59 साल बाद गुरु-शनि की युति: क्या असर दिखायेगा यह महासंयोग?

शनि और गुरु की युति एक महासंयोग है क्योंकि यह दोनों ही ग्रह बहुत प्रभावशाली हैं और मंद गति से चलने वाले ग्रह माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि लगभग ढाई वर्ष में और गुरु लगभग बारह से तेरह माह के अंतराल में अपना राशि परिवर्तन करता है और इस तरह इनका एक राशि में मिलन होने में कई साल लग जाते हैं।

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बृहस्पति की गणना नैसर्गिक रूप से शुभ ग्रह में होती है तो शनि को क्रूर ग्रहों में प्रमुख माना जाता है। दोनों ही न्याय के पक्षधर होते हैं और जहां शनि क्रूरता से कर्म फल प्रदान करते हैं, वहीं बृहस्पति देव उदारता का परिचय देते हुए व्यक्ति को सही मार्ग पर आने का रास्ता दिखाते हैं।

59 साल बाद गुरु – शनि का महासंयोग

शनि लगभग तीस वर्ष में अपना एक राशि चक्र पूर्ण करता है और बृहस्पति लगभग बारह वर्ष में समस्त राशियों का भ्रमण कर पुनः उसी राशि में वापस लौट आता है। इस प्रकार इन दोनों का मिलन एक अद्भुत घटना मानी जाती है। वैदिक ज्योतिष में सर्वाधिक शुभ माना जाने वाला बृहस्पति ग्रह 29 मार्च 2020 रविवार की रात्रि 7:08 पर मकर राशि में प्रवेश करेगा, जहां पहले से ही मकर राशि का स्वामी शनि विराजमान है। 

इस प्रकार गुरु और शनि की यह युति अपना असर दिखाएगी। यह युति लगभग 3 महीने की अवधि तक रहेगी क्योंकि 30 जून को गुरु बृहस्पति वापस अपनी धनु राशि में लौट जाएंगे और 20 नवंबर तक उस राशि में रहेंगे लेकिन 20 नवंबर 2020 को वापस मकर राशि में गुरु के आने के बाद यह युति फिर से अपना असर दिखाने लगेगी। इस प्रकार गुरु बृहस्पति और शनि मकर राशि में लगभग 59 साल बाद फिर मिल रहे हैं। 

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गुरु शनि की युति का मंगल मिलन 

गुरु शनि की युति की सबसे खास बात यह भी है कि जब 29 मार्च को बृहस्पति मकर राशि में शनि के साथ युति करेगा तो वहां पर उच्च का प्रभाव लिए हुए मंगल भी उपस्थित होगा, जो कि 4 मई तक उसी राशि में स्थित रहेगा। अर्थात लगभग एक महीना और उससे कुछ अधिक की अवधि में गुरू, मंगल और शनि की युति होगी, जो कि कई मामलों में बेहद प्रभावशाली भी कही जा सकती है।

इन तीनों ग्रहों की युति किसी प्राकृतिक आपदा अथवा आतंकवादी घटना की ओर भी इशारा करती है और ऐसे में किसी युद्ध की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यह तीनों ही ग्रह अत्यंत प्रभावशाली होते हैं क्योंकि लंबे समय तक एक राशि में स्थित रहकर अपना प्रभाव डालते हैं।

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इतिहास के आईने में गुरु शनि युति 

यदि इतिहास के आईने पर नजर डाली जाए तो अब से लगभग 59 साल पहले वर्ष 1961 में गुरु और शनि ने एक साथ मकर राशि में युति की थी और और 1962 तक यह स्थिति चली। हम सभी जानते हैं कि उसी समय में भारत चीन युद्ध की शुरुआत हो गई थी, जिसमें भारत का नुकसान हुआ था और  इसी समय में क्यूबा का मिसाइल संकट भी इसी समय में दिखाई पड़ा था। रूस और अमेरिका जैसे बड़े देशों में परमाणु युद्ध की स्थिति आ चुकी थी। 

