जानें नव ग्रहों को शांत और दोष दूर करने के लिए औषधीय स्नान की विधि

अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि, हमारे बनते-बनते काम बिगड़ जाते हैं। या फिर कुछ ऐसा होता है कि, काम रुक जाते हैं जिसकी वजह से हमारे जीवन में तनाव और परेशानियाँ बढ़ने लगती हैं। अगर इसकी वजह जानने की कोशिश करें तो ऐसा कुंडली में मौजूद ग्रहों के कारण होता है। बता दें कि, कुंडली में मौजूद कोई भी ग्रह राशि परिवर्तन से पहले व्यक्ति को शुभ-अशुभ फल देने लगते हैं। इसके अलावा जब किसी राशि में किसी ग्रह के गोचर का अंतिम समय चल रहा होता है तो वह भी अगली राशि में जाने से पहले फल देने लगता है।

ग्रहों और नक्षत्रों का खेल समझना इतना भी आसान नहीं है। इस संदर्भ में आपके मन में कोई भी सवाल या संदेह है तो अभी आचार्य मृगांक को करें कॉल और जानें समाधान।

सरल शब्दों में समझाएं तो, मान लीजिये कि, सूर्य अभी मकर राशि में है और अगले पांच दिनों में वो कुंभ राशि में प्रवेश कर जायेगा। ऐसे में सूर्य व्यक्ति को मकर राशि के साथ-साथ कुंभ राशि का फल भी देने लग जायेगा। ऐसे में सलाह दी जाती है कि, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में किसी महत्वपूर्ण ग्रह का राशि परिवर्तन होने वाला हो तो उसे जानकार ज्योतिषियों से सलाह और जानकारी लेकर ग्रह दोष और पीड़ा को दूर करने के उपाय कर लेने चाहिये।

यदि आप के मन में भी इस बारे में कोई सवाल है या दुविधा है तो विद्वान ज्योतिषियों से करें फोन पर बात और जानें उसका हल।

औषधीय स्नान का महत्व और नियम 

अगर कुंडली में कोई ग्रह शत्रु राशि या नीच राशि मे बैठकर आपको शारीरिक या मानसिक कष्ट दे रहा है तो ऐसी स्थिति में रत्न (नग) भूल से भी धारण नहीं करना चाहिए बल्कि उसके स्थान पर उस ग्रह से संबंधित औषधि स्नान करना चाहिए और यह उस ग्रह से संबंधित वार को करना चाहिए।

औषधि स्नान की विधि 

जिस ग्रह से संबंधित औषधि स्नान करना है उसके दिन से एक दिन पहले रात को उसकी औषधि को जल में भिगो दें। अगले दिन उस वार को जिससे सम्बन्धित ग्रह है उसी ग्रह के मंत्र से जल में अंगुली घुमाते हुये 108 बार मंत्र को बोल कर जल को अभिमन्त्रित करें। इसके उपरांत स्नान करना आरम्भ करें और इसी मंत्र का मानसिक जाप स्नान के समय भी करते रहें।

सूर्य ग्रह के लिए औषधि स्नान

सूर्य- अगर सूर्य ग्रह कुंडली मे शत्रु राशि या नीच अवस्था मे बैठकर आपको रोग व समस्या दे रहे हैं तो निम्न औषधि को शनिवार रात्रि में तांबे के बर्तन में भिगोकर रखें और रविवार की सुबह इस जल में निम्लिखित मंत्र बोलते हुए अनामिका अंगुली घुमाएं तो जल अभिमंत्रित हो जाएगा। उसके उपरांत इसी जल को लगभग एक लीटर साफ जल में मिलाकर स्नान करें।

औषधि- बेल की जड़, लाल फूल ,मुलहठी,केसर व देवदारू।  

मंत्र-ॐ ह्री घ्रणि सूर्याय नमः

चंद्र ग्रह के लिये औषधि स्नान 

अगर जन्म कुंडली में चंद्र ग्रह अशुभ प्रभाव डाल रहा है तो रविवार को चाँदी के बर्तन में औषधि को भिगोकर रख दें और सोमवार को औषधि से निम्नलिखित मंत्र द्वारा अभिमंत्रित करके स्नान करने पर ग्रह से संबंधित रोगों व कष्टो का निवारण होता है।

औषधि- खिरनी की जड़, सिप्पी, सफेद चंदन और पंचगव्य। सभी सामग्री को उबालकर छान लें और ठंडा होने पर निम्लिखित मंत्र बोलते हुए 108 बार अंगुली घुमायें और स्नान करें:

