शिव जी को मांगनी पड़ी थी मां अन्नपूर्णा से भिक्षा; जानें अन्नपूर्णा जयंती का महत्व!

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार, अन्नपूर्णा देवी माता पार्वती की ही रूप है। अन्नपूर्णा जयंती के दिन मुख्य रूप से अन्न की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो लोग अन्नपूर्णा जयंती के दिन विधि-विधान से माता पार्वती की पूजा करते हैं, उनके घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती है। इसके साथ ही, माता अन्नपूर्णा अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अन्नपूर्णा जयंती के दिन चावल से कुछ मीठी चीज बनानी चाहिए। साथ ही, घर में दीपक जलाना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में कभी भी खाने-पीने की कमी नहीं होती है। 

खास बात यह है कि इस बार अन्नपूर्णा जयंती बेहद शुभ योग में मनाई जाएगी। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं अन्नपूर्णा जयंती की तिथि, पूजा मुहूर्त, कथा और इस दिन किए जाने वाले आसान उपायों के बारे में।

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अन्नपूर्णा जयंती 2023: तिथि व मुहूर्त

अन्नपूर्णा जयंती मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार को पड़ रही है। इस बार अन्नपूर्णा जयंती शुभ योग में मनाई जाएगी। यह योग व्यक्ति के लिए बहुत भाग्यशाली साबित होता है। शुभ योग में योगानुसार शुभ या मंगल कार्य कर सकते हैं। माना जाता है इस अवधि किए गए कार्य का परिणाम बेहद लाभकारी होता है।

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 26 दिसंबर 2023 की सुबह 05 बजकर 48 मिनट से 

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 27 दिसंबर 2023 की सुबह 06 बजकर 05 मिनट तक।

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व

अन्नपूर्णा जयंती का विशेष महत्व है। माना जाता है जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और निष्ठा से व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसके घर पर कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद सदैव व्यक्ति पर बना रहता है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में जब पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गई थी, तब माता पार्वती ने अन्न की देवी के रूप में अवतार लिया था ताकि पृथ्वी के लोगों को अन्न मिल सकते और समस्त मानव की रक्षा की जा सके इसलिए इस दिन माता अन्नपूर्णा की पूजा करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती है। जिस दिन माता अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था वह हिंदी कैलेंडर में मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा थी।

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अन्नपूर्णा जयंती के दिन करें इस विधि से पूजा

  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाए और फिर साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद घर, मंदिर व रसोई की अच्छे से सफाई कर के गंगाजल का छिड़काव करें और पूरे घर को शुद्ध करें।
  • फिर मंदिर में लाल कपड़े पर माता अन्नपूर्णा की तस्वीर रखें।
  • इसके बाद माता अन्नपूर्णा को टीका लगाएं और पुष्प अर्पित करें। 
  • फिर चूल्हे पर रोली, हल्दी और अक्षत लगाएं और माता अन्नपूर्णा की धूप और दीप जलाकर पूजा करें। साथ ही, माता पार्वती और भगवान शिव की भी पूजा करें।
  • पूजा के बाद चूल्हे पर चावल की खीर बनाएं।
  • सबसे पहले माता को भोग लगाएं और इसके बाद प्रसाद के रूप में सबको बांटे और फिर खुद ग्रहण करें।

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अन्नपूर्णा जयंती पर जरूर सुने ये कथा

अन्नपूर्णा जयंती की पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय ऐसा था जब एक बार पृथ्वी पर सूखा पड़ने लगा था। चारों तरफ अन्न और जल की कमी होने लगी थी। हर चीज का अकाल पड़ गया था और चारों ओर त्राहि त्राहि होने लगी थी। इस कारण जमीन बंजर हो गई और फसलें सूखने लगी थी और इसी कारण अन्न और जल का अभाव हो गया। फल, अनाज और पानी को लेकर पृथ्वी पर हाहाकार मच गया।  इंसान से लेकर पशु-पक्षी का भी जीवन संकट में आ गया था। 

तब लोगों ने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी की पूजा की और इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने अपने भक्तों की पुकार सुनी और शिव जी को उनकी योग निद्रा से जगाया और पूरी बात बताई।तब पृथ्वीवासियों के कल्याण के लिए शिवजी ने भिक्षुक का रूप धारण किया और माता पार्वती ने मां अन्नपूर्णा का अवतार लिया। भिक्षुक के रूप में भगवान शिव ने देवी अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी और उन्होंने भिक्षा में अन्न मांगा।

दान में मिले इस अन्न को भगवान शिव ने पृथ्वी लोक के सभी प्राणियों में बांट दिया। इस तरह फिर से पृथ्वी धन-धान्य से भर गई और अन्न व जल की समस्या से लोगों को छुटकारा मिल गया है। इस घटना के बाद से ही हर साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि के दिन को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन अन्नपूर्णा की पूजा करने से कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।

इस दिन क्या करें और क्या न करें

  • अन्नपूर्णा जयंती के दिन इस बात का विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए की किसी भी रूप से अन्न का अपमान न करें।
  • इस दिन घर आए किसी भी अतिथि का अपमान न करें। 
  • साथ ही, किसी भी व्यक्ति को खासकर भिक्षा मांगने वाले को खाली हाथ घर से न जाने दें। बल्कि हो सके तो जरूरतमंदों की सेवा करें।
  • अन्नपूर्णा जयंती के दिन घर में किसी भी रूप से तामसिक भोजन न बनाएं और न ही खाएं।
  • इस दिन गुस्सा न करें और हर किसी प्रेम से बात करें।
  • इस दिन गाय को हरा चारा खिलाएं व पशु-पक्षियों के लिए पीने के लिए जल रखें।

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अन्नपूर्णा जयंती के दिन करें ये उपाय; सुख-समृद्धि की नहीं होगी कमी

अन्नपूर्णा जयंती के दिन कुछ खास उपाय करने से जातक को कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। आइए जानते हैं इन खास उपायों के बारे में। 

अन्न की कमी को दूर करने के लिए

अन्नपूर्णा जयंती के दिन सुबह स्नान के बाद चूल्हे की पूजा करें और जब भी पहली रोटी बनाएं तो उसमें से शुरुआत की तीन रोटी अलग निकाल लें, जिसमें पहली रोटी गाय को, दूसरी रोटी कुत्ते को और तीसरी रोटी कौए को खिलाएं। ऐसा करने से कभी भी आपके घर अन्न की कमी नहीं होगी।

आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए

इस दिन गरीब या किसी ब्राह्मण को अनाज दान करें या उन्हें घर का बनाया हुआ भोजन पेट भर कर खिलाए। ऐसा करने से आपको कभी भी आर्थिक समस्याओं ले दो-चार नहीं होना पड़ेगा।

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स्वास्थ्य समस्याओं से निदान पाने के लिए

इस दिन चावल की खीर बनाकर कन्याओं को जरूर खिलाएं और इसे प्रसाद के रूप में भी सबको बांटे। माना जाता है कि ऐसा करने से जातक को कभी भी कोई स्वास्थ्य समस्या परेशान नहीं कर सकती है और यदि आप किसी दीर्घकालिक समस्या से जूझ रहे हैं तो उससे भी छुटकारा मिल सकता है। 

दरिद्रता दूर करने के लिए

यदि संभव हो तो इस दिन लाल, पीला, सफेद रंग के कपड़े पहने। यदि ऐसा कर पाना संभव न हो तो आप इस रंग का रुमाल अपनी जेब या पर्स में रख सकते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति दरिद्रता से छुटकारा पा सकता है और मां लक्ष्मी व माता अन्नपूर्णा का आशीर्वाद सदैव उस पर बना रहता है।

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