इसलिए मुख्य तौर पर कहा जा सकता है कि इन दोनों का एक साथ आना और खासकर मंगल का साथ होना, शुरुआती तीन महीनों कि युति में गंभीर परिणाम दे सकता है, जिसमें भारत के लिए चीन अथवा पाकिस्तान से शत्रुता में वृद्धि, युद्ध की आशंका, आंतरिक संघर्ष और विद्रोह की स्थितियां बनेंगी। 

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बृहस्पति  स्वतंत्र भारत की कुंडली में  इस समय नवम भाव में प्रवेश करेगा, जो कि धर्म का भाव भी है। बृहस्पति और शनि की यह युति नवम भाव और तीसरे भाव पर मुख्य रूप से प्रभाव डालेगी, जिसकी वजह से धार्मिक क्रियाकलापों में बढ़ोतरी होगी और बड़े-बड़े  राजनीतिक तथा धार्मिक फैसले न्यायालय द्वारा सुनाए जाएंगे। इसी समय में पड़ोसी देशों से स्थितियों पर गलत असर भी पड़ सकता है। कई देशों में इस समय खंड में लोकतंत्र की मजबूती के लिए सत्ता संघर्ष और जनता के प्रदर्शन देखने को मिलेंगे। इसी समय में विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र सकता है। हालाँकि वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापारिक समझौतों से भारत को आंशिक तौर पर लाभ भी मिलेगा। 

गुरु – शनि युति का आपकी राशि पर असर 

अभी तो हमने बात की  गुरु शनि युति के कारण देश और दुनिया पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में। आइए आप जानते हैं कि यह युति आपकी राशि के लिए क्या फल लेकर आएगी: 

मेष राशि 

मेष राशि के लोगों के दशम भाव में गुरु शनि युति करेंगे। यह भाव आपके कर्म का भाव है। इस युति के प्रभाव से आपको अपने कर्म क्षेत्र में बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे और आप अपने कार्यस्थल पर साथ काम करने वालों की बहुत मदद करेंगे। इससे आपके प्रयासों को प्रशंसा मिलेगी और आपका करियर आगे बढ़ेगा। इस युति के प्रभाव से आपके पारिवारिक जीवन में  समस्याएं आ सकती हैं। परिवार के बुजुर्गों का, विशेषकर माता-पिता का स्वास्थ्य इस दौरान आपको चिंताएं दे सकता है। कुछ लोगों को अपने पूर्वजों का मकान प्राप्त होने के योग बनेंगे। 

वृषभ राशि 

वृषभ राशि के लोगों के नवम भाव में गुरु शनि का प्रभाव दिखाई देगा, जिसके कारण ये लोग धार्मिक यात्राएं करेंगे और तीर्थाटन इनका मुख्य रुचिकर विषय रहेगा। ये लोग धार्मिक परोपकार के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और सामाजिक सरोकार के कार्य भी करेंगे। इससे इनका मान सम्मान बढ़ेगा तथा अनेक यात्राएं करने का मौका मिलेगा। समाज के गणमान्य लोगों में इन्हें उठने बैठने का मौका मिलेगा लेकिन यही समय इनकी नौकरी में व्यापक तौर पर बदलाव का समय रहेगा। इनका कहीं दूर ट्रांसफर अथवा नौकरी बदलने का समय भी यही होगा।

मिथुन राशि 

आपकी राशि से अष्टम भाव में शनि और गुरु की युति होगी। यह आपको अध्यात्म के मार्ग पर ले जाने का प्रयास करेगी और यदि आप इस मार्ग को चुनते हैं तो आपको बहुत ही अच्छे अनुभव होंगे। भौतिक तौर पर यह है युति आपके लिए अधिक अनुकूल नहीं होगी। इस समय में धन की हानि हो सकती है। आपके परिवार में इस युति के प्रभाव से कुछ अच्छे परिणाम भी देखने को मिलेंगे, जैसे कि परिवार में वृद्धि हो सकती है। आपका स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है। आपके नेत्रों में पीड़ा हो सकती है तथा जोड़ों में दर्द की समस्या से ग्रसित हो सकते हैं।

