कामिका एकादशी व्रत: जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। 

एकादशी व्रत-पूजा का सीधा संबंध भगवान विष्णु से बताया गया है। भगवान विष्णु की प्रसन्नता पाने के लिए साल में कई बार और अलग-अलग तरह की एकादशी मनाई जाती है और इन्हीं में एक एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। 

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कहा जाता है कि यदि कोई भी व्रत या पूजा इत्यादि शांत मन से की जाये तो, भगवान हमारी कामना अवश्य सुनते हैं और उसे पूरा भी करते हैं। हालाँकि मौजूदा परिस्थिति में हर एक इंसान किसी न किसी बात को लेकर भ्रमित या चिंतित है। यदि आप भी किसी ऐसी समस्या या परेशानी से जूझ रहे हैं तो अभी देश के जाने-माने ज्योतिषियों से प्रश्न पूछकर समस्या का हल जानें, और फिर शांति भाव से व्रत और पूजन में ध्यान लगायें।

कामिका एकादशी श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है। इस वर्ष कामिका एकादशी 16 जुलाई 2020, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र स्वरुप की पूजा की जाती है। कामिका एकादशी के बारे में कहा जाता है कि ये एकादशी विष्णु भगवान की पूजा के लिए सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ होता है। जो भी इंसान इस दिन भगवान विष्णु का पूजन व्रत करता है उसे इसके पुण्य से उसको सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 

कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त 

सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 15 जुलाई की रात्रि 10 बजकर 22 मिनट 03 सेकंड से शुरू होकर गुरुवार 16 जुलाई रात 11 बजकर 47 मिनट 09 सेकंड तक रहेगा ।

कामिका एकादशी पारणा मुहूर्त : 05:59:09 से 08:19:27 तक 17, जुलाई को

अवधि : 2 घंटे 20 मिनट

हरि वासर समाप्त होने का समय : 05:59:09 पर 17, जुलाई को

(अपने शहर के अनुसार शुभ मुहूर्त जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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कामिका एकादशी पूजन विधि 

किसी भी व्रत-पूजा को करने के लिए सही पूजन विधि को अपनाना बेहद ज़रूरी होता है। अन्यथा की गयी पूजा से उचित फल नहीं मिलता है। ऐसे में कामिका एकादशी व्रत की भी पूजन विधि बताई गयी है, जिसके अनुसार इस दिन….

  • प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करें और पूजा से पहले भगवान विष्णु के व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद ही पूजा की शुरुआत करें। 
  • इस पूजा में भगवान विष्णु को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत, इत्यादि अवश्य चढ़ाएं। 
  • व्रत के दिन भगवान विष्णु के नाम का जप करें और भजन-कीर्तन करें। 
  • इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बेहद फलदायी बताया गया है। 
  • एकादशी के अगले दिन यानि द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दान अवश्य दें इसके बाद ही भोजन करें।

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कामिका एकादशी व्रत महत्व 

इस व्रत के बारे में मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है। यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करने वाली कहा जाता है। बताया जाता है कि कामिका एकादशी की व्रत कथा खुद भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को और वशिष्ठ मुनि ने राजा दिलीप को सुनाई थी जिसे सुनकर उन्हें पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। कामिका  एकादशी व्रत के दिन जो भी  इंसान श्री हरि का पूजन-व्रत करता है उसके पितरों के भी सभी कष्ट अवश्य ही दूर हो जाते हैं।  

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कामिका एकादशी व्रत कथा

बताया जाता है कि प्राचीन समय में एक गांव में एक ठाकुर हुआ करते थे। एक दिन ठाकुर का किसी ब्राह्मण से झगड़ा हो जाता है जिसमें गुस्से में ठाकुर के हाथ से ब्राह्मण का खून हो जाता है। अब ठाकुर के मन में पश्च्याताप का भाव उठता है लेकिन अन्य ब्राह्मण उसे क्रियाकर्म में शामिल ही नहीं होने देते हैं। जिसकी वजह से ठाकुर ब्रह्महत्या का भागीदार बन जाता है। 

तब हैरान-परेशान ठाकुर एक मुनि से अनुरोध करता है कि उसे इस पाप का भागीदार बनने से बचा लिया जाये। तब मुनि ठाकुर को कामिका एकादशी के बारे में बताते हैं और उससे विधिवत इस पूजन-व्रत को करने की सलाह देते हैं। मुनि की बात सुनकर ठाकुर ठीक वैसा ही करता है। उसी रात में भगवान खुद ठाकुर के सपने में आये और उसे उसके पापों से मुक्ति देकर क्षमा दान कर दी। 

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इस व्रत के बारे में इसी वजह से कहा जाता है कि सच्चे मन से जो कोई भी इंसान इस दिन व्रत रखता है और पूजन करता है भगवान विष्णु उसकी समस्त समस्या दूर कर के उसे पापों से मुक्ति अवश्य देते हैं। इस व्रत को करने वाले इंसान की कामनाएं अवश्य ही पूर्ण होती हैं।

जो इंसान कामिका एकादशी की कथा सुन भर लेता है उसे यज्ञ करने जितना फल प्राप्त होता है। इस दिन की पूजा में शंख, चक्र, गदाधारी श्री विष्णु जी की पूजा की जाने की मान्यता है। 

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हम आशा करते हैं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। एस्ट्रोसेज का अभिन्न हिस्सा बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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