नवरात्रि के सातवें दिन करें इस विधि और मुहूर्त में माँ कालरात्रि की पूजा!

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शारदीय नवरात्रि का सातवाँ दिन विशेष महत्व रखता है। सप्तमी यानि नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के माँ कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन से देशभर के सभी मंदिरों और शक्ति पीठों में मां दुर्गा के भक्तों और श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम में इस दिन को महासप्तमी दुर्गा पूजा उत्सव का पहला दिन मनाया जाता है। ऐसे में इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। मां के कालरात्रि रूप को शुभंकरी देवी, काली व चामुण्डा भी कहा जाता है। अपने नाम ‘काल’ की ही तरह ही मां दुर्गा का यह रूप बेहद आक्रामक व भयभीत करने वाला होता है। माँ कालरात्रि को पापियों का नाश करने वाली देवी भी कहा जाता हैं। मान्यता है कि जो भी जातक इस दिन मां की कृपा प्राप्त कर लेता हैं, तो उससे सारी बुरी व नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती हैं। तो चलिए आपको इस लेख के माध्यम से नवरात्रि के सातवें दिन की जाने वाली पूजा की सभी जानकारी देते हैं-   

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नवरात्रि सप्तमी पूजा मुहूर्त

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का प्रारंभ 22 अक्टूबर दिन गुरुवार, प्रातः 07 बजकर 42 मिनट से हो रहा है, जो 23 अक्टूबर दिन शुक्रवार को प्रातः 06 बजकर 58 मिनट तक है। ऐसे में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना शुक्रवार की सुबह होगी।

माँ का नाम कालरात्रि क्यों पड़ा?

मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली देवी हैं और इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने असुर रक्तबीज का वध करने के लिए अपने तेज से माँ कालरात्रि को उत्पन्न किया था। देवी दुर्गा का तेज इतना ज़्यादा था कि उनके इस स्वरूप यानि देवी कालरात्रि का रंग काला पड़ गया। 

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ऐसा है माँ कालरात्रि का स्वरूप

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा का विधान है। अगर इनके स्वरूप की बात करें तो मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गदहा) है। मां का रंग घने अंधकार की तरह ही बेहद काला होता है और मां के बाल बिखरे हैं। मां कालरात्रि की तीन आँखें हैं, जिनका रंग अग्नि की तरह लाल और बेहद डरावना होता है। गले में माँ ने एक सफेद माला धारण की है। मां के इस रूप में उनकी साँस से अग्नि उत्पन्न हो रही होती है, जिससे वो पापियों का नाश करती हैं। मां कालरात्रि की चार भुजाएँ हैं, जिनमें से उन्होंने अपने दोनों दाहिने हाथ से अभय और वर मुद्रा धारण की हैं। जबिक दोनों बाएँ भुजाओं में क्रमशः तलवार और खड़ग सुशोभित है और इन्ही से माना जाता है कि मां असुरों का संहार कर अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करती हैं। 

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मां कालरात्रि की पूजा में करें इस मंत्र का जाप

देवी कालरात्रि की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप ज़रूर करें, इससे माता जल्द ही प्रसन्न होती है।

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।

जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तु ते।।

बीज मंत्र – ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। 

ऐसे करें कालरात्रि माँ की पूजा

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की सच्चे मन से आराधना करने पर हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और साथ ही जातक को जीवन में सफलता मिलती है। नवरात्रि के सातवें दिन की पूजा विधि बेहद सामान्य है, लेकिन जो लोग तंत्र पूजा करते हैं उन्हें विद्वान पंडितों के बताए दिशा-निर्देश का पालन करना चाहिए-

  • सप्तमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और बैंगनी रंग के वस्त्र पहनकर पूजा की शुरुआत करें। 
  • मां कालरात्रि की पूजा से पहले कलश देवता यानि कि भगवान गणेश का विधिवत तरीके से पूजन करें।
  • भगवान गणेश को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, अर्पित कर उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करा कर,  देवी को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को पहले भगवान गणेश को भोग लगाएँ। 
  • प्रसाद के बाद आचमन और फिर पान, सुपारी भी भेंट करें। 
  • अब कलेश देवता का पूजन करने के बाद नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें।
  • इन सभी की पूजा किए जाने के बाद ही मां कालरात्रि की पूजा शुरू करें।
  • माँ की पूजा के लिए सबसे पहले अपने हाथ में एक फूल लेकर मॉं कालरात्रि का ध्यान करें।
  • इसके बाद माँ कालरात्रि का पंचोपचार पूजन करें और लाल फूल, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर आदि अर्पित करें।
  • घी या कपूर जलाकर माँ कालरात्रि की आरती करें।
  • अब अंत में मां के मन्त्रों का उच्चारण करें और उनसे अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

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इस रंग का वस्त्र पहनकर करें माँ कालरात्रि की पूजा 

नवरात्रि में सप्तमी के दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। कालरात्रि माता संपूर्ण सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। माँ कालरात्रि का स्वरूप काजल के जैसा श्याम वर्ण है। नवरात्रि की पूजा में इस दिन तंत्र साधना करने वाले जातक काले रंग का वस्त्र धारण करते हैं और ,सामान्य पूजा करने वाले अन्य लोगों को बैंगनी रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन साधकों का ध्यान सहस्रार चक्र में होता है, जिसका रंग बैंगनी है, इसलिए बैंगनी रंग इस दिन के लिए हर तरह से शुभ है।

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माँ कालरात्रि की पूजा से होने वाले लाभ

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा करने और इस दिन व्रत रखने से भय,दुर्घटना और रोगों का नाश होता है। माना जाता है कि माता के इस स्वरूप की उपासना करने से  नकारात्मक ऊर्जा या फिर तंत्र-मंत्र का असर नहीं होता। इनकी उपासना शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करने के लिए बेहद शुभ होती है। ज्योतिष के अनुसार माँ कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं, इसीलिए इनकी पूजा करने से शनि ग्रह के दुष्प्रभाव कम होते हैं। माँ कालरात्रि की उपासना करने वालों को यम, नियम, संयम का पूर्ण पालन करते हुए, मन, वचन व काया की पवित्रता रखनी चाहिए। देवी कालरात्रि की पूजा करने से काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे मानसिक दोष दूर हो जाते हैं। माँ कालरात्रि की उपासना से होने वाले शुभ फलों की गणना नहीं की जा सकती।

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