चैत्र नवरात्रि के दौरान इस प्रकार से करें देवी की पूजा आराधना, इन कामों को भूलकर भी ना करें !

नवरात्रि साल में 5 बार आती हैं। जिसमें यह दो , चैत्र नवरात्रिशारदीय नवरात्रि , प्रमुख रूप से पूरे देश में बड़ी श्रद्धा भाव के साथ मनाई जाती है । इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल, 2019 से प्रारंभ होकर 14 अप्रैल, 2019 में पूर्ण होंगे । 9 दिन के इस पर्व में पूरा वातावरण मां दुर्गा के आशीष से  जगमगा उठता है । पूरा समां पवित्र मोहक सुगंध व घंटियों की ध्वनि से शुद्ध होकर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है ।

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आज हम इस लेख के ज़रिये जानेंगे कि नवरात्र के 9 दिन वास्तु ज्योतिष के अनुसार क्या करना चाहिए और किन कार्यों का करना माना जाता है निषेध :  

  • सर्वप्रथम मंदिर की दिशा पूर्व-उत्तर या उत्तर-पूर्व होना श्रेष्ठ होता है। पूजा करते समय हमारा मुंह पूर्व दिशा की तरफ हो तो श्रेष्ठ होगा।
  • मंदिर की धुलाई सफाई स्वच्छतापूर्वक करें।
  • मुख्य द्वार के दोनों तरफ हल्दी, चूना या रोली के स्वास्तिक चिन्ह अंकित करें ।
  • हल्दी से बना स्वास्तिक चिन्ह हमारे गुरु ग्रह को शुद्ध करता है। साथ ही यह कीटाणु रोधक का भी काम करता है ।
  • चूना हमारे चंद्र ग्रह को शुद्ध कर हमे हमारे मानसिक विकारों से मुक्ति दिलाता हैं।
  • रोली से बना स्वास्तिक चिन्ह हमारे शुक्र व सूर्य ग्रह को शोधित कर हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।
  • मां की प्रतिमा चंदन की चौकी पर स्थापित करें। चंदन की गंघ से वातावरण विषाणु मुक्त हो जाता है। अतः यह वातावरण शुद्धि प्रदायक है। आंतरिक रूप से चंदन की गंध तनाव को नष्ट करने वाली होती है। जो कि हमारे मनोभावों में एकाग्रता शक्ति बढ़ाने का कार्य करती हैं।  किसी भी तरह के अपवित्र स्पंदनो को नष्ट करने में चंदन की गंध सहायक होती है ।
  • चंदन की चौकी ना हो तो आप चांदी की चौकी का भी प्रयोग कर सकते हैं। चांदी की चौकी पर विराजी मां हमारे चंद्र यानी हमारे मन की शुद्धि करती हैं।
  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है। लाल रंग ऊर्जा शक्ति व विकास का प्रतीक है, जो कि हमारी कार्य क्षमता में वृद्धि प्रदान करता है। साथ ही लाल रंग सौभाग्य का भी प्रतीक माना जाता है।
  • मां की प्रतिमा बहुत अधिक बड़ी ना हो इस बात का ध्यान रखें। मां की प्रतिमा को रसोई घर में ना स्थापित करें। प्रतिमा को इस तरह विराजित करें कि पूजा करते समय हमारा मुख पूर्व दिशा की तरफ हो।

नवरात्रि 2019 दिनांक, दुर्गा पूजा मुहूर्त एवं विशेषताएं

  • कलश मंदिर की उत्तर पूर्व दिशा में स्थापित करें। कलश में सुपारी व सिक्का डालकर जल से भर दें ।
  • मिट्टी का कलश सर्वश्रेष्ठ होता है। मिट्टी के प्रयोग से हमारे बुध ग्रह शुद्ध होते हैं। जो हमारे जीवन में बुद्धि का कारक है ।
  • सोने या पीतल के कलश के प्रयोग से हमारे गुरु ग्रह शुद्ध होते हैं। जो हमारे ज्ञान व विवेक का विस्तार करते हैं।
  • चांदी का कलश भी शुभ फल देता है। चांदी मानसिक शांति व सुख प्रदायक होती है।
  • इसके अतिरिक्त अन्य पदार्थ से बना कला कलश कदापि ना प्रयोग करें।
  • कलश पर अशोक के पत्ते शुभ गिनतियो में रखें जैसे 9, 11, 21 आदि। अशोक शोक को हरने वाला पौधा है। जिसकी पत्तियों का प्रयोग हमारे जीवन में आने वाली विपदाओं को नष्ट करती हैं। इसके बाद जटादार नारियल कलावा बांधकर कलश के ऊपर रखे। मां के समक्ष अपनी सारी विपदा को दूर करने व मनोकामना को पूर्ण करने की प्रार्थना करें। साथ ही जो व्रत संकल्प आप करना चाहते हैं वह कलश स्थापना के समय ही निर्धारित करें। उसे पूर्ण होने का मां से आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • अखंड दीपक मंदिर के अग्नि कोण दिशा में प्रज्जवलित करें। शुद्ध घी में थोड़ा कपूर डालकर दीप जलाएं। ऐसा करने से हमारे शुक्र ग्रह का शोधन होकर, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • अखंड दीपक ना जला पाएँ तो पूरे नवरात्र सुबह व शाम दीपक अवश्य जलाएं।
  • किसी भी मंदिर में बल्ब का दान करें। इससे आपके राहु ग्रह शुद्ध होंगे और जीवन में आ रही विपरीत परिस्थितियों से विजय प्राप्त होगी, साथ ही दुर्घटना आदि से बचाव होगा ।
  • नवरात्रि पूजन के समय मंदिरों में स्त्रियां हमेशा बाल बांधकर जाएं। बिखरे बाल शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को आमंत्रित करते हैं, जो जीवन को कष्टदायक बनाते हैं। इसलिए ऐसा करने से बचें।
  • इतने क्रिया कर्म ना भी कर पाएँ तो पूरे नवरात्र शुद्ध मन से संकल्प करें की किसी का दिल ना दुखाएँ। किसी गरीब का अपमान ना करें, यही सबसे बड़ी पूजा है।

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आप सभी को नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मां दुर्गा आपकी हर विपदा दूर कर ,आपके जीवन को खुशियों से भर दे। यही हमारी कामना है।

दीप्ति जैन
आधुनिक वास्तु एस्ट्रो विशेषज्ञ

दीप्ति जैन एक जानी-मानी वास्तुविद हैं, जिन्होंने पिछले 3 सालों से वास्तु विज्ञान के क्षेत्र में अपने कौशल और प्रतिभा को बखूबी दर्शाया है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। दीप्ति जैन न केवल वास्तु बल्कि सामाजिक मुद्दों, हस्‍तरेखा विज्ञान, अध्यात्म, कलर थेरेपी, सामुद्रिक शास्त्र जैसे विषयों की भी विशेषज्ञ हैं।

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