मत्स्य जयंती पर जानिए भगवान विष्णु के ‘मछली’ रूप से जुड़ी अनोखी कथा

मत्स्य जयन्ती चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जो की इस वर्ष 27 मार्च 2020, शुक्रवार को मनाया जायेगा। इस दिन विष्णु जी के मत्स्य अवतार की पूजा की जाती है। बताया जाता है कि इसी दिन विश्व के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने मध्याह्नोत्तर बेला में, पुष्पभद्रा तट पर मत्स्य (मछली का रूप) रूप धारण किया था।

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ऐसे में इस दिन से जुड़ी मान्यता है कि जो कोई भी व्यक्ति इस दिन, भगवान मत्स्य के व्रत का संकल्प लेता है और फिर मंत्रों से मत्स्य रूप में भगवान विष्णुजी की पूजा कर उनके प्रकट होने की कथा सुनता है, उसपर निश्चित ही भगवान विष्णु अपनी कृपा बनाये रखते हैं। इसके अलावा वो इंसान संपूर्ण ज्ञान-विज्ञान से संयुक्त भी हो जाता है।

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ी पौराणिक कथा 

ये बात तो सभी जानते हैं कि भगवान विष्णु इस सृष्टि के पालनकर्ता हैं। इस संसार में जब-जब कोई विपदा आती है तब भगवान विष्णु इस धरती पर अवतार लेकर सृष्टि को अधर्म से बचाते हैं। ऐसे में एक बार ब्रह्मा जी की असावधानी की वजह से ही हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को निगल लिया था। दैत्य के ऐसा करने की वजह से पूरी दुनिया में ज्ञान समाप्त हो गया और, धरती पर हर तरफ पाप और अधर्म फ़ैल गया। उस वक़्त सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था।

मत्स्य के प्रकट होने की सम्पूर्ण कथा 

बहुत समय पहले की बात है जब सत्यव्रत मनु नाम का एक राजा हुआ करता था। सत्यव्रत बहुत दयालु स्वभाव के थे। एक दिन वो रोज़ाना की  ही तरह नदी में स्नान के दौरान अपनी अंजुली में जल भरते हैं तो उन्हें उसमें एक छोटी सी मछली नज़र आती है। राजा ने मछली को देखा तो उसे वापिस जल में छोड़ने का निश्चय किया। लेकिन तभी छोटी सी मछली ने राजा से अनुरोध किया कि, “हे राजन, इस नदी में काफ़ी बड़े जीव हैं जो अन्य छोटे जीवों को मारकर खा जाते हैं। अतः कृपया करके मेरे प्राण की रक्षा कीजिये और मुझे बचा लीजिये।”

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मछली की ऐसी बात सुनकर सत्यव्रत को बहुत दया आ गयी और उन्होंने उस मछली को अपने कमंडल में डाल दिया। इसके बाद सत्यव्रत उस मछली को अपने घर ले आये लेकिन एक ही रात में मछली का आकार इतना बढ़ गया कि उसके लिए कमंडल भी छोटा पड़ने लगा। तब राजा ने मछली को दूसरे पात्र में रखा, लेकिन कुछ ही समय में वो मछली उस पात्र के आकार की हो गयी। तब सत्यव्रत ने उस मछली को एक नदी में छोड़ दिया लेकिन मछली का आकार वहां भी बढ़ते ही जा रहा था। अंतः राजा ने मछली को समुद्र में छोड़ने का फैसला किया लेकिन, उस मछली के लिए समुद्र भी छोटा पड़ गया। तब राजा को समझ आ गया कि ये कोई मामूली मछली नहीं है।

राजा ने तब मछली से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि, “आप कौन हैं? कृपा कर के मुझे ये बताने का कष्ट कीजिए।” राजा की बात सुनकर मछली ने जवाब दिया कि, “तब भगवान विष्णु (मत्स्य अवतार में) ने राजा सत्यव्रत से कहा कि हे राजन, हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुराकर नष्ट कर दिया है, जिससे धरती पर अधर्म बढ़ गया है और पाप चरम सीमा पर बढ़ गया है, इसलिए मैं इसका अंत करने के लिए मत्स्य रूप में आया हूँ। आज से ठीक सात दिन बाद पृथ्वी पर प्रलय आएगी जिससे सबकुछ नष्ट हो जायेगा, चारों तरफ से धरती पानी में डूब जाएगी और इसके बाद नए विश्व का जन्म होगा।

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