13 या 14 अप्रैल- जानें कब है बैसाखी और कैसे मनाएँ यह त्योहार!

भारत में सिख समुदाय के लोग बेहद ही धूमधाम के साथ बैसाखी का पर्व मनाते हैं। यह सिख समुदाय के लोगों का नया साल होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह पर्व प्रत्येक वर्ष विक्रम संवत के पहले महीने में पड़ता है। इसके अलावा बैसाखी का त्यौहार फसलों का त्योहार माना गया है। यूं तो पूरे भारत में ही बैसाखी पर्व की धूम देखने को मिलती है लेकिन इस त्यौहार का असली लुफ्त उठाना हो तो पंजाब में यह त्योहार मनाने की सलाह दी जाती है। 

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बैसाखी विशेष अपने इस ब्लॉग में आज हम जानेंगे इस वर्ष बैसाखी का त्यौहार किस दिन मनाया जा रहा है। साथ ही जानेंगे इस त्यौहार को मनाने की परंपरा, इस त्यौहार को मनाने का ढंग, और इससे जुड़ी कुछ बेहद ही अनोखी और रोचक जानकारियां।

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13 या 14 अप्रैल- किस दिन मनाई जाएगी बैसाखी?

अमूमन तौर पर देखा गया है कि त्योहारों की तिथि को लेकर लोगों के मन में संशय हो जाता है। ऐसा ही कुछ इस वर्ष बैसाखी के त्यौहार पर भी हो रहा है। दरअसल बहुत से लोगों के मन में बैसाखी तिथि को लेकर शंका बैठ गई है। ऐसे में आपकी इस परेशानी को दूर करते हुए हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस वर्ष बैसाखी का यह त्यौहार 14 अप्रैल, 2023 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।

यह जानते हैं आप? बैसाखी के 5 क: दरअसल जब भी ज़िक्र बैसाखी का होता है तो इसमें ‘पांच क’ का विशेष महत्व बताया गया है। 5 लोगों के समूह को पंच प्यारे कहा जाता है और 5 क अर्थात कंघा,  केश, कड़ा, कच्छा और कृपाण। बात करें पंच प्यारों के नाम की तो, भाई दया सिंह, भाई धर्म सिंह, भाई हिम्मत सिंह, भाई मुखाम सिंह, और भाई साहब सिंह।

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क्यों मनाया जाता है वैशाखी का त्यौहार? 

माना जाता है कि गुरु तेग बहादुर सिंह यानी सिखों के नौवें गुरु औरंगजेब से युद्ध करते हुए शहीद हो गए थे। इस युद्ध में गुरु तेग बहादुर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध लड़ रहे थे। गुरु तेग बहादुर जी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुरु गोबिन्द सिंह अगले गुरु माने गए। इसके बाद सन् 1650 में पंजाब पर मुगल आतताइयों और अत्याचारों और भ्रष्टाचारियों का कब्जा हो गया था। ये लोग सरेआम लोगों को परेशान और उनपर अत्याचार करने लगे थे। तब गुरु गोविंद सिंह इस अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए आगे आए।  इसके लिए उन्होंने सिखों का एक संगठन बनाया। इस संगठन में सबसे पहले 5 योद्धा शामिल हुए जिन्हें पंच प्यारे का नाम दिया गया।

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कैसे मनाई जाती है बैसाखी? 

  • इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर गुरुद्वारे जाते हैं और वहां पूजा पाठ करते हैं। 
  • गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब की जगह को जल और दूध से शुद्ध किया जाता है। 
  • उसके बाद पवित्र किताब को ताज के साथ उस साफ जगह पर रखा जाता है। फिर किताब को पढ़ा जाता है। 
  • इस दौरान जो अनुयाई होते हैं वह ध्यान पूर्वक गुरु जी की वाणी सुनते हैं। 
  • इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए इस दिन विशेष प्रकार का अमृत तैयार किया जाता है जो पाठ खत्म करने के बाद लोगों में बांटा जाता है। 
  • इस दिन की एक परंपरा के अनुसार अनुयाई एक पंक्ति लगाकर अमृत को 5 बार ग्रहण करते हैं। 
  • इसके बाद शाम को अरदास के बाद अनुयायियों को प्रसाद दिया जाता है और अंत में लोग लंगर खाते हैं।

