कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली पर कृतिका नक्षत्र का संयोग – जानें महत्व, मुहूर्त और सबकुछ!

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है जो कि इस वर्ष 27 नवंबर के दिन पड़ रही है। सिर्फ इतना ही नहीं इस दिन गुरु नानक जयंती, गंगा स्नान और देव दिवाली भी है। ऐसे में पूर्णिमा के दिन विषेशतौर पर स्नान, दान, पूजा-पाठ आदि का विशेष महत्व भी बताया गया है। 

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आज हमारे इस खास ब्लॉग में हम जानेंगे कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली पर बन रहे कृतिका नक्षत्र के संयोग के बारे में और साथ ही जानेंगे इस दिन के 3 शुभ योगों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी। साथ ही इस दिन का इतना महत्व क्यों होता है, इस दिन का शुभ मुहूर्त आदि क्या रहने वाला है इसकी सम्पूर्ण जानकारी भी आपको इस ब्लॉग के माध्यम से हम देने का प्रयत्न करेंगे।

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कार्तिक पूर्णिमा 2023: शुभ मुहूर्त

27 नवंबर, 2023 (सोमवार)

कार्तिक पूर्णिमा व्रत मुहूर्त 

नवंबर 26, 2023 को 15:55:26 से पूर्णिमा आरम्भ

नवंबर 27, 2023 को 14:47:46 पर पूर्णिमा समाप्त

जानकारी: अपने शहर के अनुसार इस दिन का शुभ मुहूर्त जानने के लिए यहाँ क्लिक करें 

क्या यह जानते हैं आप? कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था इसलिए इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इसके अलावा अगर इस दिन कृतिका नक्षत्र हो तो यह ‘महाकार्तिकी’ कहलाती है।

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व 

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। ऐसे में कहा जाता है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ आदि करता है तो उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही स्नान के बाद अगर दीपदान किया जाए तो इससे व्यक्ति को दस यज्ञों के समान शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 

इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग 

इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर शिव योग, सर्वार्थ योग, द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है जिससे इस दिन का महत्व कई गुना ज़्यादा माना जा रहा है। 

समय की बात करें तो, 

शिव योग- 27 नवंबर को रात 1 बजकर 37 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा 

सर्वार्थ सिद्धि योग- दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से लेकर 28 नवंबर को सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक 

कार्तिक पूर्णिमा को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट तक कृत्तिका नक्षत्र है, उसके बाद से रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा। 

इसके अलावा इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर अद्भुत संयोग का भी निर्माण हो रहा है। दरअसल इस साल 27 नवंबर 2023 को औषधि निर्माण और रोग विमुक्त स्नान का मुहूर्त एक साथ बन रहा है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में अगर कुछ उपाय किए जाएं तो व्यक्ति को सभी रोगों से छुटकारा अवश्य मिलता है और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा बना रहता है।

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कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि 

बात करें इस दिन की पूजा विधि की तो, 

  • इस दिन जल्दी उठने के बाद व्रत का संकल्प लें और फिर किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें।  हालांकि अगर ऐसा मुमकिन नहीं है तो आप घर में ही स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर उससे स्नान कर लें।  
  • चंद्रोदय होने पर शिव, संभूति, संतति, प्रीति, अनसूया और क्षमता इन 6 कृतिकाओं की पूजा करें।
  • माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात व्रत करने के बाद अगर कोई व्यक्ति बैल का दान करता है तो इससे उन्हें शिव पद प्राप्त होता है। 
  • अगर कोई व्यक्ति गाय, हाथी, घोड़ा, रथ या घी का दान करता है तो इससे संपत्ति बढ़ती है। 
  • भेड़ का दान करता है तो इससे ग्रह योगों के कष्टों का नाश होता है। 
  • इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग पूर्णिमा की रात में व्रत और जागरण करते हैं। माना जाता है कि इससे सभी मनोरथ सिद्धियां व्यक्ति को प्राप्त होती है। 
  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन अगर आप व्रत रख रहे हैं तो इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन अवश्य कराएं और हवन अवश्य करें। 
  • इसके अलावा यमुना जी पर कार्तिक स्नान के समापन करके राधा कृष्ण का पूजन और दीपदान अवश्य करें।

कार्तिक पूर्णिमा पर देव दिवाली- गुरु नानक जयंती: कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है। माना जाता है कि यह देवताओं की दिवाली होती है और इस दिन दीप दान अवश्य किया जाना चाहिए। इस दिन का महादेव से गहरा रिश्ता भी होता है। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती का भी महत्व माना गया है। इस दिन देशभर के गुरुद्वारों में सेवा भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। गुरु नानक जी ने अपने पूरे जीवन भर समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का काम किया था। यही वजह है कि प्रकाश पर्व के रूप में उनकी जयंती को मनाया जाता है। इस वर्ष गुरु नानक जी की 554वीं जयंती मनाई जा रही है। 

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कार्तिक पूर्णिमा महत्व 

 कार्तिक मास के दिन को बेहद ही पवित्र और शुभ माना जाता है। कहा जाता है इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। इसके अलावा इस महीने में तुलसी विवाह भी किया जाता है। साथ ही इस दिन चंद्रमा और माँ लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में धन संपत्ति की वृद्धि होती है। 

खास जानकारी:  कार्तिक पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग स्नान के बाद भगवान विष्णु के राई दामोदर स्वरूप की पूजा भी करते हैं। इसी दिन से विष्णु पंचक व्रत का भी समापन हो जाएगा। इसके अलावा आज के दिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन का विशेष महत्व भी माना गया है।  

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