सूर्य और राहु की खतरनाक युति से लगेगा ग्रहण, 30 दिनों तक सभी राशियों पर दिखाई देगा “ग्रहण योग” का प्रभाव!

हमेशा से ही ज्योतिष शास्त्र में जहाँ सूर्य को समस्त ग्रहों के  राजा की तो वहीं राहु को छायाग्रह की उपाधि दी गई है। यदि किसी राशि में गोचर करते हुए राहु और सूर्य एक साथ आकर बैठ जाए तो राहु का प्रभाव सूर्य के प्रभाव को प्रभावित करते हुए, जातक को विपरीत फल देने लगता है। परंतु बावजूद इसके कई परिस्थितियों में ये भी देखा गया है कि सूर्य एक बेहद मजबूत ग्रह होने के चलते राहु के प्रभाव के बाद भी अपना संघर्ष नहीं छोड़ता है। सूर्य और राहु की युति “ग्रहण योग” का निर्माण करती है। जिसका सबसे अधिक प्रभाव जातक के स्वास्थ्य को प्रभावित करने का कार्य करता है। 

विशेषज्ञों अनुसार सूर्य और राहु की युति से बनने वाला ‘ग्रहण योग’ सबसे पहले जातक को नेत्र संबंधी समस्या देने का कार्य करता है। इसके अलावा सूर्य का प्रभावित होना जातक के पिता को भी सेहत संबंधी परेशानी दे सकता है।

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30 दिनों तक बनी रहेगी राहु-सूर्य की युति 

हाल ही में बीते 14 अप्रैल को सूर्यदेव में अपना गोचर मेष में किया है, जहाँ उनकी युति वहां पहले से मौजूद छाया ग्रह राहु के साथ हुई। सूर्य-राहु की ये युति लगभग 30 दिनों तक रहेगी, सूर्य 15 मई 2022 को अपना गोचर करते हुए वृषभ में प्रस्थान कर जाएंगे और इस कारण सभी जातकों को भी इस ग्रहण योग से मुक्ति मिल सकेगी। वैदिक ज्योतिष में मेष राशि में उपस्थित राहु का सूर्य से मिलन “ग्रहण योग” का निर्माण करेगा। ये माना गया है कि किसी राशि में सूर्य-राहु एक साथ युति करें तो ये स्थिति ग्रहण योग बनाती है, जो कई मायनों में विध्वंसक माना जाता है और इससे ही सूर्यग्रहण लगता है। 

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राहु-सूर्य की युति से लगेगा पहला सूर्यग्रहण 

वर्ष 2022 का पहला सूर्य ग्रहण भी राहु-सूर्य की इसी युति के कारण 30 अप्रैल 2022 की रात्रि 12 बजकर 15 मिनट से सुबह 04 बजकर 07 मिनट तक लगने जा रहा है। चूंकि सूर्य और राहु एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत ग्रह हैं, जिसमें जहाँ सूर्य को ऊर्जा व प्रकाश का कारक, वहीं राहु को छाया ग्रह व अंधकार का कारक माना जाता है। अब इनका 30 दिनों तक एक साथ युति करते हुए मेष राशि में विराजमान होना, हर जातक के जीवन को प्रभावित करने वाला है। 

एस्ट्रोसेज के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य और राहु की युति हर राशि के विभिन्न भावों में ग्रहण दोष बनाएगी, जिसकी अवधि 30 दिनों की होगी। तो चलिए अब विस्तार से जानते हैं आखिर इस ग्रहण योग का प्रभाव आपकी राशि को किस प्रकार प्रभावित करने वाला है…

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12 राशियों पर ग्रहण योग का प्रभाव 

मेष राशि:

ज्योतिषीय गणना के अनुसार मेष जातकों के लिए ये अवधि विशेष महत्वपूर्ण रहेगी। क्योंकि राहु-सूर्य की ये युति आपकी ही राशि में ग्रहण योग बनाएगी। साथ ही इस युति से लगने वाला वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण भी आपकी ही राशि में लगेगा। इसके परिणामस्वरूप आपको इस ग्रहण योग की अवधि के दौरान पूर्ण रूप से सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अन्यथा ये योग आपके स्वभाव को प्रभावित करते हुए आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दे सकता है। कई जातकों के पिता के स्वास्थ्य में भी बड़ी गिरावट आने के योग बनेंगे। इसलिए इस अवधि में पूरी सावधानी बरतना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। 

वृषभ राशि:

वृषभ राशि के जातकों के लिए राहु-सूर्य की युति से ग्रहण योग उनकी राशि के दूसरे भाव में बनेगा। जिसके कारण आपको पारिवारिक जीवन से जुड़ी कई परेशान संभव है। इस अवधि में आपको किसी मित्र, सगे-सम्बन्धियों आदि से कोई बड़ा धोखा मिलने की आशंका रहेगी। कार्यक्षेत्र पर नौकरीपेशा जातकों को भी तनाव मिलेगा। कई जातकों को किसी कारणवश अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। आमदनी के स्रोत प्रभावित होंगे, इसलिए किसी भी प्रकार का धन संबंधी जोखिम लेने से अभी बचना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। 

मिथुन राशि:

राहु-सूर्य की युति आपकी राशि से तृतीय भाव में बनते हुए ग्रहण दोष का निर्माण करेगी। जिसके परिणामस्वरूप जातकों के साहस और आत्मविश्वास में भारी कमी देखी जाएगी। इससे आपके मन में हमेशा भय व असुरक्षा का भाव भी आपको परेशान करता रहेगा और आप न चाहते हुए भी कोई भी निर्णय लेने में समर्थ नहीं होंगे। पारिवारिक जीवन में आपके छोटे भाई-बहनों को स्वास्थ्य से जुड़ा कोई कष्ट संभव है, जिसपर आपको अपने धन का एक बड़ा भाग खर्च करना पड़ेगा। 

