जाती है।

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सितंबर में आने वाले व्रत/त्यौहार-गोचर-ग्रहण की संपूर्ण जानकारी 

1 सितम्बर- मंगलवार : अनंत चतुर्दशी – गणेश विसर्जन – भाद्रपद पूर्णिमा व्रत – पूर्णिमा श्राद्ध 

अनंत चतुर्दशी : प्रत्येक वर्ष में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विधान निर्धारित किया गया है। इस दिन को कहीं अनंत चतुर्दशी तो कई जगहों पर इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है।

गणेश विसर्जन : गणेश चतुर्थी का पर्व दस दिनों तक चलता है, दसवें दिन अनंत चतुर्दशी/ गणेश विसर्जन के साथ इस पर्व की समाप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी के विसर्जन के बाद इस दस दिवसीय त्यौहार का अंत होता है।

2 सितम्बर- बुधवार : भाद्रपद पूर्णिमा – पितृपक्ष प्रारंभ 

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत : भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के सत्य-नारायण रूप की पूजा की जाती है, साथ ही इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है। (इस दिन के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)

पितृपक्ष प्रारंभ : हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार यूँ तो हर माह की अमावस्या तिथि को श्राद्ध किया जा सकता है लेकिन, भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर अश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध करने और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए निर्धारित किया गया है। इस समय लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं जिससे हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

3 सितम्बर- गुरुवार : अश्विन प्रारम्भ – द्वितीय श्राद्ध 

जानकारी : नाना नानी का श्राद्ध अश्विन की प्रतिपदा तिथि को करना चाहिए। 

5 सितम्बर- शनिवार : तृतीय श्राद्ध – विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी – शिक्षक दिवस 

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी : संकष्टी चतुर्थी के दिन जो कोई भी इंसान भगवान गणपति की पूरे विधि विधान के साथ पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणपति का पूजन करके इंसान विशेष वरदान को बेहद ही आसानी से पा सकता है।
(इस साल की सभी संकष्टी चतुर्थी की सूची देखने के लिए यहाँ क्लिक करें)

शिक्षक दिवस : प्रतिवर्ष 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था।

6 सितम्बर- रविवार : चतुर्थी श्राद्ध 

7 सितम्बर- सोमवार : महा-भरणी – पंचमी श्राद्ध 

जानकारी : अविवाहित जातकों का श्राद्ध पंचमी तिथि को करना चाहिए। 

8 सितम्बर- मंगलवार : मासिक कर्तिगाई – षष्ठी श्राद्ध 

मासिक कार्तिगाई : मासिक कार्तिगाई दीपम तमिल हिंदुओं के बीच मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है। तमिल हिंदुओं द्वारा मनाए जाने वाला यह त्यौहार सबसे पुराने त्योहारों में से एक माना जाता है।

9 सितम्बर- बुधवार : सप्तमी श्राद्ध 

10 सितम्बर- गुरुवार : कालाष्टमी – अष्टमी श्राद्ध – जीवित्पुत्रिका व्रत – महालक्ष्मी व्रत – रोहिणी व्रत 

कालाष्टमी : कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के विग्रह रूप काल भैरव की पूजा का विधान बताया गया है। कालाष्टमी का व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है।

जीवित्पुत्रिका व्रत : संतान की दीर्घायु के लिए रखे जाने वाले कई व्रतों में से एक व्रत है जीवित्पुत्रिका व्रत जिसे जिउतिया व्रत भी कहते हैं। संतान की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाला यह व्रत निर्जला रखा जाता है। 

रोहिणी व्रत : रोहिणी व्रत पत्नियाँ अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। इस व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी इंसान इस व्रत को रखता है माँ रोहिणी उस साधक के घर से कंगाली, गरीबी, और दुःख को दूर भगाकर उनके घर में सुख और समृद्धि की वर्षा करती हैं। 

