गणगौर पूजा 2021: पतियों से गुप्त रखना होता है इस दिन का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला गणगौर का त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाता है। राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात के कुछ इलाकों में भी गणगौर का यह त्यौहार मनाया जाता है। इस वर्ष 15 अप्रैल को गणगौर का व्रत किया जाएगा। बताया जाता है इस व्रत को जो कोई भी महिला करती है उसे इस व्रत के बारे में अपने पति से बात गुप्त रखनी होती है।

गणगौर 2021 शुभ मुहूर्त

गणगौर का यह 18 दिनों तक चलता है। यानी कि होली से प्रारंभ होकर गणगौर का व्रत अगले 18 दिनों तक चलता रहेगा। बहुत से लोग आखिरी दिन पूजा अर्चना करते हैं। गणगौर व्रत को कई जगहों पर गौरी तीज या सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है गणगौर का यह व्रत मां पार्वती को समर्पित एक बेहद ही सरल व्रत है। 

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इस व्रत से जुड़ी मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि, भगवान विष्णु ने मां पार्वती को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद दिया था जिसके बाद मां पार्वती ने सुहागिन महिलाओं को सदा सुहागन रहने का वरदान दिया था। ऐसे में हर वर्ष सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए कुंवारी कन्या गणगौर का व्रत करती हैं।

गणगौर व्रत पूजा प्रारंभ 29 मार्च 2021 दिन सोमवार 

गणगौर व्रत पूजा समाप्त 15 अप्रैल 2021 दिन गुरुवार 

पूजा का अंतिम दिन 15 अप्रैल 2021 दिन गुरुवार 

तृतीया तिथि प्रारंभ 14 अप्रैल 2021 को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर 

तृतीया तिथि समाप्त 15 अप्रैल 2021 दोपहर 03 बजकर 27 मिनट पर 

पूजा का शुभ मुहूर्त 15 अप्रैल 2021 को सुबह 05 बजकर 15 मिनट से सुबह 06 बजकर 52 मिनट तक 

जानकारी के लिए बता दें कि गणगौर पूजा का सबसे ज़्यादा महत्व आखिरी दिन की पूजा का माना गया है। ऐसे में ज़्यादातर लोग इस दिन यानी इस वर्ष 15 अप्रैल को गणगौर व्रत और पूजा करेंगे।

होली की रात से प्रारंभ हो कर गणगौर चैत्र पक्ष की तृतीया तिथि तक की जाती है। गणगौर व्रत वाले दिन महिलाएं पवित्र नदियों और तालाबों में जाकर गणगौर को पानी पिलाने की प्रथा निभाती है और तृतीया तिथि के दिन उनका विसर्जन कर दिया जाता है।

गणगौर पूजा सामग्री की जानकारी

अब बात करते हैं गणगौर की पूजा में आवश्यक पूजा सामग्री की तो, इस दिन की पूजा में आपको चाहिए होगी एक लकड़ी का साफ़ पटरा, कलश (तांबे का हो तो ज़्यादा बेहतर है), काली मिट्टी, होलिका की राख, गोबर या फिर मिट्टी के उपले, दीपक, गमले, कुमकुम, अक्षत, सुहाग की चीज़ें जैसे: मेहँदी, बिंदी, सिन्दूर, काजल, इत्र, रंग, शुद्ध और साफ़ घी, ताजे सुगन्धित फूल, आम की पत्ती, पानी से भरा हुआ कलश, नारियल, सुपारी, गणगौर के कपड़े, गेंहू और बांस की टोकरी, चुनरी, कौड़ी, सिक्के, घेवर, हलवा, सुहाग का सामान, चांदी की अंगुठी, पूड़ी आदि।

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