द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी : जानें देवी के इस रूप की महिमा और पूजा विधि !

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और आज पूजा का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन विशेष रूप से दुर्गा माँ के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से देवी माँ के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। हर दिन उनके एक अलग रूप की उपासना की जाती है। आज नवरात्रि के दूसरे दिन देवी माँ के ब्रहमचारणी रूप की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। आइये जानते हैं देवी माँ के इस रूप की महिमा और पूजा विधि के बारे में।

ऐसा है माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरुप 

दुर्गा माँ के द्वितीय अवतार के रूप में माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। देवी माँ के स्वरुप की बात करें तो, सफ़ेद रंग की साड़ी पहने माता के एक हाथ में माला और दूसरे में कमंडल है। माता के इस रूप को ब्रह्मा का स्वरुप भी माना जाता है। आज नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की मिलती है और देवी माँ की कृपा सदा बनी रहती है। देवी माँ का ये स्वरुप दूसरों को इस बात का संदेश भी देती है की जिस प्रकार से उन्होनें भगवान् शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था, उसी प्रकार से आम इंसानों को भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तब तक प्रयास करनी चाहिए जब तक की वो उसे प्राप्त ना कर ले। 

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माता ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व 

माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन करने से सर्वत्र सिद्धि की प्राप्ति होती है। माता के इस रूप को वैराग, संयम, सदाचार, त्याग और तप का प्रतीक माना जाता है। देवी माँ का ये रूप बेहद भव्य और तेजस्वी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि, नवरात्रि के दूसरे दिन यदि देवी माँ के इस रूप की पूजा की जाए तो इससे भक्तों को जीवन में आने वाले सभी दुखों से निजात मिलता है। देवी माँ के इस रूप की आराधना करने से जीवन में सदाचार की भावना में बढ़ोतरी होती है और जिंदगी को सादगी से जीने की सीख मिलती है। 

 इस प्रकार से करें माता ब्रह्मचारिणी की पूजा 

  • आज सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत होने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। 
  • पूजा स्थल की साफ़ सफाई कर एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं, इसके बाद देवी की प्रतिमा स्थापित करें। 
  • अब देवी की प्रतिमा पर शहद, दही, दूध, चीनी और घृत अर्पित करें। 
  • माता ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए लाल रंग के फूल या कमल के फूल का ही इस्तेमाल करें। 
  • इसके बाद विधि पूर्वक धुप, दीप दिखाएं और अक्षत, कुमकुम और चंदन के प्रयोग से माता की पूजा करें। 
  • पूजा के दौरान माता रानी के मंत्र “इधाना कदपद्माभ्याममक्षमालाक कमण्डलु देवी प्रसिदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्त्मा” का जाप करें। 
  • इसके बाद देवी माँ की आरती करें और प्रसाद के रूप में फल एवं मिठाई का भोग लगाएं। 

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इस विधि से माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना कर आप भी उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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