जानें कुंडली में स्थित नीच ग्रहों का आपके करियर पर क्या प्रभाव पड़ता है

ज्योतिष के हिसाब से हर ग्रह का प्रभाव मानव मस्तिष्क और उनके चित्त पर पड़ता है। जब किसी मनुष्य का जन्म होता है, तो उस समय के ग्रह नक्षत्रों की स्थिति उसके मन पर एक छाप छोड़ती है। यह ग्रह नक्षत्र चेतन और अवचेतन मन पर अपना प्रभाव डालते हैं।

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आपने ज्योतिषीय आर्टिकल पड़े होंगें, उनमें आपने ज्योतिषीय योगों के बारे में भी पढ़ा होगा, कौन सा योग क्या करता है, कौन-कौन से योग आपको करियर में सफलता दिलाएंगे, इसकी जानकारी आपको हो सकती है।

 मगर अक्सर हम यह नहीं देखते कि यदि कोई ग्रह नीच का है, तो वह आपके व्यक्तित्व में क्या कमी लेकर आएगा, और उस कमी के चलते आपके करियर पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। जब तक आपको अपनी कमज़ोरी के बारे में पता नहीं होगा, आप उस पर काम नहीं कर पाएंगे और सफलता के उस शिखर को प्राप्त नहीं कर पाएंगे, जो आप प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं।

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आइए, अब जानते हैं कि ग्रहों की नीच या दुर्बल अवस्था कैसे आपके करियर में आपकी निर्णय और कार्य क्षमता को प्रभावित करती है-

सूर्य

आत्मविश्वास, इच्छा शक्ति में कमी, जुझारू प्रवृत्ति में कमज़ोरी, अदूरदर्शिता। यदि आपकी कुंडली में “सूर्य” नीच अवस्था में है तो व्यक्ति के अंदर हमेशा दूसरे से मान्यता, प्रशंसा प्राप्त करने की भावना रहेगी। उसे समाज सिर्फ सफलता के मापदंड से दिखता है। “ सूर्य “ क्योंकि पिता का कारक है तो व्यक्ति को जो प्रशंसा और मान्यता बचपन में अपने पिता से प्राप्त नहीं हुई, वह उसे दूसरों से प्राप्त करना चाहता है। वह जो भी कार्य करेगा, वह दूसरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए करेगा, श्रेय प्राप्त करने के लिए करेगा ना कि अपनी ख़ुशी के लिए। इसलिए यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच अवस्था में है तो आपको खुद पर, अपने कौशल पर भरोसा होना चाहिए और जो भी कार्य करें, उसमें अपनी ख़ुशी ढूंढें न कि दूसरों की खोखली प्रशंसा। 

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चंद्रमा

असुरक्षा की भावना, खुद पर अविश्वास, अत्यधिक भावुकता, दूसरों से जल्दी प्रभावित होना, परिस्थितियों पर दोष मढ़ना। चंद्रमा क्योंकि मन का कारक है, यदि यह अपनी नीच या दुर्बल स्थिति में कुंडली में विराजमान है तो व्यक्ति हमेशा चिंतित रहता है। छोटी- छोटी बातों पर परेशान होता है, किसी भी छोटी सी परेशानी में खराब स्थिति की कल्पना कर लेता है, जिससे निर्णय लेने में देरी और कार्यों को टालने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है।

“चंद्रमा “ माता का, बचपन का भी सूचक है, तो हो सकता है कि बचपन में आप अधिक सुरक्षात्मक वातावरण में पले-बढ़े होंगे, जिससे सुरक्षा की भावना घर कर गई और आपकी जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होगी, जो व्यवसाय और नौकरी दोनों में सफलता के लिए जरूरी है। आप दूसरों पर ज्यादा निर्भर रहेंगे। क्षमतावान होते हुए भी मैनेजमेंट तक अपनी बात कहने में हिचकिचाएंगे। वह काम हाथ में लेंगे, जो आपकी ज़िम्मेदारी में भी शामिल नहीं है क्योंकि डर प्रभावी रहेगा, जिससे सही संदेश नहीं जाएगा। इसलिए यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा नीच अवस्था में है तो स्वयं पर भरोसा रखें। स्वयं कार्यों की ज़िम्मेदारी लें।  और आज में जीना सीखें, तभी आप अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर पाएंगे। 

