चैत्र अमावस्या: इस दिन भूल से भी ना करें ये काम, पड़ सकता है पछताना!

चैत्र अमावस्या के बाद होगी नवरात्र की शुरुआत हो जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहा जाता है। ये बात तो सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत महत्व बताया गया है। अमावस्या के दिन स्नान, दान और कई तरह के धार्मिक काम इत्यादि किये जाते हैं। बता दें कि साल में आने वाली अन्य सभी अमावस्या की ही तरह चैत्र अमावस्या के दिन भी पूर्वजों की पूजन का बहुत महत्व बताया गया है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रेत आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं इसीलिए कहा गया है कि चौदस और अमावस्या के दिन किसी भी तरह के बुरे काम या नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखने में हमारी भलाई है।

कब है चैत्र अमावस्या?

इस वर्ष अमावस्या 24 मार्च, 2020, मंगलवार को पड़ रही है।

अमावस्या तिथि आरम्भ  12:31:58, मार्च 23, 2020 
अमावस्या तिथि समाप्त  14:59:33, मार्च 24, 2020 

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चैत्र अमावस्या पूजन महत्व और विधि 

हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र अमावस्या के दिन कुछ ख़ास पूजन विधि और विधान बताये गए हैं। जैसे अमावस्या के दिन स्नान दान का बहुत महत्व बताया गया है। गरुड़ पुराण में बताया गया है इस अमावस्या के दिन पितर अपने वंशजों से मिलने आते हैं। ऐसे में कहा जाता है कि इस दिन अगर किसी पवित्र नदी में स्नान, दान या पितरों को भोजन कराया जाये तो इससे पितर लोग प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद पा सकते हैं।

  • इस दिन पितरों के लिए पितृ तर्पण करना चाहिए।
  • इस दिन पितृस्तोत्र या पितृसूक्त का पाठ करना भी अच्छा होता है।
  • इस दिन पितरों का ध्यान करते हुए पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, गंगा जल, काले तिल, चीनी, चावल, जल इत्यादि और कुछ फूल चढ़ाएं।
  • पितृसूक्त का पाठ करने से पहले ‘ॐ पितृभ्य: नम:‘ मन्त्र का जाप करें। जिन लोगों का चन्द्रमा कमज़ोर हो उन्हें अमावस्या के दिन गाय को दही और चावल खिलाना चाहिए।
  • अमावस्या के दिन तुलसी की 108 बार परिक्रमा करें।
  • इसके अलावा आप चाहें तो हर अमावस्या के दिन ताम्र के बर्तन में सूर्यदेव को लाल चंदन, गंगा जल और शुद्ध जल मिलाकर अर्घ्य दें, इस दौरान ‘ॐ पितृभ्य: नम:’ मंत्र का जाप करते रहे।
  • जो लोग इस दिन नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं उन्हें स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने की सलाह दी जाती है
  • इस दिन सूर्यनारायण को अर्घ्य देने से गरीबी और दरिद्रता से मुक्ति पायी जा सकती है।
  • स्नान और पूजापाठ के बाद इस दिन ब्राह्मणों को दान देने का भी बहुत महत्व बताया गया है।
  • अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक और शनि देव को नीले पुष्प, काले तिल और सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए।

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चैत्र अमावस्या के दिन भूल से भी ना करें ये काम

कहा जाता है कि अमावस्या की रात को प्रेत आत्माएं ज्यादा सक्रिय होती हैं। यही वजह है कि इस रात को तंत्र-मन्त्र और टोने-टोटके का विशेष महत्व होता है। क्योंकि चैत्र अमावस्या के अगले दिन से नवरात्र की शुरुआत हो जाती है और अमावस्या का ये दिन कृष्ण पक्ष का आखिरी दिन भी होता है इसलिए अमावस्या की रात आसमान में चांद नज़र नहीं आता है। कहा जाता है ऐसे में इस रात तांत्रिक और अघोरी श्मशान में विशेष पूजा करते हैं। जिससे बुरी आत्माओं का प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए जितना हो सके अमावस्या की रात छत या किसी भी अँधेरी सूनसान जगह पर जाने से बचना चाहिए अन्यथा रात के समय बुरी आत्माएं आपकी तरफ आकर्षित हो सकती हैं।

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