शनि होंगे मार्गी: जानें सभी बारह राशियों पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव

11 अक्टूबर सोमवार के दिन शनि ग्रह मकर राशि में अपनी वक्री चाल बदलकर मार्गी होने जा रहा है। ग्रहों के मार्गी होने का अर्थ होता है जब वह अपनी उल्टी चाल से सीधी चाल में आ जाते हैं। ऐसे में शनि मार्गी का अर्थ हुआ कि, शनि ग्रह जो अब तक मकर राशि में उल्टी स्थिति में था अब वह 11 अक्टूबर से सीधी स्थिति में हो जाएगा।

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ज्योतिष की दुनिया में ग्रहों का कोई भी परिवर्तन बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है। इससे व्यक्ति के जीवन में अवश्य ही कोई ना कोई बदलाव या परिवर्तन देखने को मिलता है। तो आइये जानते हैं कि मकर राशि में शनि का मार्गी होना सभी बारह राशियों के जीवन में क्या बड़े और अहम बदलाव लेकर आएगा।

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शनि मकर राशि में मार्गी: समय 

शनि ग्रह 11 अक्टूबर 2021 को सुबह 3 बजकर 44 मिनट पर मकर राशि में मार्गी हो जाएगा और 29 अप्रैल 2022 तक यानी कुंभ राशि में गोचर करने तक यह इसी स्थिति में रहेगा।

ज्योतिष में शनि ग्रह और मार्गी शनि का महत्व 

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का विशेष महत्व बताया गया है। शनि ग्रह को आयु, दुख, पीड़ा, तकनीकी, विज्ञान, जेल, कर्मचारी, सेवक, आदि का कारक माना गया है। इसके अलावा मकर और कुंभ राशि का स्वामित्व भी शनि देव को प्राप्त है। जहां तुला राशि में शनि उच्च का होता है तो वहीं मेष इसकी नीच राशि मानी गई है। 

सभी नौ ग्रहों में शनि एक ऐसा ग्रह है जिसका अक्सर लोग नाम सुनते ही भयभीत होने लगते हैं। उन्हें लगता है शनि ग्रह का उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, हालांकि ऐसा नहीं है। शनि ग्रह एक क्रूर ग्रह अवश्य है लेकिन यह व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार फल देता है। यही वजह है कि शनि जिन व्यक्तियों की राशि में उच्च का होता है उन्हें रंक से राजा बनते देर नहीं लगती है।

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शनि गोचर और शनि का मार्गी होना 

गोचर का अर्थ होता है ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाना। सभी नवग्रहों में शनि एक ऐसा ग्रह है जिसकी गोचरीय अवधि सबसे ज्यादा होती है। यह एक राशि में तकरीबन ढाई वर्षों यानी 31 महीनों तक रहता है और फिर अपना राशि परिवर्तन करता है। इसके अलावा कई बार राशि परिवर्तन ना करते हुए केवल शनि वक्री या मार्गी भी हो जाता है।

वक्री होना अर्थात सीधी स्थिति से उलटी स्थिति में हो जाना और मार्गी का अर्थ होता है उलटी स्थिति से वापिस सीधी स्थिति में आ जाना।

शनि ग्रह के अशुभ होने के लक्षण और उपाय 

शनि ग्रह के अशुभ होने के लक्षण:

  • मकान या घर का हिस्सा गिर जाना या क्षतिग्रस्त हो जाना। 
  • घर या दुकान में अचानक से आग लग जाना। 
  • धन या संपत्ति का नाश होने लगना। 
  • कानूनी और आपराधिक मामलों में जेल हो जाना। 
  • जुए, सट्टे, और शराब की लत लग जाना।

कुंडली में शनि को मज़बूत करने और साकारात्मक फल प्राप्त करने के उपाय: 

  • शनि की वक्री दृष्टि से बचने के लिए भगवान हनुमान की पूजा करें। रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें। 
  • काले कुत्ते को रोटी खिलाएं और यदि आप उन्हें पालते हैं तो यह और ज्यादा शुभ फलदाई साबित हो सकता है। 
  • मछलियों को दाना डालें। 
  • शराब, मांस, मछली, अंडे, आदि से परहेज करें। 
  • मजदूरों, मछली और भैंस की सेवा करें।

अब आगे बढ़ते हैं और जानते हैं शनि मकर राशि में मार्गी का सभी बारह राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव:

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मार्गी शनि का भविष्यफल 

मेष राशि 

मेष राशि के जातकों के लिए शनि उनके दसवें भाव यानी कि कर्म भाव में मार्गी होगा जिसकी वजह से मेष राशि के जातकों को पेशेवर जीवन में …..(विस्तार से पढ़ें)

वृषभ राशि 

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि योग कारक ग्रह है और यह वृषभ राशि के जातकों के नौवें और दसवें भाव का स्वामी है और इस वर्ष यह आपके नौवें भाव में मार्गी होगा। इस दौरान…..(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि 

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि उनके आठवें भाव यानी कि विरासत, गुप्त शिक्षा और रहस्य आदि के भाव में मार्गी होंगे। मिथुन राशि के वह छात्र जो रिसर्च…..(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि 

शनि कर्क राशि के जातकों के सातवें भाव में मार्गी होंगे। चूंकि शनि का आपके जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में इस दौरान आप अपने आस-पास के माहौल को लेकर थोड़ा…..(विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि 

शनि सिंह राशि के जातकों के छठे भाव यानी कि रोग, प्रतिस्पर्धा और शत्रु के भाव में स्थित रहेगा। ऐसे में इस दौरान आप अपने कार्यक्षेत्र में अपने काम को लेकर अधिक …..(विस्तार से पढ़ें)

कन्या राशि 

कन्या राशि के जातकों के लिए शनि उनके पांचवें भाव यानी कि प्रेम, शिक्षा और संतान के भाव में मार्गी होगा। जो जातक परिवार नियोजन की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस दौरान शुभ …..(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि 

तुला राशि के जातकों की कुंडली में शनि को दो महत्वपूर्ण भावों अर्थात चौथे भाव यानी कि सुख के भाव और पांचवें भाव यानी कि संतान के भाव का स्वामी माना जाता है। इस दौरान…..(विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक राशि 

शनि वृश्चिक राशि के जातकों के तीसरे भाव यानी कि बल, भाई-बहन और प्रयास के भाव में मार्गी होगा। ऐसे में यह अवधि नौकरीपेशा जातकों के लिए अनुकूल सिद्ध हो सकती है। इस दौरान …..(विस्तार से पढ़ें)

धनु राशि 

इस दौरान शनि धनु राशि के जातकों के दूसरे भाव यानी कि परिवार, धन और वाणी के भाव में मार्गी होंगे। शनि की मार्गी स्थिति धनु राशि के जातकों की आर्थिक स्थिति के लिहाज से…..(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि 

मकर राशि के जातकों के लिए शनि उनकी राशि यानी कि मकर राशि के लग्न भाव में मार्गी होंगे जो कि मकर राशि के जातकों के जीवन में चल रही साढ़े साती में थोड़ी राहत …..(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि 

कुंभ राशि के जातकों के लिए शनि उनके बारहवें भाव में मार्गी होगा। इस दौरान जो जातक विदेश जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस कार्य के लिए थोड़ा और इंतज़ार करना पड़ …..(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि 

मीन राशि के जातकों के लिए शनि उनके ग्यारहवें भाव यानी कि आय और लाभ के भाव में मार्गी होगा। इस दौरान व्यवसायी जातकों की आमदनी में बढ़ोतरी …..(विस्तार से पढ़ें)

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