महंत नरेंद्र गिरी का निधन: केपी ज्योतिष खोलेगी उनके असमय निधन की वजह

हाल ही में हमनें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महंत श्री नरेंद्र गिरि जी के निधन की दुखद खबर सुनी। इस खबर ने बहुत से लोगों के पैरों तले जमीन खिसकाने का काम किया है। जहाँ कई लोग इसे हत्या मान रहे हैं वहीं बहुत से अन्य लोग इसे आत्महत्या भी मान रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस को महंत श्री नरेंद्र गिरी जी के शव के साथ सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने शिष्य आनंद गिरी को किया है गिरफ्तार  

पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वाकई में आत्महत्या थी या सुनियोजित हत्या। इसी सन्दर्भ में उनके शिष्य आनंद गिरि को अब गिरफ्तार कर लिया गया है और कई सिद्धांत लोगों के सामने आ रहे हैं। स्वर्गीय महंत श्री नरेंद्र गिरी जी के करीबी सहयोगियों और अन्य लोगों को यकीन है कि यह एक हत्या है और श्री नरेंद्र गिरि जी के पास से जो  सुसाइड नोट मिला है वह उनका है ही नहीं। क्योंकि वह इतना लंबा सुसाइड नोट नहीं लिख सकते न ही उनकी पर्सनालिटी ऐसी थी की वे आत्महत्या करते। 

क्योंकि मैं (आचार्य रमन) खुद एक ज्योतिषी हूँ ऐसे में मेरे जहन में भी यह सवाल रह-रहकर कौंध रहा है कि क्या वाकई में यह एक सामान्य निधन है या इसके पीछे कोई साजिश छुपी है।

इसी संदेह को दूर करने के लिए आइये पढ़ते हैं मेरा एक निजीकृत ज्योतिषीय विशलेषण। आगे बढ़ने से पहले मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं सिर्फ कृष्णामूर्ति जी के सिद्धांतों को सामने रखकर अपना मत प्रकट कर रहा हूँ |  केपी ज्योतिष प्रणाली के आधार पर मेरी दिलचस्पी केवल यह जानने की है कि क्या यह एक आत्महत्या थी या सुनियोजित हत्या।

इसके लिए मैंने 242 के पी अंक लिया है और इससे जुड़ी कुंडली नीचे प्रदान कर रहा हूँ।

श्री गुरुजी के अनुसार आत्महत्या का नियम यह है कि यदि अष्टम भाव का उप नक्षत्र  स्वामी ऐसे गृह के नक्षत्र में हो जो बाधक -मारक भी हो और आठवें घर का कार्येष भी हो तो व्यक्ति आत्महत्या करेगा। 

  • यहां आठवें भाव का उप नक्षत्र स्वामी शनि है, यह चंद्रमा के नक्षत्र में है जो की बारहवें घर में है | लग्न के लिए शनि बाधक  या मारक नहीं है और कुंडली में 11वें भाव में भी स्थित है। इसके अलावा यह अष्टम भाव का कारक भी नहीं है इसलिए गुरुजी के अनुसार इस मामले में केपी  ज्योतिष के अनुसार आत्महत्या की आशंका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। अर्थात महंत नरेन्द्र गिरी जी ने ज्योतिषीय विशलेषण के अनुसार आत्महत्या का कदम संभवता नहीं उठाया है |
  • हत्या के लिए यदि सप्तम भाव का उप नक्षत्र स्वामी मारक बाधक है और दूसरे भाव से भी जुड़ा है और मंगल भी शामिल है तो केपी प्रणाली सिद्धांत के अनुसार हत्या की आशंका प्रबल हो जाती है।
  • यहाँ 7वें भाव का उप नक्षत्र  स्वामी बुध है। यह सप्तम में ही है। बुध मंगल ग्रह के नक्षत्र में है। बुध मारक और बाधक है और मंगल छठे भाव में स्थित दूसरे भाव का स्वामी है। इससे साफ पता चलता है कि दिवंगत महंत नरेन्द्र गिरि को जानने वाले लोग जिस बात पर शक कर रहे हैं उसके होने की ही पूर्ण संभावना है और मुमकिन है कि महंत जी की आत्महत्या असल में एक साजिश के रूप में सामने आ सकती है|

कॉल पर आचार्य रमन जी से बात करें 

खैर जो भी हो, हम कामना करते हैं कि सच जल्द ही सामने आये और ईश्वर स्वर्गीय महंत नरेंद्र गिरी जी की आत्मा को शांति दें और परम स्थान दें।

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