मंगल

मंगल ग्रह “बाहुबल “ का प्रतीक है, “प्रतियोगी” भावना का प्रतीक है। यदि यह कुंडली में “नीच” या दुर्बल अवस्था में विराजमान है तो यह आपको अति भावुक और शर्मिला बना सकता है। अपने बाहुबल की बजाय दूसरों पर अधिक निर्भर रहेंगे , प्रति-शोध की भावना ज्यादा घर करेगी, जिससे आप अपनी ऊर्जा छोटे-छोटे कार्यों को करने में ज्यादा बर्बाद करेंगे। मेहनत करने की बजाय जोड़-तोड़ में ज्यादा विश्वास करेंगे, जिससे उच्च मैनेजमेंट तक सही संदेश नहीं जाएगा। आप अपनी ग़लतियाँ स्वीकार करने में हिचकिचाएंगे, जो भी आपको सलाह देने आएगा, वह आपको अपना दुश्मन लगेगा। आपको यह समझना चाहिए की व्यक्ति अपनी ग़लतियों से ही सीखता है, जिससे उसे आगे बढ़ने के अच्छे अवसर प्राप्त होते हैं। इसलिए यदि कुंडली में मंगल नीच का है तो सबसे सलाह लें और उन्हें मानें ग़लतियाँ स्वीकारें, तभी आप अपनी ऊर्जा को सही दिशा दे पाएंगे। 

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बुध 

“बुध” ग्रह कुंडली में जागरूकता, वाणी, सूचनाओं के आदान-प्रदान का ग्रह है। यह ग्रह एक अच्छी बिज़नेस सेंस भी देता है। यदि कुंडली में “ बुध” ग्रह अपनी” नीच” या दुर्बल अवस्था में विराजमान है तो आपको अपने स्वभाव में अधिक आलोचनात्मक बनायेगा, जिससे आप हर अवसर मिलने पर उसमे जांच-पड़ताल में ही समय व्यतीत कर देंगे, जिससे अवसर हाथ से निकलने के आसार होंगे।

“बुध” ग्रह के निर्बल होने से आपके ऊपर ग़लतियाँ करने का डर आपके ऊपर हमेशा हावी रहेगा। आप किये हुए हर कार्य को बार- बार चैक करेंगें, हमेशा अपनी परफॉरमेंस को लेकर चिंतित और बैचेन रहेंगे, जिससे निर्णय लेने में देरी तो होगी ही, साथ ही हर काम अपनी तय सीमा से कभी पूर्ण नहीं कर पाएंगे। इस में आपको प्रेजेंटेशन देने में भी दिक्कत आएगी, आपको हमेशा यही लगेगा की आपसे कुछ छूट गया, आप बहुत कुछ कह सकते थे, मगर कह नहीं पाए। जहां अचानक निर्णय लेना पड़ जाए, वहां आप खुद को असहज महसूस करेंगे।

इस लिए जब आपकी कुंडली में “बुध” नीच का हो तो आपको अधिक क्रियशील होना चाहिये, तभी आपको अधिक लाभ प्राप्त होंगे। इससे बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है, यदि बच्चे को 10वीं तक की पढ़ाई के बाद आगे विषयों के चयन में दिक्कत आए तो आप कक्षा 10 की परीक्षाएं देने वाले छात्रों के भविष्य को सुधारने के लिए बनी कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

गुरु 

“गुरु” ग्रह कुंडली में ज्ञान, सकारात्मकता, सही दिशा का प्रतीक है। अगर गुरु “नीच “ अवस्था में आपकी कुंडली में विराजमान है तो यह आपको नकारात्मक अवस्था की और ले जाता है। आपको आधा ग्लास भरा होने कि बजाय हमेशा आधा खाली ही नज़र आएगा। आप अपने प्रयासों पर ध्यान देने की बजाय ज्यादा भाग्यवादी बनेंगे, जिससे कार्य कुशलता पर प्रभाव पड़ेगा। आप परिस्थितियों और लोगों पर ज्यादा डिपेंडेंट रहेंगे। अपने कार्यों में असंगठित रहेंगे, अपनी बनाई सीमा तय कर के चलेंगे और उससे बाहर सोचने का प्रयत्न भी नहीं करेंगे।