कर्क राशि 

कर्क राशि के सप्तम भाव में गुरु शनि की युति होने से आपको समुद्र पार यात्राओं से तथा विदेशी व्यापार से उत्तम धन लाभ की प्राप्ति होगी। इस समय में आपके व्यापार का विस्तार होगा और आपकी दूरदर्शिता आपके काम आएगी। आपका स्वास्थ्य भी मजबूत बनेगा तथा दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनेगी। इस युति के प्रभाव से आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा और समाज में आपकी छवि मजबूत होगी। आपकी लोकप्रियता में इजाफा देखने को मिलेगा तथा कार्य क्षेत्र में पदोन्नति होने के प्रबल योग बनेंगे लेकिन आपको आत्माभिमान से बचना होगा।

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सिंह राशि 

सिंह राशि के छठे भाव में बृहस्पति और शनि की युति होगी। इस युति के प्रभाव से आपको स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। आपको अपच, एसिडिटी, गैस, गुर्दों में समस्या या मूत्र संबंधित रोग हो सकते हैं। इस समय में आपको कोई भी नया मुकदमा दायर करने से बचना चाहिए लेकिन यदि कोई मुकदमा लंबित है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए यह समय उपयुक्त रहेगा, आप को मनमाफिक सफलता मिल सकती है। खर्चों में बढ़ोतरी होगी और परिवार में किसी सदस्य की बीमारी आपकी चिंता का कारण बन सकती है। यदि आप नौकरी करते हैं तो यह युति आपको ऊंचाइयां देगी।

कन्या राशि 

आपकी राशि के पंचम भाव में गुरु शनि की युति अपना प्रभाव दिखाएगी, जिसके परिणाम स्वरूप प्रेम संबंधों में परेशानियां आएँगी। एक दूसरे को समझने में समस्या आएगी लेकिन यदि आप एक दूसरे से सच्चा और निश्चल प्रेम करते हैं तो यह समय आपके प्रेम जीवन को मजबूती देगा। यदि आप विद्यार्थी हैं तो शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलने का समय आ गया है। यदि आप शादीशुदा हैं तो संतान की वृद्धि हो सकती है। कुछ लोगों को प्रेम विवाह की सौगात मिलेगी। इसके अतिरिक्त आपकी आमदनी में अच्छी वृद्धि देखने को मिलेगी और समाज में आपका स्थान मजबूत होगा। कुछ लोगों की नौकरी छूटने और उसके बाद दोबारा नौकरी मिलने के योग बनेंगे।

तुला राशि 

तुला राशि के चतुर्थ भाव में गुरु शनि की युति होने से आपके परिवार में उथल-पुथल मच सकती है। इस समय काल में आपके गृह परिवर्तन के योग बनेंगे। अर्थात आप अपना निवास स्थान बदल सकते हैं। इस समय घर में कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो सकता है या आप कोई नया मकान खरीद सकते हैं। इसके अतिरिक्त कोई नई मशीन लाकर अपनी फैक्ट्री में लगा सकते हैं। आपके कार्यक्षेत्र में भी यह युति आपको जबरदस्त लाभ देगी और आपके काम की भूरि भूरि प्रशंसा होगी। इस युति के प्रभाव से परिवार में पूजा पाठ या ऐसा ही कोई धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो सकता है।