11 सितम्बर- शुक्रवार : नवमी श्राद्ध 

जानकारी : विवाहित स्त्रियों का श्राद्ध नवमी तिथि को करना चाहिए। नवमी तिथि को माता के श्राद्ध के लिए भी शुभ माना जाता है। 

12 सितम्बर- शनिवार : दशमी श्राद्ध 

13 सितम्बर- रविवार : इंदिरा एकादशी – एकादशी श्राद्ध 

इंदिरा एकादशी : आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन इंदिरा एकादशी मनाई जाती है। वैसे तो सभी एकादशी ख़ास होती है लेकिन इस एकादशी की सबसे ख़ास बात यह है कि यह पितृपक्ष में आती है जिस के चलते इस एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

14 सितम्बर- सोमवार : द्वादशी श्राद्ध – हिंदी दिवस

जानकारी : सन्यासी पितरों का श्राद्ध द्वादशी तिथि को किया जाता है। 

15 सितम्बर- मंगलवार : मघा श्राद्ध – प्रदोष व्रत – त्रयोदशी श्राद्ध – मासिक शिवरात्रि – अभियंता दिवस – विश्वेश्वरैया जयन्ती

प्रदोष व्रत : प्रदोष व्रत जिसे एक अत्यंत शुभ और बेहद ही फलदायी व्रत बताया गया है। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत का सीधा संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से जोड़कर देखा जाता है।

(मासिक शिवरात्रि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें)

16 सितम्बर- बुधवार : चतुर्दशी श्राद्ध – कन्या संक्रांति – विश्वकर्मा पूजा 

कन्या संक्रांति : सूर्य हर महीने अपना स्थान बदल कर एक राशि से दूसरे राशि में चला जाता है। सूर्य के हर महीने राशि परिवर्तन करने की प्रक्रिया को संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

विश्वकर्मा पूजा : भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है। यह दिन हिंदुओं के लिए बेहद ख़ास माना गया है।

जानकारी : जिन जातकों की अकाल मृत्यु हुई होती है उनका श्राद्ध चतुर्दशी को करना चाहिए।

17 सितम्बर-बृहस्पतिवार : आश्विन अमावस्या – दर्श अमावस्या – सर्वपित्रु अमावस्या 

आश्विन अमावस्या : हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या या अश्विन अमावस्या भी कहते हैं। इसी दिन श्राद्ध पक्ष का समापन होता है। यानी कि इसी दिन पितृ लोक से आए हुए हमारे पूर्वज वापस अपने लोक लौट जाते हैं।

दर्श अमावस्या : हिंदू शास्त्रों में दर्श अमावस्या का दिन बेहद ही शुभ माना जाता है। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन दर्श अमावस्या आती है। इस दिन पितरों को प्रसन्न करना बेहद ही आसान होता है इसीलिए इस अमावस्या का एक नाम श्राद्ध की अमावस्या भी होता है।

जानकारी : सर्वपितृ अमावस्या यानी अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन उन सभी लोगों का श्राद्ध किया जाना चाहिए जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात ना हो।

18 सितम्बर- शुक्रवार : इष्टि – अधिक चन्द्र दर्शन 

अधिक चंद्र दर्शन : चन्द्र दर्शन का यह ख़ास दिन भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे चंद्र दर्शन इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसे अमावस्या के बाद देखा जाता है।

20 सितम्बर- रविवार : अधिक विनायक चतुर्थी 

अधिक विनायक चतुर्थी : हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा किसी भी पूजा में सबसे पहले किये जाने का विधान बताया गया है। ऐसे में भगवान गणेश की खास पूजा के लिए विनायक चतुर्थी का व्रत समर्पित किया गया है। 

22 सितम्बर- मंगलवार : अधिक स्कंद षष्ठी 

अधिक स्कंद षष्ठी : हर महीने की शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन स्कंद षष्ठी व्रत रखा जाता है। मुख्य रूप से यह व्रत दक्षिण भारत के राज्यों में लोकप्रिय है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय जी की विधि-पूर्वक पूजा का विधान बताया गया है।

