नवरात्रि दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व-मंत्र-भोग और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ

नवरात्रि कि पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा करने के बाद नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान बताया गया है। माँ ब्रह्मचारिणी को देवी पार्वती का अविवाहित रूप माना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्मचारिणी देवी भगवान महादेव से विवाह करने की दृढ़ इच्छा रखती थी। जिसके चलते उन्होंने हजारों वर्ष की कठोर तपस्या की जिसके फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव की पत्नी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यही वजह है कि देवी ब्रह्मचारिणी शक्ति और सच्चे प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।

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नवरात्रि दूसरे दिन विशेष इस आर्टिकल में आज हम मां ब्रह्मचारिणी की पूजा महत्व के बारे में जानेंगे। साथ ही मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के ज्योतिषीय पहलू से भी अवगत होंगे। इसके अलावा हम इस विशेष आर्टिकल में बात करेंगे माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से संबंधित कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें और साथ ही विवाह योग मज़बूत करने के ज्योतिषीय उपाय भी हम आपको यहाँ प्रदान कर रहे हैं।

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माँ ब्रह्मचारिणी पूजा: ज्योतिषीय पहलु

ब्रह्मचारिणी शब्द संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ब्रह्मा के समान आचरण करने वाली। क्योंकि मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी इसी वजह से इनका एक नाम तपश्चारिणी पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र पहनती हैं और उनके एक हाथ में जप माला है और दूसरे हाथ में कमंडल है। 

ब्रह्मचारिणी देवी को प्रेम स्वरूप भी कहा जाता है। इसके अलावा माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा के ज्योतिषी संदर्भ की बात करें तो, मां ब्रह्मचारिणी सभी नौ ग्रहों में मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। ऐसे में यदि आपकी कुंडली में मंगल पीड़ित या दुर्बल अवस्था में है तो नवरात्रि के दूसरे दिन विशेष तौर पर मां ब्रह्मचारिणी की विधि विधान से पूजा करने से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव को कम या दूर किया जा सकता है।

माँ ब्रह्मचारिणी पूजा महत्व 

मां ब्रह्मचारिणी को पीले रंग बेहद प्रिय है। ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन जितना हो सके पूजा में पीले रंग शामिल करें और साथ ही इस दिन पीले रंग के ही वस्त्र धारण करें। बात करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलने वाले फल की तो मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में विवाह से संबंधित परेशानी और रुकावटें दूर होती हैं। 

ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का विवाह तय हो कर बार बार टूट रहा हो या फिर विवाह और वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ रही हो तो ऐसे लोगों को विशेष तौर पर नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। आप चाहें तो इस दिन कन्याओं को अपने घर बुलाएं और उन्हें भोजन कराकर उपहार आदि भेंट करें। ऐसा करने से आपके वैवाहिक जीवन की समस्याएं और विवाह में आने वाले किसी प्रकार की बाधा दूर होती है।

सिर्फ इतना ही नहीं, जो लोग विधि पूर्वक माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा आदि करते हैं उनके जीवन में दृढ़ निश्चय और अपार सहनशीलता प्राप्त होती है। इसके अलावा हिंदू शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि जीवन की सभी कष्ट और परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा बेहद ही उत्तम होती है। इसके अलावा ग्रहों में मंगल ग्रह और बुध ग्रह भगवान ब्रह्मचारिणी द्वारा शासित होता है। ऐसे में देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा और उनसे संबंधित मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति अपनी कुंडली में मौजूद इन दोनों ग्रहों के किसी भी प्रकार के बुरे प्रभाव से छुटकारा प्राप्त कर सकता है।

माँ ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को आत्म नियंत्रण की शक्ति प्रदान करती हैं जो आपको ध्यान केंद्रित करने और निर्धारित रहने में मदद करता है। इसके अलावा माँ अपने भक्तों को सफलता और आत्म-अनुशासन की शक्ति भी देती है और आध्यात्मिक विकास का आह्वान करती हैं।

