होलिका दहन में इन पेड़ों की लकड़ियों का होता है इस्तेमाल, भूल से भी न जलाएं ये लकड़ियां

रंगों वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। इस साल 28 मार्च को होलिका दहन का पर्व है। होलिका दहन के दिन लोग होलिका जलाते हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

गांव में तो घर-घर में यह रिवाज मनाया जाता है लेकिन शहरों में यह परंपरा बदली है। शहरों में मोहल्ले या सोसायटी भर के लोग एक जगह इकठ्ठा होकर एक ही जगह होलिका दहन करते हैं। इसकी मुख्यतः दो वजहें हैं। एक तो यह कि शहर में जगह की कमी है और दूसरी कि शहर में अब उतने पेड़-पौधे अब बचे नहीं हैं जिन्हें जलाया जा सके। ऐसे में आपके मन में यह सवाल होगा कि होलिका दहन के दिन किसी भी हरे-भरे पेड़ को काट कर होलिका जलाना सही बात है? जवाब है कि होलिका में हरे-भरे पेड़ को काट कर जलाने की परंपरा नहीं रही हैं। 

जी हाँ! सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि हर हरे भरे पेड़ के ऊपर किसी न किसी देवता का अधिपत्य होता है या फिर सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब यह है कि इन पेड़ों में देवता वास करते हैं। 

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यही वजह है कि सनातन धर्म में अलग-अलग त्योहारों में अलग-अलग पेड़ या पौधों को पूजने की परंपरा है। जैसे कि आंवले के पेड़ के बारे में यह मान्यता है कि इसके जड़ में भगवान विष्णु निवास करते हैं और तुलसी के पौधे का तो अपना ही धार्मिक महत्व है। इसी तरह से अन्य पेड़ जैसे कि बरगद का पेड़ हो या फिर पीपल का पेड़, सबका कुछ न कुछ धार्मिक महत्व सनातन धर्म में है। ऐसे में यह सवाल भी है कि होलिका दहन के लिए किन पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए।

होलिका दहन में किन पेड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए? 

दरअसल लोग जानकारी के आभाव में हरे भरे पेड़ का इस्तेमाल होलिका दहन में करते हैं। जबकि होलिका दहन में एरंड और गूलर के पेड़ की लकड़ियों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसे तो गूलर के पेड़ का का भी सनतान धर्म में धार्मिक महत्व है लेकिन इस मौसम में गूलर के पेड़ की पत्तियां झड़ने लगती हैं। ऐसे में अगर इन वृक्षों की टहनियों को न जलाया जाए तो इसमें कीड़े लगने लगते हैं।

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आप होलिका दहन में गाय के गोबर के कंडों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके साथ ही खरपतवार को भी होलिका दहन में जलाया जा सकता है। आप सिर्फ आय के गोबर के कंडों से भी होलिका दहन कर सकते हैं। 

होलिका दहन में किन पेड़ों का न करें इस्तेमाल 

आपको बता दें कि पीपल के पेड़, शमी का वृक्ष, आम के पेड़, आंवले के पेड़, नीम के पेड़, केले के पेड़, अशोक के पेड़ और बेल के पेड़ का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है इसलिए होलिका दहन में इन पेड़ों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

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