पुखराज पहनने से पहले जानें उसका महत्व और बरतने वाली सावधानियां

वैदिक ज्योतिष में पुखराज रत्न का बेहद महत्व बताया गया है। पुखराज रत्न बृहस्पति ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए धारण किया जाता है। इसके अलावा जिन जातकों का बृहस्पति कमजोर होता है उन्हें भी पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति ग्रह कर्म, धर्म, दर्शन, संतान सुख इत्यादि का कारक होता है। इसके अलावा यदि व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति बलवान स्थिति में है तो इससे व्यक्ति के परिवार, समाज और हर क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बृहस्पति ग्रह की कृपा पाने के लिए बहुत से लोग पुखराज रत्न धारण करते हैं। हालांकि कोई भी रत्न धारण करने से पहले विशेषज्ञ ज्योतिषियों से परामर्श अवश्य लेनी चाहिए। ऐसे में आप भी हमारे विद्वान ज्योतिषियों से बात करके रत्नों और अपनी कुंडली के अनुसार सटीक रत्न की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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पुखराज रत्न का महत्व

जैसा कि, हमने पहले भी बताया कि पुखराज रत्न गुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए धारण किया जाता है। इसके अलावा जो कोई भी व्यक्ति पुखराज रत्न धारण करता है उसके जीवन में समृद्धि और खुशहाली भी आती है। पुखराज की यही सब ख़ासियत उसे एक बेशकीमती रत्न बनाती है। आज की दुनिया में जहां हर एक इंसान जीवन में खुशी ढूंढने की फिराक में है ऐसे में पुखराज रत्न की मांग भी उतनी ही ज्यादा बढ़ चुकी है। जानकार बताते हैं कि, पुखराज रत्न व्यक्ति के जीवन में समृद्धि लाने में सहायक साबित होता है। 

इसके अलावा पुखराज रत्न व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता को बढ़ावा देता है। इसके साथ ही अगर सही रीति और नियम के साथ पुखराज रत्न धारण किया जाए तो ऐसे व्यक्तियों के जीवन में सफलता के ढेरों अवसर आते हैं। पुखराज रत्न से व्यक्ति के जीवन में बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्य को बेहद ही आसानी से प्राप्त कर सकता है। माना जाता है कि, जो कोई भी व्यक्ति पुखराज रत्न धारण करता है उसे जीवन के हर एक सुख प्राप्त होते हैं। हालांकि पुखराज धारण करने से पहले इसीलिए ज्योतिषी से परामर्श लेने की विशेष जरूरत मानी जाती है क्योंकि, यह रत्न अपने साथ तीव्र परिणाम लेकर आता है। ऐसे में कई लोगों के जीवन में इसका उल्टा असर भी पड़ सकता है।

पुखराज रत्न के लाभ

अब जानते हैं कि, जीवन में सुख समृद्धि प्रदान करने के अलावा पुखराज रत्न धारण करने से एक व्यक्ति को क्या कुछ लाभ मिलता है। 

  • बहुत से लोग पुखराज रत्न को अपने घर में या तिजोरी में रखते हैं। ऐसा करने के पीछे मान्यता बताई जाती है कि, इससे घर में सुख, समृद्धि और बरकत आती है। 
  • इसके अलावा पुखराज रत्न शांति प्रदान करता है। जिन लोगों का दिमाग एकाग्र नहीं होता ऐसे लोगों को पुखराज रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे एकाग्रता प्राप्त होती है और व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार होता है। 
  • जीवन से नकारात्मकता को दूर कर के सकारात्मकता लाने में भी पुखराज बेहद ही सहायक साबित होता है। 
  • पुखराज रत्न व्यक्ति के मन, शरीर और स्वास्थ्य के विकास और वृद्धि में भी सहायक होता है और इससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों के प्रति ज्यादा निष्ठा से अग्रसर होकर उसे हासिल करने का प्रयास करता है। 
  • इसके अलावा जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो उन्हें भी पुखराज रत्न धारण करने की सलाह बताई जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं, वैवाहिक जीवन में सुख संपत्ति और संतान सुख प्राप्ति के लिए भी पुखराज रत्न किसी वरदान से कम नहीं होता है। 
  • इसके अलावा पुखराज रत्न से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह रत्न भगवान गणेश का सहयोगी है। ऐसे में जो कोई भी व्यक्ति इसे धारण करता है उसके जीवन में धन, वैभव और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।

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पुखराज रत्न से होने वाले नुकसान

जैसा कि, हमने आपको पहले भी बताया कि क्योंकि पुखराज रत्न के परिणाम काफी तीव्र होते हैं ऐसे में कई बार यह लोगों के जीवन में उल्टा परिणाम भी देने के लिए जाना जाता है। तो आइए जानते हैं पुखराज रत्न धारण करने से होने वाले नुकसान के बारे में:

