बहन और बहु ने भी दिया था रावण को श्राप, जिसके कारण हुआ उसका अंत

रावण के बारे में अक्सर ये कहा जाता है कि वो बेहद ही अहंकारी मनुष्य था। अपने बल के अभिमान में ना जाने उसने कितनी ही बार कई देवताओं और कई असुरों से भी युद्ध कर लिया था। हालाँकि उसे हर युद्ध में ही हार का सामना करना पड़ा था लेकिन उसका अहंकार इतना बढ़ चुका था कि उसे इस बात से कभी भी सबक नहीं मिला और अंत में उसने माता सीता का हरण कर लिया जिसके बाद भगवान राम ने अहंकारी रावण का अंत कर दिया।

इस लेख में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि रावण का अंत सिर्फ माता सीता के श्राप से नहीं बल्कि इन छह लोगों के श्राप की भी वजह से हुआ है।

रावण ने पूर्व-जन्म में भी माता सीता पर डाली थी बुरी नज़र

जी हाँ, शायद इस बात से बहुत से लोग आज भी अनजान हैं। कहा जाता है कि रावण ने अपने पूर्व-जन्म में भी सीता पर अपनी कुदृष्टि डाली थी। जिस वजह से माता सीता ने रावण को श्राप दिया था। पूर्व-जन्म में माता सीता का नाम वेदवती थी। बताया जाता है कि वेदवती देवी लक्ष्मी के अंश से उत्पन्न हुई थीं।

भगवान शिव के वाहन ने भी दिया था श्राप

बताया जाता है कि एक बार भगवान शिव से मिलने के लिए रावण कैलाश पर्वत पर गया था।  वहां उसकी नज़र भगवान शिव के वाहन नंदी पर पड़ी। तब रावण ने नंदी का मज़ाक उड़ाते कहा कि इसकी शक्ल एक दम किसी बंदर जैसी है। तब नंदी ने क्रोध में आकर रावण को श्राप दिया था कि एकदिन तुम्हारा अंत बंदरों की ही वजह से होगा और ऐसा ही हुआ भी।

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एक रघुवंशी ने भी दिया था श्राप

भगवान राम के वंश में एक अनरण्य नाम के राजा हुआ करते थे। एक बार रावण और राजा अनरण्य के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में राजा अनरण्य की मौत हो गयी थी।  हालाँकि अपनी मृत्यु से ठीक पहले रावण को श्राप देते हुए कहा था कि तुम्हारा अंत मेरे ही वंश का कोई करेगा और राम भगवान ने रावण का अंत करके इस बात को सिद्ध भी कर दिया।

बहु के साथ रावण ने किया दुराचार, तब मिला था श्राप

रम्भा एक नर्तकी हुआ करती थीं जो स्वर्ग-लोक में इन्द्रदेव की सभा मे गायन और वादन किया करती थीं। बता दें कि रम्भा कश्यप और प्राधा की पुत्री थी। अपने मन मोहक  रूप और सौंदर्य के लिए रम्भा तीनों लोक में प्रसिद्ध थी। कहा जाता है जब भी किसी ऋषि की तपस्या को भंग करना होता था तब वहां रम्भा को ही भेजा था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, विश्व विजय करने के लिए जब रावण एक बार स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसने वहां रम्भा को नृत्य करते हुए देखा। उस समय कामातुर होकर उसने रम्भा को पकड़ लिया।

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तब रम्भा ने रावण से कहा, ‘कृपया करके आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें, मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हूं इसलिए मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं.’ लेकिन रावण ने रम्भा की एक बात नहीं सुनी और उनके साथ दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उनको बहुत क्रोध आया और उन्होंने रावण को श्राप देते हुए कहा कि, “तुम्हारा अंत एक स्त्री की ही वजह से होगा। अगर भविष्य में तुमने किसी औरत के साथ ज़बरदस्ती की कोशिश की तो तुम्हारे सिर के टुकड़े हो जायेंगे।

बहन ने भी दिया था रावण को श्राप

रावण की बहन शूपणखा अपने पति विद्युतजिह्वा से बहुत प्रेम करती थी।  विद्युतजिह्वा राजा कालकेय का सेनापति था। एक बार रावण और कालकेय का युद्ध हुआ। तब इस युद्ध में विद्युतजिह्वा की भी मौत हो गई थी।  उस वक़्त रावण की बहन ने ही शूपणखा ने ही रावण को श्राप देते हुए कहा था कि तुम्हारा अंत मेरी ही वजह से होगा।

पत्नी की बड़ी बहन ने भी दिया था श्राप

माया रावण की पत्नी की बड़ी बहन थी। रिश्ते का लिहाज़ ना करते हुए रावण उन पर भी गंदी नज़र रखता था। माया के पति वैजयंतपुर के शंभर राजा हुआ करते थे। एक दिन रावण शंभर के घर आ गया। वहां रावण ने माया को अपनी बातों में फँसाने की बहुत कोशिश की। इस बात की भनक जब शंभर को लगी तब उन्होंने रावण को बंदी बना लिया। उसी समय शंभर पर राजा दशरथ ने आक्रमण कर दिया। इस युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई।

अपने पति की मृत्यु के बाद जब माया सती होने लगी तब रावण ने उन्हें अपने साथ चलने को कहा। तब माया को गुस्सा आ गया और उन्होंने रावण से कहा कि तुमने वासनायुक्त होकर मेरा सतीत्व भंग करने का प्रयास किया इसलिए मेरे पति की मृत्यु हो गई अतः तुम्हारी मृत्यु भी इसी कारण होगी।

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