इससे आप सीमित सोच के दायरे में रहेंगे, जिससे आगे बढ़ने में आपको परेशानी आएगी और आप सही प्रकार से जिस कंपनी में कार्य करते हैं, या व्यवसाय में हैं तो अपना पूर्ण योगदान वहां नहीं दे पाएंगे। इसलिए यदि कुंडली में “ गुरु” नीच अवस्था में हैं, तो आपको हमेशा सकारात्मक रहने की कोशिश करनी चाहिए। भाग्य के सहारे आगे बढ़ने की बजाय आपको मेहनत करनी चाहिए। इसके साथ ही यदि आप अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनसे सलाह लेते हैं तो सकारात्मक फल आपको अवश्य मिलते हैं। 

शुक्र

“शुक्र” ग्रह कुंडली में रचनात्मकता, सुंदरता, संतुष्टि, अच्छा प्रस्तुतिकरण, अपनी बात दूसरों तक अच्छे से पहुँचाने की कला का कारक ग्रह है। यह ग्रह यदि कुंडली में नीच अवस्था में हो तो यह दर्शाता है कि आपको हमेशा अपने काम में संतुष्टि की भावना नहीं मिलेगी, हमेशा कुछ ख़ालीपन लगता रहेगा, जिससे किसी व्यवसाय या नौकरी में लम्बे समय तक रहने में दिक्कत आएगी। दूसरों के प्रति आपके मन में हमेशा संदेह की स्थिति रहेगी, इसलिए आप अपना समय लोगों को खुश करने में लगा सकते हैं, इससे लोगों को आप पर कम विश्वास होगा, जिससे आपकी विश्वसनीयता भी कम होगी।

“शुक्र” के नीच राशि में होने से आप अपनी बात प्रभावशाली तरीके से सबके सामने नहीं रख पाएंगे, आपको अपनी बात समझाने में बहुत समय लगेगा। इससे आत्मविश्वास के साथ-साथ आपकी कार्य क्षमता भी प्रभावित होगी। इसलिए कुंडली में जब शुक्र नीच का हो तो आपको खुद को किसी रचनात्मक कार्य में लगाए रखना चाहिये, चाहे थोड़े से समय के लिए ही क्यों न हो। रचनात्मक कार्यों में नृत्य, गाना -बजाना, पेंटिंग इत्यादि  से आपके प्र्स्तुतिकरण में बहुत सुधार होगा। 

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शनि 

शनि ग्रह ज्योतिष में अनुशासन, नियम, समयबद्धता और समर्पण का कारक ग्रह है। जब यह आपकी कुंडली में अपनी “नीच” अवस्था मैं रहता है तो यह आलस्य, लापरवाही आदि देता है। आपकी अपने कार्यों के प्रति समर्पण की भावना में कमी लाता है। आप कार्यों को बेवजह टालने लगते हैं, किसी भी तरह से खुद को फोकस्ड नहीं रख पाते। इससे आप को निरंतरता पाने में हमेशा दिक्कत होगी, जिससे कार्य-क्षमता प्रभावित होना लाज़मी है। यह आपकी नौकरी और व्यवसाय दोनों के लिए ही खराब है।

इसलिए यदि आपकी कुंडली में “ शनि” नीच का होकर विराजमान है तो छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएँ, उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करें, जिससे निरंतरता और आत्मविश्वास में वृद्धि हो। “शनि” अनुशासन का ग्रह है, इसलिए किसी भी प्रकार के नियम में खुद को ढालने का प्रयास करें, चाहे वह सुबह जल्दी उठने का नियम ही क्यो न हो, और उसे कम से कम 21 दिन तक करने का प्रयास करें, इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और आपको भी सकारात्मकता नजर आएगी।  

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