मंत्र – ॐ सोम सोमाय नमः 

मंगल ग्रह के लिए औषधि स्नान

सोमवार रात्रि में तांबे के पात्र में औषधि को भिगो दें और मंगलवार की सुबह उबालकर थोड़ा ठंडा होने पर निम्लिखित मंत्र से अभिमंत्रित करके स्नान करें:

औषधि- अनंत मूल, देवदारू, लाल चंदन और गुड़हल के पुष्प।

मंत्र-  ॐ अं अंगारकाय नमः  

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बुध ग्रह के लिए औषधि स्नान

अगर कुंडली मे बुध ग्रह शारीरिक व मानसिक कष्ट देने वाला हो तो मिट्टी के एक बर्तन में  सभी सामग्री को मंगलवार की रात्रि में भिगो दें और बुधवार को उस संपूर्ण सामग्री को निम्लिखित मंत्र से 108 बार अभिमन्त्रित करके तथा इसी मंत्र का मानसिक जाप करते हुये स्नान करें:

औषधि- विधारा की जड़ अच्छे से कूट कर, गाय का थोड़ा सा गोबर, कमल गट्टा, छोटा सा कोई हरा फल, शहद और थोड़े से चावल

मंत्र- ॐ बुंं बुधाय नमः

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बृहस्पति ग्रह के लिए औषधि स्नान

अगर कुंडली मे बृहस्पति ग्रह के कारण कष्ट हो रहा हो तो निम्न वस्तुओं को बुधवार की रात्रि में सोने या पीतल के बर्तन में भिगोकर रख दें और बृहस्पतिवार की सुबह औषधि से भरे जल को नीचे दिए गए मंत्र से अभिमंत्रित करके स्नान करें:

औषधि- हल्दी, चमेली, शहद, मुलेठी और गिलोय 

मंत्र- ॐ बृं बृहस्पतये नमः

शुक्र ग्रह के लिए औषधि स्नान

अगर कुंडली मे शुक्र ग्रह शत्रु क्षेत्री या नीच अवस्था में बैठकर कष्ट दे रहा है तो तो निम्न औषधि को गुरुवार की रात्रि में चाँदी के पात्र में भिगो दें और शुक्रवार की सुबह निम्नलिखित मंत्र अभिमंत्रित करने बाद स्नान करने पर लाभ होगा:

औषधि- इलायची, सफेद कमल, मेंसिंल और केसर  

मंत्र- ॐ शुं शुक्राय नमः 

शनि ग्रह के लिए औषधि स्नान

शनि ग्रह अगर कुंडली मे पीड़ा दे रहा है तो शुक्रवार की रात्रि में एक लोहे के बर्तन में निम्लिखित सामग्री को भिगोकर रख दें। अगले दिन शनिवार की सुबह नीचे दिए गए मंत्र को बोलते हुए अंगुली जल में घुमाएं और इस अभिमंत्रित जल से स्नान करें:

औषधि- काली उड़द, काले तिल, लौंग और कोई भी सुगंध वाला फूल

मंत्र- ॐ शं शनैश्चराय नमः

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राहु ग्रह के लिए औषधि स्नान

अगर कुंडली में राहु ग्रह शत्रु क्षेत्री या नीच अवस्था मे बैठके कष्ट दे रहा है तो निम्न औषधि व मंत्र द्वारा अभिमंत्रित करके बुधवार की शाम या शनिवार की सुबह स्नान करने से ग्रह से संबंधित कष्टो से मुक्ति मिलती हैं। औषधि को भिगो कर रखने और स्नान के लिए लोहे का बर्तन उपयोग में लें:

औषधि- तिल, नागबेल, लोबान या कस्तूरी, तिल, मोती, गजमद, लोध्र फूल

मंत्र- ॐ रां राहवे नमः

केतु ग्रह के लिए औषधि स्नान

अगर कुंडली मे केतु ग्रह अशुभ अवस्था मे बैठकर कष्ट दे रहा है तो निम्नलिखित औषधि को उबालकर छान लें और से 108 बार अभिमन्त्रित करके शनिवार या बुधवार को स्नान करने से केतु ग्रह से संबंधित कष्टो से निजात मिलती हैं व निमलखित मंत्र से अभिमन्त्रित करके लाभ ले सकते हैं:

औषधि- लोबान, सरसों, देवदारू 

मंत्र- ॐ कें केतवे नमः 

विशेष सावधानी- उपरोक्त औषधि स्नान के बाद साबुन का प्रयोग ना करें, तभी आपको इसका समुचित लाभ प्राप्त होगा।

हम आशा करते हैं कि, ऊपर बताये गए उपयोग को करके आपको अपनी कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रह को शांत करने और उसके दुष्प्रभाव को कम करने में मदद अवश्य प्राप्त होगी लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो अभी आचार्य मृगांक  से फोन पर बात कर सकते हैं।

एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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