  • जिन व्यक्तियों की कुंडली में गुरु बल हीन अवस्था में होते हैं कई बार ऐसे व्यक्तियों को पुखराज रत्न का नकारात्मक परिणाम झेलना पड़ता है। 
  • इसके दुष्प्रभावों की बात करें तो वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी से मतभेद या सामाजिक जीवन प्रभावित होना कुछ ऐसे नकारात्मक प्रभाव है जो व्यक्ति के जीवन में मुख्य रूप से देखने को मिलते हैं। 
  • इसके अलावा कई बार देखा गया है कि, लोग टूटा हुआ पुखराज भी पहने रहते हैं जो कि बेहद ही गलत है क्योंकि ऐसा टूटा हुआ पुखराज धारण करने से जीवन में चोरी की संभावनाएं बढ़ जाती है। 
  • इसके अलावा अगर धारण किए हुए पुखराज का रंग ढल गया हो या उसमें वह चमक नहीं रही हो और फिर भी उसे पहना जाए ऐसी स्थिति में यह व्यक्ति के स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं की वजह भी बन सकता है। 
  • इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने पुखराज धारण किया हुआ है और आपको उस पर सफेद रंग के धब्बे नजर आए तो समझ लीजिए कि, यह जीवन के लिए बेहद ही घातक हो सकते हैं। 
  • पुखराज रत्न कभी भी रंग नहीं बदलना चाहिए। ऐसे में यदि आपने पुखराज रत्न धारण किया है। जिसका रंग बदल रहा है या उड़ रहा है या हट रहा है तो समझ लीजिए कि, यह जीवन में आने वाली कठिनाइयों की तरफ इशारा कर रहा है।

कितने रत्ती या वजन का पुखराज धारण करना चाहिए

पुखराज रत्न का वजन कभी भी 3.25 कैरेट से कम नहीं होना चाहिए। मान्यता है कि, पुखराज के वजन के अनुसार ही व्यक्ति के जीवन पर इसका प्रभाव पड़ता है। ऐसे में हम पुनः इस  बात को दोहराएँगे की पुखराज रत्न या कोई भी रत्न धारण करने से पहले एक बार विशेषज्ञ ज्योतिषियों से सलाह मशवरा अवश्य करें और तब ही कोई रत्न धारण  करें। ऐसा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और रत्नों का सही फल प्राप्त होता है।

पुखराज रत्न धारण करने की सही विधि

कोई भी रत्न धारण करने की एक निश्चित विधि बताई गई है, जिसका पालन करना अनिवार्य होता है। अन्यथा उस रत्न का व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक की जगह नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। तो आइए जानते हैं पुखराज रत्न धारण करने की सही विधि क्या है।

  • सबसे पहले ज्योतिष परामर्श अवश्य लें। ऐसा करने से आपको इस बात की सटीक जानकारी मिल जाएगी कि, पुखराज (या कोई भी अन्य रत्न जो आप धारण करने जा रहे हैं वह) आपके लिए शुभ है भी या नहीं।
  • इसके अलावा दूसरी महत्वपूर्ण बात जो पुखराज धारण करने वाले लोगों को आवश्यक समझने और पालन करनी चाहिए वह यह कि, पुखराज हमेशा किसी अच्छी और प्रतिष्ठित दुकान से ही खरीदें। बाजार में आज के समय में ढेरों तरह के नकली पुखराज भी बेचे जाते हैं लेकिन, याद रहे नकली पुखराज पहनने से व्यक्ति के जीवन में इसके नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। 
  • इसके बाद पुखराज को आप सोने या चाँदी में मड़वा कर धारण कर सकते हैं। 
  • पुखराज 2 कैरेट या उससे ज्यादा के वजन का होना चाहिए। अंगूठी को पहनने से पहले आप इसे गंगा जल या दूध में शुद्ध करने के लिए डाल दें। ऐसा करने से रत्न में यदि कोई भी अशुद्धि है तो वह दूर हो जाती है। जिससे उस के नकारात्मक प्रभाव खत्म होकर आपके जीवन में सकारात्मक और शुभ परिणाम मिलते हैं। 
  • इसके बाद अंगूठी को एक पीले कपड़े पर रखें। इस पीले कपड़े पर पहले ही रोली से बृहस्पति यंत्र बना ले।
  • इसके बाद दिन की बात करें तो, गुरुवार के दिन सुबह के वक्त यह अंगूठी धारण करना आपके लिए शुभ साबित हो सकता है। आप चाहे तो इसे अपनी दाहिनी हाथ की तर्जनी उंगली में पहन लें।
  • पुखराज पहनने वालों को एक बात अवश्य ध्यान में रखनी चाहिए कि, अक्सर आमतौर पर देखा गया है कि, पुखराज रत्न का असर 3 वर्षों में खत्म हो जाता है। ऐसे में इस बात को सुनिश्चित करें कि, आप इस अंगूठी को 3 वर्ष बाद अवश्य बदल दें। 
  • इसके अलावा केवल अंगूठी धारण करना ही सब कुछ नहीं है, आपको इसकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा। इसके लिए आप रोजाना इसे साफ करें और अंगूठी पर बिल्कुल भी धूल या कोई भी गंदगी ना बैठने दें। ऐसा होने की स्थिति में रत्नों का जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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ऐसे करें असली नकली पुखराज रत्न की पहचान