24 सितम्बर- गुरुवार : अधिक मासिक दुर्गाष्टमी 

अधिक मासिक दुर्गाष्टमी : हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान दुर्गाष्टमी का उपवास किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु दुर्गा माता की पूजा करते हैं और उनके लिए पूरे दिन का व्रत करते हैं।

27 सितम्बर-रविवार : पद्मिनी एकादशी 

पद्मिनी एकादशी : मलमास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का एक नाम कमला एकादशी या पुरुषोत्तम एकादशी भी होता है। 

29 सितम्बर- मंगलवार : अधिक प्रदोष व्रत 

अधिक प्रदोष व्रत : प्रदोष व्रत को एक अत्यंत शुभ और बेहद ही फलदायी व्रत बताया गया है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत का सीधा संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से होता है। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को ये व्रत मनाया जाता है। 

(इस साल के सभी प्रदोष व्रत की सूची आपको यहाँ मिलेगी)

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सितंबर में होने वाला गोचर 

अब नज़र डालते हैं सितंबर में होने वाले ग्रहों के गोचर की, बता दें कि ग्रहों के गोचर का सीधा प्रभाव हमारी ज़िंदगी पर पड़ता है। ऐसे में यह जानना बेहद ज़रूरी हो जाता है कि कौन सा गोचर किस दिन होने वाला है। सितम्बर के महीने में शुक्र, बुध, सूर्य, राहु-केतु का गोचर होने वाला है। 

  • शुक्र का कर्क राशि में गोचर – 1 सितंबर, 2020- मंगलवार :  सौंदर्य, कला और रचनात्मकता के कारक, शुक्र ग्रह 1 सितंबर को 02:02 बजे मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेगा, 28 सितंबर 1 बज-कर 1 मिनट तक शुक्र ग्रह इसी राशि में रहेगा और उसके बाद सिंह राशि में गोचर कर जाएगा। (इस गोचर की संपूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें)
  • बुध का कन्या राशि में गोचर – 2 सितंबर, 2020- बुधवार : बुध ग्रह 2 सितंबर, 12 बज-कर 3 मिनट पर सिंह से कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और 22 सितंबर को 16 बज-कर 55 मिनट पर तुला राशि में गोचर कर जाएंगे। (इस गोचर की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें)
  • सूर्य का कन्या राशि में गोचर – 16 सितंबर, 2020- बुधवार : साल 2020 में सूर्य देव 16 सितंबर 2020 को 19:07 मिनट पर सिंह से कन्या राशि में गोचर करेंगे 17 अक्टूबर 07:05 बजे तक सूर्य देव इसी राशि में रहेंगे और उसके बाद तुला राशि में गोचर कर जाएंगे। (इस गोचर की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें)
  • बुध का तुला राशि में गोचर – 22 सितंबर, 2020- मंगलवार : 22 सितंबर 2020 को बुध ग्रह का गोचर तुला राशि में होगा। बुध देव 16:55 बजे कन्या राशि से निकलकर तुला में प्रवेश कर जाएंगे और 14 अक्टूबर को वक्री होते हुए इसी राशि में 6:32 बजे तक रहेंगे। इसके बाद 3 नवंबर को बुध देव इसी राशि में मार्गी गति प्रारंभ करेंगे और 28 नवंबर 07 बज-कर 04 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएंगे। (इस गोचर का आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)
  • राहु का वृषभ राशि में गोचर – 23 सितंबर, 2020- बुधवार: इस वर्ष की शुरुआत से 23 सितम्बर 2020 तक राहु का गोचर मिथुन राशि में रहेगा और 23 सितम्बर 2020 को प्रात: 08: 20 पर यह मिथुन से वृषभ राशि में संचार करेगा। राहु हमेशा वक्री अवस्था में ही संचार करता है। (राहु का गोचर मानव जीवन पर बहुत अहम भूमिका निभाता है। अपने जीवन पर इसका प्रभाव जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)
  • केतु का वृश्चिक राशि में गोचर – 23 सितंबर, 2020- बुधवार : इस वर्ष 2020 की शुरुआत में केतु का गोचर धनु राशि में रहेगा। सितम्बर 23, 2020 को प्रात: 08: 20 पर केतु का राशि परिवर्तन धनु से वृश्चिक राशि में होगा और साल के अंत तक इसी राशि में बना रहेगा। केतु हमेशा राहु की भांति वक्री चाल ही चलता है। (केतु गोचर की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें)
  • शुक्र का सिंह राशि में गोचर – 28 सितंबर, 2020- सोमवार : शुक्र देव 28 सितंबर 2020 को 00:50 बजे कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और 23 अक्टूबर 10:44 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद शुक्र ग्रह का गोचर कन्या राशि में होगा। (इस गोचर का आपके जीवन पर प्रभाव जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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इस महीने से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण भविष्यवाणी : 

