बसंत पंचमी स्पेशल- सफल करियर का वर देती है देवी सरस्वती

बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस साल यानि  2020 में यह त्योहार 29 जनवरी, बुधवार के दिन मनाया जा रहा है। इस दिन हम ज्ञान की देवी मां सरस्वती की भी पूजा करते हैं। कहते हैं कि मां सरस्वती की पूजा के साथ अगर सरस्वती स्तोत्र भी पढ़ा जाए तो अद्भुत परिणाम के साथ मां सरस्वती प्रसन्न होकर मन चाहा वरदान देती हैं। यही कारण है कि इस त्योहार को ‘श्री पंचमी’ भी कहते हैं। आज से ही भारत में बसंत ऋतु का आरंभ होता है। यह त्योहार भारत के अलावा नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में भी बड़े धूम-धाम से मनया जाता है। बसंत ऋतु में मानो पूरी प्रकृति पीली रंग की चादर से ढक जाती है। खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता है। वहीं जौ और गेंहू की बालियां खिलने लगती हैं तो आम के पेड़ों में बौर आ जाती है और चारों ओर रंग बिरंगी तितलियां मंडराने लगती हैं।

बसंत पंचमी/ सरस्वती पूजा का मुहूर्त

पूजा मुहूर्त

10:47:38 से 12:34:27 

अवधि

1 घंटे 46 मिनट

नोट: यह मुहूर्त केवल नई दिल्ली क्षेत्र के लिए मान्य है। अपने शहर के लिए शुभ मुहूर्त प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें।

बसंत पंचमी की पूजा

बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और दिन के मध्य भाग से पहले की जाती है। वैसे अगर पंचमी तिथि दिन के मध्य के बाद शुरू हो रही है तो ऐसी स्थिति में बसंत पंचमी की पूजा अगले दिन की जाती है। हालांकि अगले दिन पूजा करने का कारण बस यह हो सकता है जब तिथि की शुरुआत पहले दिन के मध्य से पहले नहीं हो रहा हो। यानि कि पंचमी तिथि पूर्वाह्नव्यापिनी न हो। बाकी सभी परिस्थितियों में पूजा पहले दिन ही होती है। वैसे कभी-कभी पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी चतुर्थी तिथि में पड़ जाती है।

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विद्यार्थियों को सफल करियर का वर देती हैं मां सरस्वती

मां सरस्वती की पूजा विद्यार्थियों के लिए बहुत खास है,क्योंकि देवी सरस्वती प्रसन्न हुईं तो विद्यार्थियों का करियर संवर जाता है। देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए

इस दिन पपीते और केले के फल का दान करना चाहिए। इस दिन अपने गुरु से आशीष लेना ना भूलें। उन्हें पीले रंग का कपड़ा दान करें। विद्यार्थी अपने अध्ययन कक्ष के उत्तर पूर्व दिशा में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें। धूप-दीप जलाएं और उन्हें पीले रंग का फूल चढ़ाएं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वो मां सरस्वती की प्रतिमा के सामने पीले रंग के कागज पर लाल रंग की कलम से ग्यारह या इक्कीस बार मां सरस्वती का ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र लिखें। ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को पीला रंग काफी प्रिय है।

बसंत पंचमी पर एस्ट्रोसेज का तोहफा

आज के दौर में लाखों करोड़ों विद्यार्थी भ्रमित हैं कि उन्हें किस फील्ड में करियर बनाना चाहिए। 10वीं के लाखों छात्र परेशान हैं कि उन्हें कौन सी स्ट्रीम लेनी चाहिए। क्योंकि एक तरफ छात्रों की अपनी दिलचस्पी, अपना रुझान होता है तो दूसरी तरफ कई बार सामाजिक दबाव।

विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाने के लिये आज के दौर में कोग्निएस्ट्रो रिपोर्ट बहुत उपयोगी है। इस रिपोर्ट को एस्ट्रोसेज बसंत पंजमी के शुभ दिन आरंभिक छूट के साथ लॉन्च कर रहा है।  इस रिपोर्ट की मदद से 10वीं के विद्यार्थी जान सकते हैं कि उन्हें 11वीं में कौन से विषय लेने चाहिए, जिनसे उनका भविष्य बन सके। एक रिपोर्ट 12वीं के छात्रों के लिए है, जिसके जरिए वो जान सकते हैं कि उन्हें किस फील्ड में करियर बनाना चाहिए। तीसरी रिपोर्ट, उन प्रोफेशनल्स के लिए हैं, जो अपने करियर में संतुष्टि नहीं महसूस कर रहे। वो करना कुछ और चाहते हैं लेकिन कर कुछ और रहे हैं। कॉग्नि एस्ट्रो रिपोर्ट में व्यक्तित्व  के प्रकार और ज्योतिषीय गणना के अनुसार सुझाव दिये जाते हैं, यानि आप जिन विषयों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं उनका चुनाव करने में यह रिपोर्ट आपकी मदद करती है। कोग्निएस्ट्रो रिपोर्ट का निर्माण ज्योतिष और मनोविज्ञान की मदद से किया गया है इसलिये इसकी भविष्यवाणी सटीक होती है। बसंत पंचमी के दिन से ये रिपोर्ट एस्ट्रोसेज के सभी उपयोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगी, जबकि आज के दिन सिर्फ कुछ लोगों के लिए ही उपलब्ध है।

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बंसत पंचमी पर इस तरह करें पूजा

आइए जानते है बसंत पंचमी में होने वाली पूजा की विधि के बारे में

  • सबसे पहले भगवान विष्णु और मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के आसन पर स्थापित करें।
  • पूजा में ध्यान रखें कि प्रतिमाओ को पीले रंग का ही वस्त्र अर्पण किया जाए।
  • कोशिश करें कि हरसिंगार या गेंदे का ही फूल चढ़ाएं क्योंकि हरसिंगार की खुशबू आसपास के माहौल और पंच तत्वों में संतुलन बनाने में सहायक है।
  • इसके बाद चंदन का टीका लगाएं और धूप जलाएं। चंदन की खुशबू से वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
  • शुद्ध देशी घी में हरसिंगार का इत्र डालकर जलाएं। कहते हैं कि हरसिंगार के इत्र का दीपक पूरे वातावरण को संतुलित करता है तो शुद्ध घी के दीपक जलने से शुक्र ग्रह शुभ होता है और शारीरिक व मानसिक विकास होता है। यही नहीं, इससे आर्थिक स्थिति और संबंधों में सुधार आता है।
  •  बसंत पंचमी पर पीला रंग खास होता है इसलिए पीले मीठे चावल का भोग लगाएं।

जानें बसंत पंचमी पर पीले रंग का खास महत्व

कहते हैं बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व होता है। आपने भी देखा होगा कि इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। पीले रंग को वैष्णव धर्म और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा पीला रंग सात्विक गुण का भी प्रतीक हैं। यही नहीं पीला रंग पांच तत्वों में क्षितिज का प्रतिनिधित्व करता है। पीले रंग के प्रयोग से व्यक्ति गुणवान , विवेकी और उदार बनाता है। वहीं आधुनिक वास्तु शास्त्र में पीले रंग के महत्व की बात करें तो पीला रंग खांसी, जुकाम, लीवर, पीलिया, गैस और सूजन आदि रोगों के इलाज के लिए उपयोग होता है। कहते हैं कि पीले रंग की वस्तु या वस्त्र के उचित प्रयोग और विशेषज्ञों की सलाह से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है।

बसंत पंचमी पर ’गुरु ग्रह’ को खुश करने का अवसर

बसंत पंचमी का पर्व गुरु ग्रह की शांति के लिए शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पीला रंग ’गुरु ग्रह’ यानि ‘बृहस्पति ग्रह’ का प्रतीक है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को ‘गुरु’ कहा जाता है। वहीं लक्षण ज्योतिष में गुरु ग्रह के दोषित होने का संकेत है नीरस जीवन, झगड़ालू वातावरण और धन का अपव्यय। कहते हैं अगर पीड़ित व्यक्ति बसंत पंचमी के दिन भगवान विष्णु और मां सरस्वती की पूरी श्रद्धा से पूजा अर्चना करता है तो उसकी सारी पीड़ा खत्म हो जाती है और उसे उचित लाभ मिलता है।

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