जानिए क्या है नवरात्रि के पीछे की पौराणिक कथा और क्यों मनाते हैं एक साल में दो नवरात्रि

पूरे देश में चैत्र नवरात्रि को लोग बेहद हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं। हर कोई यथा शक्ति इस बात के प्रयत्न में जुटा हुआ है कि माता को कैसे प्रसन्न किया जाये। घरों और मंदिरों में माता के भक्त घटस्थापना कर माँ की पूजा अर्चना कर रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में संस्कृतियों के हिसाब से अलग-अलग तरीके से नवरात्रि मनाई जा रही है। लेकिन इन सब के बावजूद इन सब की आस्था सिर्फ एक ही है और वो है माँ दुर्गा में।

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि मनाई क्यों जाती है? और क्या आपको पता है कि माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध क्यों किया था?  साथ ही क्या आपको पता है कि नवरात्रि साल में दो बार क्यों मनाई है? अगर नहीं पता है तो आज हम इस लेख में आपको इन सारी बातों की ही जानकारी देने वाले हैं।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

दरअसल नवरात्रि को लेकर एक पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार महिषासुर नामक एक असुर ने एक बार भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही कठिन तप किया। उसके तप से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा। जिसके फलस्वरूप महिषासुर ने भगवान ब्रह्मा से अमरत्व का वरदान मांग लिया। लेकिन भगवान ब्रह्मा ने उसकी यह बात नहीं मानी और उससे कुछ और मांगने को कहा। तब महिषासुरने भगवान ब्रह्मा से यह वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु सिर्फ और सिर्फ किसी स्त्री के हाथों ही हो। भगवान ब्रह्मा ने महिषासुर को यह वरदान दे दिया।

महिषासुर ने ब्रह्मा से वरदान मिलने के बाद देवताओं पर ही हमला कर दिया। समस्त देवता एकजुट होकर भी उसका सामना करने में असमर्थ हो रहे थे। नतीजन स्वर्ग पर भी महिषासुर का आधिपत्य हो गया। ऐसे में सभी देवताओं ने मिल कर आदि शक्ति की आराधना की जिससे एक तेज उत्पन्न हुआ और उस तेज से माँ दुर्गा की उत्पत्ति हुई।

माँ दुर्गा की सुंदरता को देख महिषासुर ने उनसे विवाह की इच्छा जताई लेकिन माता ने शर्त रखी कि अगर महिषासुर उन्हें युद्ध में हरा दे तो वह उनसे विवाह कर लेंगी। महिषासुर राजी हो गया और फिर नौ दिनों तक देवी और महिषासुर के बीच युद्ध हुआ जिसके अंत में माता ने महिषासुर का वध कर सभी देवताओं और प्राणियों को उससे मुक्ति दिलाया। इसी पाप पर पुण्य की जीत के स्वरूप में हम हर साल नवरात्रि मनाते हैं।

नवरात्रि साल में दो बार क्यों मनाई जाती है?

दरअसल एक साल में चार नवरात्रि आती है। इनमें से दो नवरात्रि गुप्त होती हैं और दो नवरात्रि प्रत्यक्ष। इनमें से पहली नवरात्रि हिन्दू वर्ष के पहले महीने यानी कि चैत्र में पड़ता है। दूसरी नवरात्रि हिन्दू वर्ष के चौथे महीने यानी कि आषाढ़ में होती है। तीसरी आश्विन में और चौथी नवरात्रि हिन्दू वर्ष के ग्यारहवें यानी कि माघ महीने में होती है। साल में चार नवरात्रों में से चैत्र नवरात्रि और अश्विन नवरात्रि को सबसे प्रमुख माना गया है और इन्हें प्रत्यक्ष नवरात्रि कहा गया है। वहीं माघ और आषाढ़ में पड़ने वाले नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि माना जाता है। 

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साल के दो नवरात्रों के पीछे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। दरअसल प्रत्यक्ष नवरात्रि हमेशा संधिकाल के समय पड़ती है। संधिकाल उस समय को कहा जाता है जब मौसम बदल रहा होता है और नए मौसम का जीवन में प्रवेश हो रहा होता है। माना जाता है कि इस दौरान हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। इस वजह से नवरात्रि के दौरान उपवास और फलाहार की परंपरा रखी गयी है।

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