घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का संचार करने के आसान वास्तु टिप्स

वास्तु शास्त्र क्या है? इस सवाल के बहुत से जवाब हैं और हर जवाब के पीछे आपको हर बार एक अलग व्याख्या सुनने या पढ़ने को मिल जायेगी।  दरअसल वास्तु वो जगह होती है जहाँ आप रहते हैं, काम करते हैं या फिर जाते हैं। यह जगह कोई भी हो सकती है आपका घर, आपका ऑफिस या फिर कोई ऐसी जगह जहां आप अपना ज्यादातर समय व्यतीत करना पसंद करते हैं। वास्तु शास्त्र स्थापत्य कला, खाका, जगह प्रबंधन और दिशा के ज्ञान पर आधारित एक प्राचीन विज्ञान है। यह हमें बहुत सारे सिद्धांत और उपाय बताता है ताकि हमारे घर और ऑफिस में सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। आज हम आपको इस लेख में आपके घर के लिए कुछ बेहद ही उपयोगी वास्तु टिप्स दे रहे हैं जिसे हमारे विद्वान् ज्योतिषी आचार्य मृणाल ने बताया है।

क्या है वास्तु दोष?

वास्तु दोष उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई भी वस्तु गलत जगह रखी हो या फिर उस वस्तु की दिशा उसके स्वभाव के अनुसार न हो जिसकी वजह से उस जगह पर रहने वाले लोगों की ज़िन्दगी में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा हो। वैदिक ज्योतिष के अनुसार चारों प्रमुख दिशाओं पर कई देवी-देवताओं का आधिपत्य है और उनका सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले लोगों के जीवन को किसी न किसी तरीके में अच्छे या बुरे ढंग से प्रभावित करता रहता है। किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव वास्तु दोष का निर्माण करता है जो कि निम्नलिखित वास्तु उपायों को अपनाकर दूर किया जा सकता है।

कमरे के लिए ख़ास वास्तु टिप्स 

  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित कमरे में घर के मुखिया को रहना चाहिए।
  • घर पर आने वाले मेहमानों को घर के उत्तर-पूर्व कमरे में ठहराहयें। 

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कमरे में बिस्तर की दिशा 

  • दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण दिशा के शयन कक्ष- इस कमरे में सोने वाले व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में और पैर उत्तर की दिशा में रहना चाहिए। इससे व्यक्ति के शरीर में रक्त संचार बेहतर बना रहता है।
  • दक्षिण-पूर्व और पूर्व दिशा के शयन कक्ष- इस कमरे में सोते वक़्त सिर पश्चिम की दिशा में और पैर पूर्व की दिशा में रहना चाहिए।
  • उत्तर-पूर्व दिशा के शयन कक्ष – इस कमरे में सोते वक़्त सिर पश्चिम की ओर और पैर पूर्व की ओर रहने चाहिए।
  • उत्तर-पश्चिम या उत्तर दिशा के शयन कक्ष- इस कमरे में सोने वाले व्यक्ति का सिर पश्चिम और पैर पूर्व दिशा की ओर रहना चाहिए।
  • कोणीय शयन कक्ष- इस कमरे में सोने वाले व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण-पश्चिम दिशा और पैर उत्तर-पूर्व दिशा में रहना चाहिए।

वास्तु यन्त्र को अपने घर में लाकर सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

शयन कक्ष के प्रभावी वास्तु उपाय-

  • बिस्तर के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल नहीं होना चाहिए।
  • कमरे में किसी प्रकार के हिंसा को दर्शाती तस्वीर नहीं होनी चाहिए।
  • सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए आप कमरे में एक कटोरे में काला नमक भर कर उसमें एक जामुनिया रत्न रख सकते हैं।
  • कमरे में हमेशा लकड़ी का फर्नीचर ही रखें क्योंकि लकड़ी हर तरह के नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समाहित कर लेता है।
  • कमरे के दीवारों को हमेशा हलके रंग से ही पेंट करवाएं।
  • कपड़े की अलमाड़ी कमरे में हमेशा दक्षिण या फिर पश्चिम की दिशा में रहनी चाहिए।

प्रभावी वास्तु टिप्स और उपायों के लिए आचार्य मृणाल से बात करें

एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए धन्यवाद!

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