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के लोगों के तीसरे भाव में गुरु शनि युति का प्रभाव मुख्य रूप से देखने को मिलेगा, जिसकी वजह से ये लोग अनेक यात्राएं करेंगे तथा इनका आचरण धार्मिक होगा। समाज में परोपकार के कामों में उनका खूब मन लगेगा। उन्हें अत्यधिक यश और कीर्ति की प्राप्ति होगी। इनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी लेकिन अपने आलस्य के कारण यह मुख्य मौक़ों को गँवा भी सकते हैं। यह दूसरों का भला करने के चक्कर में कुछ कष्ट भी उठा सकते हैं। इस समय काल में आपको अपने साथ काम करने वालों पर विशेष ध्यान देना होगा तथा छोटे भाई-बहनों के स्वास्थ्य को लेकर संजीदा रहना होगा।

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धनु राशि 

आपकी राशि के दूसरे भाव में शनि गुरु की युति होगी, जिसके प्रभाव से आपकी वाणी में गंभीरता बढ़ेगी। आप जिस बात को कहेंगे, उससे लोग प्रभावित होंगे और इसका आपको अच्छा लाभ मिलेगा। इस युति के प्रभाव से आपके परिवार में कुछ तनाव देखने को मिल सकता है तथा संपत्ति के संबंध में तीखी नोक झोंक भी हो सकती है। इस समय में आप अपने ससुराल पक्ष के बारे में भी विचार करेंगे। आपको अपने स्वास्थ्य का थोड़ा ध्यान रखना होगा क्योंकि बीमार पड़ने की संभावना बन सकती है। आर्थिक तौर पर यह ग्रह संयोजन आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगा। 

मकर राशि 

आपकी राशि के लिए शनि गुरु की यह युति बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगी क्योंकि यह आपकी राशि में ही हो रही है। इसके प्रभाव से आपको अचानक से अत्यधिक प्रसिद्धि मिल सकती है। समाज के लोगों द्वारा आपको किसी ऊँचे पद पर बिठाया जा सकता है। आप किसी संस्था के अधिकारी बन सकते हैं लेकिन आपको जोड़ों में दर्द या गैस की समस्या हो सकती है। इस गोचर के प्रभाव से आपके दांपत्य जीवन में भी सुख बढ़ेगा और आपका जीवन साथी खुलकर अपने मनोभावों को व्यक्त करेगा, जिससे आपके दांपत्य जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। व्यापार के मामले में यह युति आपके लिए अधिक फ़ायदेमंद रहेगी।

कुंभ राशि 

आपकी राशि से बारहवें भाव में गुरु शनि की युति होगी, जिसकी वजह से आपके खर्चों में अचानक से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इस समय काल में आप किसी धार्मिक कार्य से विदेश यात्रा भी कर सकते हैं। इस युति के आकार लेने से आप अत्यधिक परोपकार की भावना से ओत प्रोत होकर दूसरों की मदद करेंगे लेकिन वे लोग आपकी मदद का अनुचित लाभ भी उठा सकते हैं, इसलिए आपको थोड़ा सतर्क रहना होगा। इसके अतिरिक्त आपको कोर्ट कचहरी के मामलों में अधिक धन खर्च करना पड़ेगा और आपके विरोधी इस समय काल में अधिक प्रबल हो जाएंगे, इसलिए उनके प्रति सावधानी बरतनी आवश्यक होगी।

मीन राशि

मीन राशि वालों के ग्यारहवें भाव में शनि गुरु की युति होने से आपकी आमदनी में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी। इस समय काल में आपके संबंध समाज के गणमान्य लोगों से बनेंगे और आपको सोसाइटी में ऊंचा स्थान प्राप्त होगा। आपको कोई बड़ा पद भी प्राप्त हो सकता है। आपके प्रेम जीवन के लिए यह समय थोड़ा कष्टकारी रहेगा और आपकी परीक्षा की घड़ी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह युति आपको उचित परिणाम प्रदान करेगी। यदि आप नौकरी करते हैं तो आप के वरिष्ठ अधिकारी आपसे प्रसन्न रहेंगे, जिसकी वजह से आपको अधिक लाभ मिलेंगे।

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