  • इस महीने मेष राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र पर थोड़ी उठापटक का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि इस दौरान आपको अपने सहकर्मियों से पूरा सहयोग मिलने की उम्मीद है। वहीं बात वृषभ राशि के जातकों की करें तो, ग्रहों के गोचर के परिणामस्वरूप इस माह आपको सेहत और नौकरी के संदर्भ में प्रतिकूल परिणाम प्राप्त होंगे, जबकि प्यार और दाम्पत्य जीवन के लिए समय शुभ होगा।
  • मिथुन राशि के जातकों के लिए यह महीना मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। जहाँ सेहत के लिहाज़ से आपको जागरूक रहने की सलाह दी जाती है, वहीं करियर के लिए यह माह अच्छी सौगात लेकर आएगा। कर्क राशि के लोगों को, इस पूरे ही माह अपने करियर, प्रेम जीवन, शिक्षा एवं सेहत को लेकर थोड़ा सजग रहने की ज़रूरत होगी।
  • सिंह राशि के जातकों के लिए यह महीना बेहद आम रहने वाला है। आपको कोई भी काम करने से पहले उसके बारे में उचित ढंग से सोचने-समझने की सलाह दी जाती है। कन्या राशि के जातकों के लिए यह माह करियर और पारिवारिक जीवन के संदर्भ में शुभ परिणाम लेकर आएगा।
  • तुला राशि के लोगों के लिए इस माह आपको कार्य क्षेत्र पर भाग्य का और अपनी सेहत का भरपूर फायदा मिलेगा। हालांकि छात्रों को थोड़ा अधिक मेहनत करने की सलाह दी जाती है। वृश्चिक राशि के जातकों को इस पूरे ही माह अपने दाम्पत्य जीवन का आनंद उठाने का मौका मिलेगा। हालाँकि बीच-बीच में कार्य की अधिकता से मानसिक तनाव भी हो सकता है, लेकिन समय के साथ वो भी आप दूर कर पाने में सफल होंगे। 
  • धनु राशि के जातकों के लिए सितंबर का ये माह प्रेम जीवन के लिए थोड़ा चुनौती पूर्ण साबित होगा। लेकिन कार्यक्षेत्र पर आप अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे जिससे लाभ की प्राप्ति भी होगी। मकर राशि के जातकों के लिए आर्थिक लिहाज़ से सितम्बर बेहद अनुकूल रहेगा। हालांकि वैवाहिक जातकों को अपने साथी से जुड़ी कोई परेशानी तनाव दे सकती है। 
  • कुम्भ राशि के लोगों के लिए यह महीना काफी शुभ साबित होगा। इस दौरान आपको आर्थिक फायदा मिलेगा। नौकरी पेशा जातक इस समय भाग्य का साथ मिलने से भरपूर फायदा उठाते नज़र आएँगे, हालाँकि प्रेमी जातकों को अपने रिश्ते में संभलकर चलने की ज़रूरत होगी। मीन राशि के लोगों के लिए यह महीना सामान्य फल लेकर आएगा। इस महीने आपके करियर और पारिवारिक जीवन में अनुकूलता आएगी।

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तमाम गोचर-ग्रहण और भविष्यफल आदि की जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे। एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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