संत ज्ञानेश्वर जयंती आज, पढ़ें उनके जीवन चरित्र से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

संत ज्ञानेश्वर 13 वीं सदी के एक महान मराठी संत, कवि, और नाथ परंपरा के विद्वान योगी थे, जिन्होंने मराठी साहित्य के पवित्र ग्रंथों “ज्ञानेश्वरी” और “अमृतानुभव” की रचना की। माना जाता है कि यादव राजा रामदेवराव के शासनकाल के दौरान सन 1275 में संत ज्ञानेश्वर का जन्म हुआ था। उनका जन्म कृष्ण जन्माष्टमी की शुभ तिथि के दिन महाराष्ट्र के पास गोदावरी नदी के किनारे बसे आपे गावं में हुआ था। उसी दिन से संत ज्ञानेश्वर जयंती के रूप में हर वर्ष भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को संत ज्ञानेश्वर का जन्मोत्सव मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार भारत में आज ये पर्व मनाया जाएगा। संत ज्ञानेश्वर जयंती मुख्य रूप से उत्तरी राज्यों में संत ज्ञानेश्वर के सम्मान में मनाई जाती है। आज संत ज्ञानेश्वर की पहचान अपने बौद्धिक गुणों और ज्ञान के लिए की जाती है। 

महान संतो में की जाती है संत ज्ञानेश्वर की गिनती 

पौराणिक काल से ही भारत को संतों और ऋषि-मुनियों का देश माना जाता है, जहाँ कई महान संतो ने जन्म लिया है उन्ही में से संत ज्ञानेश्वर का नाम भी सबसे महान संतो में लिया जाता है। माना जाता है कि संत ज्ञानेश्वर के पास लोगों को अत्यधिक प्रभावशाली तरीके से ज्ञान प्रदान करने की दिव्य कुशलता थी। जिसके चलते वो बेहद प्रभावशाली ढंग से व्यक्ति को इस कदर ज्ञान देते थे कि लोग उन्हें सुनने मात्र से ही अच्छे-बुरे में अंतर करना सीख जाते थे। ऐसे में हर वर्ष मनाई जाने वाली संत ज्ञानेश्वर की जयंती पर लोग और उनके अनुयायी उन्हें याद कर उनसे ज्ञान और बौद्धिक क्षमता प्रदान करने का आशीर्वाद मांगते हैं।  

बालक अवस्था में ही संत ज्ञानेश्वर ने हासिल किया था ज्ञान 

संत ज्ञानेश्वर के पिता का नाम विठ्ठलपंत था, जो ब्राह्मण थे और उनकी मां का नाम रुख्मिणी बाई था। बहुत छोटी आयु में ही संत ज्ञानेश्वर जी को किसी कारणवश अपनी जाति से बहिष्कृत होना पड़ा था, जिसके चलते उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उनके पास रहने तक के लिए एक झोपड़ी भी नहीं थी। उन्हें बाल अवस्था में ही समाज में कई तरह के तिरस्कारों का सामना करना भी करना पड़ा था। लोगों और समाज द्वारा दिए गए इन्ही कष्टों और तिरस्कारों के चलते उन्होंने अखिल जगत पर अमृत सिंचन किया। 

अमृत ज्ञान प्राप्ति के लिए बाल भागीरथ ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की, जिसके बाद ही तत्कालीन समाज का उद्धार हो सका था। अपने इसी ज्ञान का उल्लेख उन्होंने मराठी भाषा में भगवद्‍गीता के ऊपर एक ‘ज्ञानेश्वरी’ नामक दस हजार पद्यों में किया है। संत ज्ञानेश्वर की सभी रचनाओं में से सबसे मुख्य ‘ज्ञानेश्वरी’ और ‘अमृतानुभव’ हैं।

संत ज्ञानेश्वर जयंती से जुड़ी कुछ विशेष बातें 

  • संत ज्ञानेश्वर जी की मृत्यु के सालों बाद भी आज उनका नाम बेहद सम्मान पूर्ण तरीके से लिया जाता है। 
  • संत ज्ञानेश्वर जयंती के दिन लोग संत ज्ञानेश्वर को उनके महान कार्यों और ज्ञान के लिए विशेष तौर से याद करते हैं। 
  • इस दिन उनके द्वारा लिखी किताबों और ग्रंथों पर विचार किया जाता है। 
  • उनके द्वारा रचित सभी प्रभावशाली और श्रेष्ठ रचनाओं को मानव समुदाय अपने जीवन में अपनाने हेतु प्रयास करता है। 
  • इस दिन लोग सुबह स्नान-आदि कर संत ज्ञानेश्वर जी के सम्मान में संतसंग, भजन उपदेश का आयोजन करते हैं। 
  • इस दौरान संत ज्ञानेश्वर के समक्ष प्रार्थनाएं की जाती है और उनसे आशीर्वाद की कामना करते हुए उनके द्वारा प्रदान किये गए ज्ञान के लिए उन्हें शुक्रिया भी कहा जाता है।

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