मासिक दुर्गाष्टमी: जानें इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, और पौराणिक कथा

हर माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है। यह दिन मां भगवती को समर्पित है, इसलिए इस दिन लोग उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ लोग इस दिन सच्चे मन से मां दुर्गा का व्रत भी रखते हैं। इस व्रत या इस दिन के बारे में कोई और जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो अभी ज्योतिषियों से प्रश्न पूछें

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इस महीने  यह व्रत 26 अगस्त, बुधवार को है। दुर्गा अष्टमी के दिन दुष्टों का नाश करने और भक्तों को मनचाहा वरदान देने वाली माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा की थी। चलिए इस लेख में आपको दुर्गा अष्टमी के दिन से जुड़ी खास बातें बताते हैं

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मासिक दुर्गाष्टमी शुभ मुहूर्त और समय :

अष्टमी तिथि प्रारंभ   25 अगस्त, मंगलवार को 12:23:36 से
अष्टमी तिथि समाप्त 26 अगस्त, बुधवार को 10:41:20 तक

मासिक दुर्गा अष्टमी का महत्व 

दुर्गा अष्टमी का व्रत हर महीने में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। चूँकि दुर्गाष्टमी हर महीने आती है, इसलिए इसे मासिक दुर्गाष्टमी कहा जाता है। साल में आने वाली सभी दुर्गा अष्टमी में सबसे महत्वपूर्ण आश्विन माह के शारदीय नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली अष्टमी को माना जाता है। यह दुर्गा अष्टमी ‘महाष्टमी’ कहलाती है। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि कोई जातक सच्चे मन से मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा का व्रत रखकर उनकी पूजा करे, तो मां उस व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उसे असीम कृपा की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। 

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मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत पूजा विधि

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सबसे पहले स्नान करें, फिर साफ वस्त्र पहनकर मां दुर्गा के इस व्रत का संकल्प ले। 
  • अब जिस जगह पूजा करनी है, वहां अच्छे से सफाई कर लें और उस स्थान पर लाल रंग का कपड़ा बिछा-कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। 
  • इसके बाद मां दुर्गा को अक्षत, सिन्दूर, लाल फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं। 
  • अब मां के सामने धूप, दीप जलाकर सच्चे मन से मां दुर्गा अष्टमी और  दुर्गा चालीसा का पाठ करें। 
  • बाद में व्रत कथा सुने और अंत में मां की आरती उतारते हुए उनका आशीर्वाद लें। 

माँ की प्रसन्नता हासिल करने के लिए करें यह उपाय 

आरती खत्म होने के बाद 9 छोटी कन्याओं को आमंत्रित करें। नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी अवश्य पूजा में शामिल करें। इसके बाद उनके पैरों को पानी से अच्छे से धोएं और  प्रसाद के रूप में पूरी व् हलवे का भोजन कराएं।

हालाँकि कोरोना के चलते अगर कन्याओं को आप घर नहीं बुला सकते हैं तो नौ कन्याओं के लिए भोजन पहले से निकाल लें। फिर उस भोजन को किसी मंदिर में दान कर दें। आप चाहें तो यह भोजन किन्ही ज़रूरतमंद नौ बच्चियों को भी दान कर सकते हैं और साथ ही अपने सामर्थ्य अनुसार आप उन्हें ज़रूरत की कुछ वस्तुओं भी भेंट कर सकते हैं।

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मासिक दुर्गा अष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय में असुरों के राजा दंभ को पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम उसने महिषासुर रखा। महिषासुर बचपन से ही अमर होने की इच्छा रखता था। अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए उसने ब्रह्मा जी की तपस्या आरंभ कर दी। महिषासुर द्वारा की गई कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे मन-चाहा वरदान मांगने को कहा। उसने ब्रह्मा जी से खुद को अमर कर देने का वरदान माँगा। लेकिन ब्रह्मा जी ने महिषासुर की इस मांग को टाल दिया और इसके बदले कोई दूसरा वरदान मांगने को कहा। महिषासुर ने ब्रह्मा जी से कहा “ मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि कोई दैत्य, मानव या देवता, कोई भी मेरा वध ना कर पाए, मेरी मृत्यु किसी स्त्री के हाथ से हो।” 

ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दे दिया, जिसके बाद वह अहंकार से अंधा हो गया और अपनी सेना के साथ पृथ्वी लोक पर आक्रमण कर दिया। पृथ्वी पर चारों तरफ से हाहाकार मचने लगा। पृथ्वी और पाताल पर विजय हासिल करने के बाद महिषासुर ने इन्द्रलोक पर भी आक्रमण कर दिया, और देव-राज इन्द्र को पराजित कर स्वर्ग पर भी कब्ज़ा कर लिया। महिषासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवी-देवता त्रिदेवों के पास सहायता मांगने पहुंचे। विष्णु जी की सलाह के बाद सभी देवताओं ने मिलकर देवी शक्ति को सहायता के लिए पुकारा। सभी देवताओं के शरीर में से निकले तेज से एक अत्यंत खूबसूरत सुंदरी मां आदि-शक्ति प्रकट हुईं। मां आदि-शक्ति के रूप और तेज से सभी देवता भी चकित हो गए।

स्वर्ग में देवी दुर्गा को युद्ध के लिए तैयार किया जाने लगा। हिमवान ने देवी दुर्गा को सवारी के तौर पर सिंह दिया। वहाँ मौजूद सभी देवताओं ने भी अपना एक-एक अस्त्र-शस्त्र मां को सौंप दिया। देवी का अत्यंत सुन्दर रूप देखकर महिषासुर ने अपने एक दूत के जरिए उन तक विवाह का प्रस्ताव भेजा। उसकी इस हरकत से देवी भगवती अत्यंत क्रोधित हुईं, और  महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। युद्ध की शुरुआत हुई और मां दुर्गा ने महिषासुर की सेना का सर्वनाश कर दिया। यह युद्ध पूरे नौ दिनों तक चला और अंत में देवी भगवती ने अपने चक्र से महिषासुर का सिर काट उसका वध कर दिया। माना जाता है कि जिस दिन मां भगवती ने तीनों लोकों को महिषासुर से मुक्ति दिलाई उस दिन से ही दुर्गा अष्टमी का व्रत  रखा जाने लगा। 

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आशा करते हैं मासिक दुर्गाष्टमी के बारे में इस लेख में दी गई जानकारी आपको पसंद आयी होगी। एस्ट्रोसेज से जुड़े रहने के लिए आप सभी का धन्यवाद। 

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