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बैसाखी का अर्थ और महत्व 

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि वैशाखी का यह खूबसूरत त्योहार फसलों का त्योहार कहा जाता है। ऐसे में यह समय किसानों के लिए बेहद ही समृद्ध समय के रूप में देखा जाता है। इस दौरान खुशियां उत्सव के रूप में मनाई जाती हैं। 

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मुख्य रूप से वैशाखी पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है क्योंकि यहां पर सिखों की आबादी ज्यादा है। इसके अलावा यह त्यौहार पश्चिम बंगाल में पोहेला बैशाख के नाम से मनाया जाता है, तमिलनाडु में पुथन्डू के नाम से मनाया जाता है, असम में बोहाग बिहू के नाम से मनाया जाता है, केरल में पूरा मुद्दीन के नाम से मनाया जाता है, उत्तराखंड में बिहू के नाम से मनाया जाता है, उड़ीसा में महाविष्णु संक्रांति के नाम से मनाया जाता है और आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में उगादि के रूप में मनाया जाता है। 

इसके अलावा भारत के साथ-साथ यह त्योहारा कनाडा और यूके में भी मौजूद सिख समुदाय के लोग जोरों शोरों से प्रतिवर्ष मनाते हैं।

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मेष राशि के जातक इस दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें। 

वृषभ राशि के जातक इस दिन सुबह के समय 108 बार ‘ॐ महलक्ष्म्यै नमः का पाठ करें। 

मिथुन राशि के जातक इस दिन भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का जाप करें। 

कर्क राशि के जातक इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें, विष्णु सहस्त्रानम का पाठ करें और गरीबों में गुड और चने का दान करें। 

सिंह राशि के जातक इस दिन अदित्य हृदयम का पाठ करें, सूर्य को जल में चुटकी भर गुड मिलाकर अर्घ्य दें। 

कन्या राशि के जातक इस दिन माँ दुर्गा को पाँच लाल फूल चढ़ाकर पूजा करें और भगवान गणेश की पूजा करें। गणपती को दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। 

तुला राशि के जातक इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करें। आटे का दीपक बनाकर इसमें कुछ दाने गेंहू के डालकर दीपक को घी डालकर घर के ईशान कोण में जलाएँ। 

वृश्चिक राशि के जातक प्रतिदिन हनुमान मंदिर जाएँ, सुंदरकाण्ड का पाठ करें। इसके साथ ही नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। 

धनु राशि के जातक ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।  

मकर राशि के जातक हर शनिवार ‘ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जप करें। अपने घर के हर कोने में गंगाजल छिड़कें। 

कुम्भ राशि के जातक इस दिन गरीबों को गेंहू, आटे या चावल का सामर्थ्यानुसार दान करें। 

मीन राशि के जातक इस दिन विष्णु मंदिर जाएँ और मिठाई, गुड और गेंहू का दान करें। 

जानने वाली बात: बैसाखी के साथ ही इस दिन अंबेडकर जयंती मनाई जाएगी। प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल के दिन भारतीय संविधान के पिता का दर्जा प्राप्त  डॉ बी आर अंबेडकर की जयंती भी देशभर में मनाई जाती है। बात करें डॉ अंबेडकर की तो उन्होंने आजादी के बाद भारत का पहला कानून लिखा था और उन्हें न्याय मंत्री बनने का सौभाग्य भी मिला था।

इसके अलावा यहाँ ये भी जानना दिलचस्प है कि, सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि कई अन्य देश में भी यह जयंती मनाई जाती है। कई जगहों पर इस दिन को समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में कई सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अथक लड़ाईयां लड़ी थीं।

यही वजह है कि अंबेडकर जयंती पर अलग-अलग जगहों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा कई जगहों पर सांस्कृतिक आयोजन जैसे कि नृत्य, गायन, चित्रकारी, नाटक, आदि प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।

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