माँ ब्रह्मचारिणी पूजा: ग्रहों पर प्रभाव 

जैसा की हमनें पहले भी बताया कि, सभी नौ ग्रहों में मंगल ग्रह और बुध ग्रह पर माँ ब्रह्मचारिणी शासन करती हैं। कहा जाता है कि कुंडली के पहले और आठवें घर में मंगल ग्रह द्वारा उत्पन्न किसी भी तरह की समस्याओं को हल करने की शक्ति माँ ब्रह्मचारिणी के पास होती है। साथ ही माता अपने भक्तों को कभी न क्षीण होने वाला साहस, मज़बूत दृढ़ शक्ति, और नकारात्मकता और दुखों से लड़ने की असीम शक्ति प्रदान करती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की सही विधि से पूजा करने से व्यक्ति की सहनशीलता बढ़ती है और साथ ही उन्हें उनके कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर सभी प्रकार की स्थितियों में विजयी होने की शक्ति मिलती है।

इसके अलावा क्योंकि माँ ब्रह्मचारिणी बुध ग्रह पर भी शासन करती हैं इसलिए इनकी पूजा करने से यह व्यक्ति को बुद्धि, पराक्रम, अच्छा दिमाग और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। जो छात्र जातक एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं या जो लोग इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें भी सफलता के लिए माँ ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल्स को उनके करियर में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इसके अलावा जो लोग मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं उनके लिए भी माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विशेष फलदाई साबित होती है।

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नवरात्रि दूसरा दिन: इस दिन तप का महत्व 

नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है जिन्होंने महादेव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। माँ ब्रह्मचारिणी ज्ञान और बुद्धि को दर्शाती हैं और वह रुद्राक्ष की पूजा करती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी अपने एक हाथ में पानी का बर्तन और दूसरे में माला धारण करती हैं। माँ के नाम में ब्रह्मा का अर्थ है दिव्य चेतना, विचार और इसलिए यह दिन ध्यान और तप करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

नवरात्रि दूसरे दिन की पूजा का महत्व 

यह नवरात्र पर्व का महत्वपूर्ण दिन है और इसकी शुरुआत दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय की पूजा और पढ़ने से करनी चाहिए। माँ की कृपा से व्यक्ति अपने जीवन में निराश हुए बिना अपने जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करता है और किसी भी चुनौती से जीतकर सफलता प्राप्त करता है। देवी ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को भावनात्मक शक्ति प्रदान करती हैं। देवी की कृपा से व्यक्ति अपने जीवन के अंधकारमय समय में भी मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बनाये रखता है। देवी ब्रह्मचारिणी प्रेम और निष्ठा, ज्ञान और बुद्धि का भी  प्रतीक हैं। 

माँ ब्रह्मचारिणी को लगाया जाने वाला भोग 

देवी ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बनी हुई मिठाइयां बेहद ही प्रिय होती है इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन विशेष तौर पर मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग लगाना शुभ रहता है। आप चाहें तो इस दिन माँ को मिश्री (मिसरी), शक्कर, और पंचामृत भी भोग रूप में चढ़ा सकते हैं। इसके अलावा आप देवी को सिंघारे का हलवा या कच्चे केले की बर्फी का भी भोग अर्पित कर सकते हैं।

नवरात्रि के दूसरे दिन पहनने के लिए रंग 

हरा, लाल, सफेद, पीला 

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से इन राशियों को होगा लाभ

मिथुन राशि, कन्या राशि, मेष राशि, वृश्चिक राशि 

देवी ब्रह्मचारिणी का पसंदीदा फूल

गुलदाउदी (Chrysanthemum)

देवी ब्रह्मचारिणी का पसंदीदा आभूषण

रुद्राक्ष देवी ब्रह्मचारिणी पसंदीदा आभूषण है। 

नवरात्रि के दूसरे दिन किये जाने वाले दान और अन्य अनुष्ठान 

इस दिन यदि आप सच्ची श्रद्धा और भक्ति से गरीबों और ज़रुरतमंदों को फल का दान करते हैं तो इससे आपको माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा इस दिन माता की चौकी का आयोजन भी बहुत शुभ माना जाता है।

माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र 

 दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु|

 देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

नवरात्रि में अवश्य अपनाएं विवाह योग मज़बूत करने के ज्योतिषीय उपाय

नवरात्रों के दौरान किये जाने वाले ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से व्यक्ति के जीवन में जल्द ही शुभ फलों की प्राप्ति होने के साथ-साथ विवाह के योग भी बनने लगते हैं। तो आइए जान लेते हैं ज्योतिषशास्त्र के अनुसार क्या है वो उपाय:

  • नवरात्रि के दौरान किसी मंदिर में जाएं और यहां माता पार्वती और भगवान शिव पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद दोनों की पंचोपचार विधि से पूजन करें। पूजा करने के बाद शिव और पार्वती मां का मौली से गठबंधन कर दें और शीघ्र विवाह होने की कामना मांगे।
  • जिन लोगों के जीवन में विवाह में किन्हीं कारणवश विलंब हो रहा है या जिन कन्याओं को मनोवांछित वर की कामना हो उन्हें नवरात्रि में मां कात्यायनी की विशेष पूजा अर्चना करने की सलाह दी जाती है।
  • विवाह में आ रही किसी भी प्रकार की बाधा या परेशानी को दूर करने के लिए गौरी माता की पूजा करना भी विशेष फलदाई रहता है। रामायण में उल्लेखित एक किस्से के अनुसार माता सीता ने भी विवाह से पूर्व गौरा (गौरी) माता की पूजा अर्चना की थी और तभी उन्हें वर के रूप में प्रभु श्रीराम प्राप्त हुए थे।
  • इसके अलावा जिन युवकों को मनचाही जीवनसाथी प्राप्त करनी है उन्हें नवरात्रि के दौरान स्नानादि करने के बाद दुर्गा सप्तशती में दिए गए निम्नलिखित स्त्रोत का रुद्राक्ष की माला से जाप करने की सलाह दी जाती है।
    श्लोक:
    पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।
    तारिणींदुर्गसं सारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥
  • इसके अलावा शीघ्र विवाह के योग प्रबल करने के लिए किसी मंदिर में अनार का वृक्ष लगाएं और रोजाना उसकी देखभाल करें और उसमें जल डालें।

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रत्न को क्रियाशील करके पाएं शुभ परिणाम 

नवरात्रि में मां ब्रह्मचारिणी की असीम कृपा अपने जीवन में प्राप्त करने के लिए रत्न एक और बेहद ही उपयुक्त और फलदाई साधन बताये जाते हैं। हालांकि सलाह दी जाती है कि कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी विद्वान और जानकार ज्योतिषी से परामर्श कर लें और तब ही रत्न धारण करें। 

नवरात्रि दिन रत्न प्राप्त होने वाला फल 
नवरात्रि दूसरा दिनमूंगा रत्न/पन्ना पन्ना: बुद्धि और ज्ञान बढ़ाने के लिए।, लाल मूंगा: सहस में वृद्धि के लिए, दुश्मनों के नाश के लिए और विवाह सम्बंधित परेशानियों को दूर करने के लिए 

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रत्न धारण करने की विधि 

  • रत्न हमेशा किसी ज्योतिषी से परामर्श करने के बाद ही धारण करें। 
  • ज्योतिषी द्वारा बताए गए रत्न सही वजन और क्वालिटी सुनिश्चित करने के बाद ही धारण करें। 
  • आपका रत्न असली है या नकली इस बात की भी उचित पहचान कर लें। इसके लिए सलाह यही दी जाती है कि रत्न हमेशा किसी अच्छी जगह से ही खरीदें। यदि आप प्रयोगशाला से प्रमाणित रत्न ख़रीदना चाहते हैं, तो आप यहां अपना ऑर्डर कर सकते हैं: रत्न – लैब सर्टिफिकेट के साथ।
  • रत्न धारण करने से पहले उस रत्न से संबंधित ग्रह की पूजा आदि करें। 
  • रत्न को गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें और फिर शुभ मुहूर्त में ही रत्न धारण करें। 
  • इसके अलावा इस बात की भी जानकारी लेने की सलाह दी जाती है कि आपको कौन सी धातु में रत्न पहनना है।

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