14 मार्च 2021 को है मीन संक्रांति, जानिये कौन-कौन से कार्य होते हैं वर्जित

हिन्दू धर्मग्रंथों व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर महीने सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं। इस भ्रमण को ही संक्रांति कहते हैं और जिस भी राशि में सूर्य देव प्रवेश करते हैं, उसी राशि की संक्रांति मनाई जाती है। इस तरह से हिन्दू धर्म में 12 संक्रांति होती है और सभी संक्रांतियों  का अपना विशेष महत्व है। 

मीन संक्रांति 2021 का शुभ मुहूर्त

तिथि: 14 मार्च 2021 

दिन: रविवार

शुभ समय: 

कब से: शाम के 6 बजकर 18 मिनट से

कब तक: शाम के 6 बजकर 27 मिनट तक 

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क्या है मीन संक्रांति और क्यों है इसका ख़ास महत्व?

हिन्दू धर्म के अनुसार मीन संक्रांति हिन्दू कैलेण्डर की सबसे आखिरी संक्रांति होती है। यही वजह है कि, हिन्दू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इसका विशेष महत्व है। पूरे देश के विभिन्न हिस्सों में इसे धूमधाम से मनाया जाता है। ख़ास कर के उड़ीसा में इस संक्रांति को आम लोग बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं। इस साल मीन संक्रांति 14 मार्च 2021 को रविवार के दिन पड़ रही है। 

इस दिन सूर्य भगवान को अर्घ्य देने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। हर संक्रांति की ही तरह मीन संक्रांति में भी नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान व पवित्र नदियों में स्नान कर लेने मात्र से ही पूर्व जन्म के सारे पाप धुल जाते हैं। चूंकि सूर्य देवता के मीन राशि में परिभ्रमण करते ही खरमास शुरू जाता है. ऐसे में हरेक तरह के शुभ कार्य पूरे महीने वर्जित तो होते ही होते हैं लेकिन, इसके साथ ही साथ कई ऐसे कार्य भी हैं, जिनको इस दिन करना पूरी तरह से वर्जित है। 

ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि मीन संक्रांति के पहले दिन ऐसे कौन कौन से कार्य हैं, जिन्हें करने पर पूरी तरह से मनाही है। 

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मीन संक्रांति 2021 में वर्जित कार्य

मीन संक्रांति में लगभग सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस दिन बेहद ख़ास शुभ कार्य जैसे कि विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार तो वर्जित हैं ही, इसके साथ ही साथ आपको गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य को करने की भी मनाही होती है। इन कार्यों के अलावा नामकरण, किसी भी तरह का व्रत, पढ़ाई की शुरुआत करने, कर्णछेदन और वास्तु पूजन आदि जैसे कार्यों को भी करना इस दिन वर्जित बताया गया है।

मीन संक्रांति 2021 में कौन से कार्य करें

मीन संक्रांति के दिनों में सूर्य भगवान की उपासना को काफी ही महत्व दिया  गया है. खास तौर से वैसे लोग जिनकी कुंडली में सूर्य शुभ नहीं हैं। 

मिलता है दान-पुण्य करने से ये शुभ फल

मीन संक्रांति के दौरान दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कुछ भी दान करने पर उसका कई गुना फल प्राप्त है. दान करने से पितृ दोष दूर होते हैं, कुंडली में बन रहे अशुभ योगों का शुभ फल प्राप्त होता है, अनजान वश किये गए अशुभ कार्य के दोष दूर होते हैं, रोग, शोक इत्यादि दूर होते हैं। 

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