कर्क राशि:

राहु-सूर्य की युति आपकी राशि के चतुर्थ भाव में ग्रहण दोष बनाएगी। ऐसे में आपको सबसे अधिक इस दौरान अपनी मां के स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस समय आपकी सुख-सुविधाओं में भी काफी कमी देखी जाएगी और इससे आप काफी असंतुष्ट दिखाई देंगे। यदि आप वाहन चलाते हैं तो आपको वाहन चलाते समय सतर्क रहना होगा, अन्यथा कोई दुर्घटना संभव है। 

सिंह राशि:

आपकी राशि के स्वामी सूर्य, राहु के साथ मिलकर राशि के पंचम भाव में ग्रहण योग बनाएंगे। जिससे सबसे अधिक इस राशि के बच्चों को इस ग्रहण योग से अशुभ फल प्राप्त होंगे। ऐसे में उन्हें बेहद सावधानी से अपनी संगती का चयन करना होगा, साथ ही साथ उन्हें खुद को केवल और केवल अपनी शिक्षा की ओर से केंद्रित करना होगा। इस राशि के युवा और वृद्धों को अभी किसी भी प्रकार की यात्रा करने से बचना होगा, अन्यथा इस दौरान वे किसी प्रकार की चोट के शिकार हो सकते हैं। 

कन्या राशि:

इस युति के बनने से कन्या राशि में सूर्य और राहु का छठे भाव में साथ आना और उसपर गुरु बृहस्पति की दृष्टि का होना, कन्या राशि के जातकों को शुरुआत से ही सावधान रहने की ओर इशारा कर रहा है। ये वो अवधि होगी जब आपके शत्रु सक्रीय होंगे और लगातार आपको हानि पहुंचाने का प्रयास करते हुए, आपकी परेशानी को बढ़ाने का कार्य करेंगे। साथ ही आपको इस समय आर्थिक तंगी से भी दो-चार होना पड़ेगा, जिसके कारण कई जातक भारी ब्याज पर कोई ऋण या कर्ज लेने का प्लान भी कर सकते हैं। 

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तुला राशि:

तुला राशि के लिए ये स्थिति सप्तम भाव में बनेगी। जिसके चलते सबसे अधिक शादीशुदा जातकों का दांपत्य जीवन प्रभावित होता दिखाई देगा। क्योंकि आप अपने अहम को अधिक महत्व देते हुए अपने पार्टनर को उचित मान-सम्मान नहीं देंगे और इस कारण आपका साथी के साथ बात-बात पर विवाद व झगड़ा होने की आशंका रहेगी। कार्यक्षेत्र पर भी वो जातक जो पार्टनरशिप में व्यापार करते हैं, उन्हें अपने बिज़नेस पार्टनर के साथ सही तालमेल बैठाने में परेशानी संभव है। 

वृश्चिक राशि:

राहु-सूर्य का ये ग्रहण योग आपकी राशि के अष्टम भाव में बनेगा। जिसके चलते आपके साथ कोई चोट, वाहन दुर्घटना आदि होने के योग बनेंगे। साथ ही इस दौरान आपके द्वारा की गई यात्रा से भी आपकी परेशानी बढ़ने की संभावना रहेगी, इसलिए अगर बहुत ज़रूरी न हो तो यात्राओं से परहेज करना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। हालांकि जिन लोगों की शादी नहीं हुई है उनके लिए ये ग्रहण योग ज्यादा प्रतिकूल नहीं सिद्ध होगा, लेकिन फिर भी सावधान रहने की सलाह दी जाती है। 

धनु राशि:

इस राशि के नवम भाव में सूर्य और राहु का ग्रहण दोष बन रहा है। ऐसे में इस योग से उन्हें  भाग्य  का साथ नहीं मिलेगा और उन्हें हर कार्य को पूरा करने में सामान्य से अधिक मेहनत करने की ज़रूरत होगी। हालांकि ये अवधि आपका रुझान धार्मिक कार्यों की ओर बढ़ा देगी। कई जातकों को अपने पिता के स्वास्थ्य पर भी काफी धन खर्च करना पड़ेगा।

मकर राशि:

सूर्य और राहु आपके दशम यानी कर्म भाव में युति करेंगे। ऐसे में इस ग्रहण दोष की वजह से मकर राशि के जातकों का कार्यक्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होगा। इस दौरान आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में परेशानी आएगी। साथ ही आप किसी लापरवाही के चलते अपने कार्य में गड़बड़ी करते हुए अपने लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए हर कार्य को अच्छे से और केंद्रित होकर करना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। कार्यस्थल पर दूसरों एक साथ वाद-विवाद करने से भी बचें। 

कुंभ राशि:

एकादश भाव में सूर्य-राहु युति करते हुए आपकी इच्छाओं को बढ़ाने का कार्य करेंगे। इस कारण आप अपनी कई इच्छाओं को पूरा करने में असफल रहेंगे और इससे आपका मन उदास नज़र आएगा। साथ ही आपके बच्चों की शिक्षा पर भी 30 दिनों के लिए यह दोष बुरा प्रभाव डालेगा।

मीन राशि: 

इस राशि के लिए सूर्य-राहु की उपस्थिति द्वादश भाव में होगी। जिसके कारण ये दोष आपके आर्थिक जीवन को प्रबलता से प्रभावित करेगा। कई जातकों को अलग-अलग प्रकार के नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं। कई जातकों के चेहरे पर हताशा और निराशा भी साफ़ देखी जा सकती है।

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