छठ पूजा का आखिरी दिन, 36 घंटे का निर्जला व्रत आज होगा पूरा !

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को छठ पूजा का चौथा और आखिरी दिन “ऊषा अर्घ्य और पारण” मनाया जाता है। इस साल छठ पर्व में ऊषा अर्घ्य और पारण 03 नवंबर, रविवार यानि आज है। इस दिन व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण करते हैं। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ पूजा में सूर्य के साथ-साथ उनकी दोनों शक्तियों की आराधना की जाती है। सुबह में सूर्य की पहली किरण यानि ऊषा और शाम के समय में सूर्य की आखिरी किरण यानि प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में सूर्यदेव को उषा अर्घ्य से मनोवांछित फल मिलता है। तो चलिए इस लेख में आपको बताते हैं, कि आज उषा अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त क्या है?

उषा अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

इस साल 03 नवंबर, रविवार यानि आज उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा। अगर उषा अर्घ्य देने के शुभ मुहूर्त की बात करें, तो आज सूर्योदय का समय लगभग प्रातः 06 बजकर 34 मिनट पर है। इसीलिए व्रती इस समय के आस-पास सूर्य देव को अर्घ्य दे सकती हैं। माना जा रहा है कि इस साल 3 नवंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो सूर्योदय के साथ ही आरंभ हो रहा है। इसीलिए इस वर्ष सूर्य देव जल्द ही व्रतियों की मनोकामना पूरी कर सकते हैं।  

ऐसे करते हैं आज के दिन पूजा 

चौथे दिन कार्तिक माह  के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य उदय से पहले ही व्रती घाट पर उगते सूर्यदेव की पूजा के लिए पहुंच जाते हैं और शाम की ही तरह गीत-भजन गाते हैं। उषा अर्घ्य के दिन सभी नियम-विधान संध्या अर्घ्य की तरह ही होते हैं। सिर्फ व्रती लोग इस समय पूर्व दिशा यानि सूर्य के उगने की दिशा कि ओर मुख करके पानी में खड़े होते हैं, और सूर्योपासना करते हैं। 

उगते हुए सूर्य को थोड़ी देर निहार कर अर्घ्य देते हैंऔर पांच बार परिक्रमा करते हैं। अर्घ्य देते समय सूर्य देव को दूध और जल चढ़ाया जाता है। पूजा-अर्चना समाप्त होने के बाद घाट का पूजन होता है। वहाँ मौजूद लोगों में प्रसाद वितरण करके व्रती घर आ जाते हैं। बहुत सारे व्रती घाट पर ही प्रसाद खा कर व्रत खोलते हैं, जबकि अधिकांश व्रती घाट से घर लौटने के बाद पहले अपने घर के देवता की पूजा करते हैं और उसके बाद अदरक व् गुड़ खाकर  अपना व्रत खोलते हैं, जिसे पारण या परना कहते हैं। व्रती लोगों का खरना के दिन से आज तक चल रहा निर्जला उपवास समाप्त होता है, और वे नमकयुक्त भोजन करते हैं। 

आशा करते हैं छठ पूजा के बारे में इस लेख में दी गयी जानकारी आपको पसंद आई होगी। एस्ट्रोसेज से जुड़े रहने के लिए आप सभी का धन्यवाद ! 

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