राधा अष्टमी व्रत: जानें राधा जी के जन्म से जुड़ी इस पौराणिक कथा और व्रत विधि को !

हिन्दू धर्म में यूँ तो सभी देवी देवताओं के लिए कोई ना कोई ख़ास ऐसा दिन है जिस दिन विशेष रूप से उनकी पूजा अर्चना की जाती है। उसी प्रकार से आज 6 सितंबर को विशेष रूप से राधा अष्टमी व्रत का त्यौहार मनाया जा रहा है। आज के दिन कृष्ण प्रेमिका राधा रानी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन व्रत रखने का भी ख़ासा महत्व है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने से विशेष रूप से व्यक्ति के सभी दुखों का निवारण हो जाता है। आइये जानते हैं राधा अष्टमी व्रत से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में।

राधा रानी जन्म से जुड़ी महत्वपूर्ण कथा 

राधा रानी के जन्म से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन वृषभानु जी को एक तालाब में कमल फूल के बीच एक नन्ही कन्या लेटी हुई मिली। वो उस छोटी बच्ची को वहां अकेले नहीं छोड़ना चाहते थे इसलिए उसे लेकर अपने घर आ गये। राधा जी को वो घर तो ले आये लेकिन वो आँखें नहीं खोल रही थी। माना जाता है राधा जी जन्म के बाद सबसे पहले कृष्ण जी को देखना चाहती थी इसलिए दूसरों के लाख कोशिशों के वाबजूद भी उन्होनें तब तक आँखें नहीं खोली जब तक बाल्यावस्था में उनकी मुलाकात कृष्ण जी से नहीं हुई। कहते हैं की कृष्ण जी को जब राधा रानी ने पहली बार देखा तभी उन्होनें अपनी आँखें खोली। 

श्री राधा अष्टमी 2019: जानें इस दिन व्रत रखने के विशेष नियम !

बता दें कि पद्दपुराण के अनुसार एक बार वृषभानु जी जिन्हें राधा रानी के पिता के रूप में लोग जानते हैं, यज्ञ के लिए भूमि साफ़ कर रहे थे, उसी दौरान धरती की कोख से राधा रानी उन्हें बच्ची के रूप में प्राप्त हुई। कहते हैं की जिस प्रकार से द्वापर युग में भगवान् विष्णु ने कृष्ण अवतार लिया था उसी प्रकार लक्ष्मी माता ने राधा रानी के रूप में जन्म लिया था। राधा कृष्ण की प्रेम कहानी से हम सभी वाक़िफ़ हैं। जहाँ एक तरफ कृष्ण को शरीर तो दूसरी तरफ राधा जी को उनकी आत्मा माना जाता था। कहते हैं कि राधा जी जिस दिन वृषभानु जी को मिली थी वो अष्टमी तिथि थी, इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। आज के दिन राधा रानी के साथ ही कृष्ण जी की पूजा अर्चना का भी विशेष महत्व है। 

राधा अष्टमी व्रत विधि 

  • राधा अष्टमी के दिन मुख्य रूप से सबसे पहले सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई कर वहां राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित करें। 
  • पूजा स्थल पर एक छोटे मंडप का निर्माण करें और उसके मध्यभाग में कलश स्थापित करें। 
  • इसके बाद कलश के ऊपर एक तांबे की तस्तरी रखें। 
  • अब इस पात्र के ऊपर सबसे पहले राधा रानी की मूर्ति स्थापित करें। अगर संभव हो तो राधा जी की सोने या चांदी से सुसज्जित मूर्ति ही स्थापित करें। 

इस प्रकार से आप भी आज के दिन राधा अष्टमी का व्रत रखकर शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।

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