जैसा कि, हमने पहले भी बताया कि आज के समय में बाजार में कई लोग धन के लालच में लोगों को नकली पुखराज बेच देते हैं और अक्सर देखा गया है कि, असली पुखराज या किसी अन्य रत्न की पहचान ना होने के कारण हम भी कई बार धोखे में आ जाते हैं। तो आइए, अब जान लेते हैं कि असली पुखराज रत्न की पहचान क्या होती है, जिसे जानने के बाद आप खुद को धोखाधड़ी से बचा सकते हैं और असली पुखराज पहन कर अपने जीवन में हर एक सुख और सकारात्मकता हासिल कर सकते हैं। 

  • पुखराज रत्न को रोशनी में देखें। इस दौरान इस बात को सुनिश्चित करें कि रत्न में कोई भी प्रकार की दरार या कोई अन्य अशुद्धि ना हो। यह आसान प्रयोग आप अपनी नग्न  आँखो से भी कर सकते हैं और यह बेहद ही आवश्यक है क्योंकि कोई भी धारण करने वाला रत्न टूटा या अशुद्ध नहीं होना चाहिए। 
  • इसके बाद दूसरा सरल प्रयोग है रत्न का वांछित रंग। आप कोई भी रत्न लेने से पहले उसे सूर्य की रोशनी की नीचे रखें। यदि नग्न आंखों से देखने में यह रत्न बेहद ही चमकीले या चमकदार लगते हैं तो समझ जाइए कि, यह रत्न नकली है।
  • रत्न की तीसरी पहचान उसे छूकर की जा सकती है। कोई भी रत्न खरीदते समय उसे छूकर देखें। यदि छूने में बेहद कठोर लगे तो इसका मतलब है कि रत्न नकली है। असली रत्न की सबसे सटीक पहचान यही होती है कि हाथों से छूने पर यह चिकना सा प्रतीत होना चाहिए। 
  • इसके अलावा यदि रत्न पर आपकी उंगलियों के निशान बन जाए तो इसका मतलब भी साफ है कि, वह रत्न नकली है और आप को ठगा जा रहा है।
  • इसके अलावा एक शीशे के गिलास में गाय का दूध रखें और इसके अंदर पुखराज डाल दे। एक से डेढ़ घंटे के अंदर ही यदि पुखराज की किरण ऊपर से छिटक कर नजर आती है तो समझ जाइए कि यह असली पुखराज है।

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पुखराज रत्न और सावधानियां

अब जानते हैं कि, आखिर पुखराज रत्न धारण करना किन लोगों के लिए शुभ साबित हो सकता है और किन्हें पुखराज रत्न नहीं धारण करना चाहिए। इसके अलावा यह भी जानते हैं कि, पुखराज रत्न किन अन्य रत्नों के साथ धारण किया जा सकता है। 

  • मेष राशि, कर्क राशि, सिंह राशि, वृश्चिक राशि, धनु राशि, मीन राशि के जातक यदि पुखराज धारण करते हैं तो उन्हें संतान सुख, विद्या के क्षेत्र में लाभ, धन, यश, आदि प्राप्त होता है।
  • हालांकि वहीं वृषभ राशि, मिथुन राशि, कन्या राशि, तुला राशि, मकर राशि और कुंभ राशि के जातकों को पुखराज नहीं पहनना चाहिए। 
  • पुखराज पहनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि, पुखराज कभी भी पन्ना, नीलम, हीरा, गोमेद, और लहसुनिया इन रत्नों के साथ नहीं पहनना चाहिए। अन्यथा ऐसी स्थिति में पुखराज के फ़ायदों से ज्यादा व्यक्ति को हानि उठानी पड़ सकती है। 
  • इसके अलावा स्वास्थ्य के लिहाज से बात करें तो जिन जातकों का लीवर ठीक से काम नहीं करता या जिन्हें हेपेटाइटिस जैसी बीमारियाँ हो उन्हें सोने की अंगूठी में पुखराज पहनने से लाभ मिलता है।
  • इसके अलावा अल्सर, गठिया, पेचिस, हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी पुखराज रत्न धारण करना शुभ रहता है।
  • इसके अलावा यह भी जानना आवश्यक है कि, पुखराज रत्न के उपरत्न भी होते हैं। इनके नाम है सुनैहला, केरु, घीया, केसरी, पीला हकीक और टोपाज।

आवश्यक जानकारी 

जैसा कि, हमने पहले भी कहा कि, पुखराज रत्न या कोई भी अन्य रत्न धारण करने से पहले हमेशा किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद ही कोई रत्न धारण करना चाहिए क्योंकि, ज्योतिषी आपकी कुंडली को देख कर आपको इस बात की जानकारी विस्तृत रूप से प्रदान कर सकते हैं कि, आपको कौन सा रत्न, कितने रत्ती का और कैसे धारण करना चाहिए। अन्यथा आवश्यकता से अधिक कैरेट का रत्न पहनना या आवश्यकता से कम कैरेट का रत्न पहनना या फिर नकली रत्न पहनना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

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