अपने भक्तों की रक्षा के लिए माँ दुर्गा ने लिए थे ये विभिन्न अवतार !

आने वाले 29 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। नौ दिनों के इस त्यौहार को देश के सबसे बड़े त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में इस दौरान देवी माँ की अलग-अलग तरीके से पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में दुर्गा को खासतौर से शक्ति का स्वरुप माना जाता है। देवी ने अपने विभिन्न रूपों में हर बार अपन भक्तों की रक्षा की है। आज हम आपको विशेष रूप से दुर्गा के उन सभी अवतारों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे देवी माँ ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए समय-समय पर लिया था। आइये जानते हैं माता के उन विभिन्न रूपों के बारे में। 

दुर्गा माँ का पहला अवतार 

दुर्गा माँ ने पहला अवतार रक्तदंदिता के रूप में लिया था। उन्होनें इस रूप में यशोदा माँ के गर्भ से जन्म लिया था। देवी दुर्गा ने ये अवतार विशेष रूप से वैप्रचित दानव का संहार करने के लिए लिया था। उन्होनें असुरों की सेना को अपने दांतों से चबाकर उनका संहार किया था। 

दुर्गा माँ का दूसरा अवतार

देवी माँ ने दूसरा अवतार दुर्गा माँ के रूप में लिया था। माँ ने ये अवतार देवताओं को दुर्गम नाम के असुर के प्रकोप से बचाने के लिए लिया था। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार दुर्गम नाम के असुर ने धोखे से सभी देवताओं को स्वर्गलोक से बाहर कर खुद वहां अपना आधिपत्य जमा लिया था। उससे छुटकारा पाना के लिए सभी देवताओं ने देवी माँ का आह्वान किया था और अंत में माँ ने दुर्गा अवतार लेकर दुर्गम का संहार किया था। इसलिए भी उन्हें दुर्गा माँ कहकर पुकारा गया। 

दुर्गा माँ का तीसरा अवतार 

देवी माँ ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए तीसरा अवतार शताक्षी माँ के रूप में लिया था। माता के इस अवतार के पीछे एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार पृथ्वी पर कई सालों तक बारिश नहीं हुई थी। तब जाकर सभी ऋषि मुनियों ने देवी माँ के लिए हवन और पूजा की था, उनकी श्रद्धाभाव से प्रसन्न होकर माँ ने शताक्षी अवतार लेकर अपने सौ नेत्रों से पृथ्वी पर बारिश की और भक्तों के कष्ट को दूर किया। 

दुर्गा माँ का चौथा अवतार 

माँ ने चौथा अवतार भीमा के रूप में लिया था। उन्होनें ये अवतार मुख्य रूप से हिमालय पर तप करने वाले ऋषि मुनियों की रक्षा के लिए लिया था। माना जाता है कि हिमालय पर रहने वाले ऋषि मुनियों को असुर अक्सर परेशान करते थे। उनका संहार करने के लिए ही देवी माँ ने भीमा अवतार लिया। 

देवी माँ का पांचवां अवतार 

देवी माँ ने पांचवां अवतार भ्रामरी देवी के रूप में लिया था। उनका ये अवतार मुख्य रूप से अरुण नाम के दैत्य से ऋषि मुनियों की रक्षा के लिए हुआ था। ऋषि मुनियों से अरुण नाम के दानव से रक्षा के लिए माता का आह्वान किया और उसके फलस्वरूप माँ छह पैरों वाली देवी भ्रामरी का अवतार लेकर उसका अंत किया। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवरात्रि के दौरान आप देवी माँ के जिस नौ अलग रूपों की पूजा अर्चना करते हैं वो उनका अवतार नहीं था बल्कि उनके विभिन्न नौ रूप हैं। 

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